कुत्तों के मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद खुशी से झूमे पशु प्रेमी
अमित अविनाश
- 22 Aug 2025, 07:13 PM
- Updated: 07:13 PM
नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को अन्यत्र ले जाए जाने के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा अपने पूर्व के निर्देश में संशोधन करने के बाद शुक्रवार को पशु प्रेमियों ने जंतर-मंतर पर जश्न मनाया।
तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि स्वस्थ आवारा कुत्तों का बंध्याकरण किया जाना चाहिए, उनका टीकाकरण किया जाना चाहिए और पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियमावली, 2023 के अनुरूप उन्हें उनके मूल स्थानों पर लौटा दिया जाना चाहिए। पीठ ने नगर निगमों को सड़क पर रहने वाले कुत्तों की संख्या को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वार्ड में निर्दिष्ट भोजन क्षेत्र बनाने का भी निर्देश दिया।
फैसला आने के तुरंत बाद, प्रतीक्षारत कार्यकर्ताओं और देखभाल करने वालों ने एक-दूसरे को गले लगाया और नारे लगाए। कुछ लोगों ने "हर हर महादेव" कहकर ईश्वर का धन्यवाद किया। कई लोगों ने इस फैसले को करुणा की "जीत" बताया।
जश्न मनाने वालों में शामिल एक व्यक्ति ने कहा, "यह एक ऐतिहासिक दिन है। अदालत ने पशुओं की देखभाल के सही तरीके को बरकरार रखा है।”
एक अन्य कार्यकर्ता ने कहा कि इस फैसले से उन लोगों को "बहुत राहत" मिली है जिनका आवारा कुत्तों से गहरा जुड़ाव है। उन्होंने कहा, "हम बहुत चिंतित थे, लेकिन आज के फैसले से हमें उम्मीद है कि दया और विज्ञान साथ-साथ चलेंगे।"
कई लोगों के लिए यह निर्णय राहत लेकर आया है, क्योंकि 11 अगस्त को न्यायालय ने आदेश दिया था कि सभी आवारा पशुओं को आश्रय स्थलों में स्थानांतरित कर दिया जाए। पशु कल्याण समूहों ने कहा था कि बुनियादी ढांचे की कमी के कारण यह आदेश अव्यावहारिक है।
'पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स' (पेटा) इंडिया ने इस निर्णय की सराहना की तथा अधिकारियों से कुत्तों को भोजन देने के लिए पर्याप्त स्थान बनाने का आग्रह किया। उसने जनता को पालतू जानवर खरीदने के बजाय उन्हें गोद लेने की याद दिलायी।
समूह ने नागरिकों से सतर्क रहने का भी आह्वान किया, ताकि सामुदायिक कुत्तों को गलत तरीके से "आक्रामक" न करार दिया जाए और उन्हें उनके क्षेत्रों से न हटाया जाए।
इसी प्रकार, ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया की प्रबंध निदेशक आलोकपर्णा सेनगुप्ता ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बंध्याकरण और टीकाकरण इसकी संख्या नियंत्रण का "सबसे टिकाऊ और मानवीय तरीका" है।
उन्होंने कहा कि असली चुनौती यह सुनिश्चित करना होगा कि नगर निगम उचित बुनियादी ढांचे और जवाबदेही के साथ निर्देशों को जिम्मेदारी से लागू करें।
जंतर-मंतर पर यह जश्न कई लोगों के लिए भावुक भी रहा।
एक देखभालकर्ता मेघना सिंह ने नम आंखों के साथ कहा, ‘‘कल रात से ही मैं बहुत चिंतित थी, लेकिन आज ये आंसू सिर्फ खुशी के हैं। अब मुझे सचमुच एहसास हुआ कि कितने लोग इन आवारा कुत्तों के लिए खड़े हैं और उनसे प्यार करते हैं।’’
यह फैसला पशु कल्याण समूहों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, जिन्होंने सभी आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में भेजने के शीर्ष अदालत के पहले के निर्देश का यह तर्क देते हुए विरोध किया था कि ऐसी केंद्र पर्याप्त नहीं हैं।
भाषा अमित