अंतरिक्ष के क्षेत्र में उभरते देशों को एकजुट करने के लिए भारत को नेतृत्व करना चाहिए: सारस्वत
आशीष नेत्रपाल
- 22 Aug 2025, 06:43 PM
- Updated: 06:43 PM
नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) नीति आयोग के सदस्य वी के सारस्वत ने शुक्रवार को कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में रुचि रखने वाले उभरते देशों को एकजुट कर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष गठबंधन बनाने में भारत को एक प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे आर्थिक विकास के लिए अंतरिक्ष परिसंपत्तियों और उपग्रह नेटवर्क की निगरानी जैसे साझा महत्व के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।
भारत 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ‘चंद्रयान-3’ के उतरने के उपलक्ष्य में 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाता है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर अपने संबोधन में सारस्वत ने कहा कि वर्तमान परस्पर निर्भर विश्व में वैश्विक अंतरिक्ष गठबंधन एक प्रमुख आवश्यकता है, जहां भारत विभिन्न देशों के साथ अंतरिक्ष प्रणालियों, अनुप्रयोगों के विकास और उनके उपयोग पर काम कर रहा है।
शीर्ष मिसाइल वैज्ञानिक ने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर, नए अंतरिक्ष युग को बड़े रुझानों द्वारा परिभाषित किया जा रहा है। हम छोटे उपग्रहों, अंतरिक्ष निर्माण और अंतरिक्ष डेटा को आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स), स्वचालन और शासन में एकीकृत करने वाले अनुप्रयोगों के समूह की बात कर रहे हैं।’’
सारस्वत ‘नेशनल मीट-2’ को संबोधित कर रहे थे, जो इसरो और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच एक संवाद कार्यक्रम था। इस आयोजन में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (आईएनएसपीएसीई) के अध्यक्ष पवन गोयनका भी शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की निगरानी, आर्थिक विकास के लिए उपग्रह नेटवर्क, सीमा सुरक्षा, पर्यटन, अंतरिक्ष में मलबे में कमी लाने, अंतरिक्ष अन्वेषण, अंतरिक्ष आधारित ऊर्जा और भविष्य के लिए कानूनी ढांचे के संबंध में एक वैश्विक गठबंधन आवश्यक है।
सारस्वत ने कहा कि अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा, मज़बूत औद्योगिक आधार और उद्यमशीलता की भावना के साथ भारत वैश्विक परिदृश्य में एक बड़ी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्ट-अप के बीच तालमेल के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘प्रत्येक अपने साथ अद्वितीय शक्तियां, नीतिगत दिशा, तकनीकी विशेषज्ञता, नवीन दक्षता और क्षेत्र-विशेषज्ञता लेकर आता है। साथ मिलकर वे ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं जो आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो।’’
सारस्वत ने हितधारकों से गंभीरतापूर्वक सोचने, गहन सहयोग करने और समावेशी ढंग से कार्य करने का आग्रह किया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रौद्योगिकी का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे, चाहे वह व्यक्ति कितना भी दूर क्यों न हो।
भाषा आशीष