कांग्रेस ने उत्तराखंड विधानसभा में हंगामा कर धराली आपदा पर भी चर्चा नहीं होने दी: मुख्यमंत्री धामी
दीप्ति सिम्मी
- 20 Aug 2025, 10:06 PM
- Updated: 10:06 PM
देहरादून, 20 अगस्त (भाषा) उत्तराखंड विधानसभा में कांग्रेस के हंगामे के कारण दो दिन में ही सत्र समाप्त होने से नाराज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को पार्टी की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि उसने धराली आपदा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा नहीं होने दी ।
धामी ने गैरसैंण विधानसभा में सदन के अंदर पूरी रात बिताने के लिए भी कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह ‘‘मुद्दा विहीन विपक्ष का सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए किया गया एक नाटक’’ था।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में विधानसभा के मानसून सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद संवाददाताओं से कहा कि मानसून के दौरान अवरुद्ध सड़कों सहित कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करके सभी जनप्रतिनिधि गैरसैंण पहुंचे थे और राज्य सरकार ने भी यहां सत्र को लंबा चलाने की तैयारियां की थीं ताकि जनहित के मुद्दों पर बात हो सके।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन विपक्ष पहले दिन से ही यहां सत्र चलाने के मूड में बिल्कुल नहीं था क्योंकि उनके निजी मुद्दे और निजी हित इसे चलाने में आड़े आ रहे थे।’’
धामी ने कहा कि सत्र के शुरू होने से पहले मंगलवार सुबह भी वह नेता प्रतिपक्ष से मिले थे और उनसे सत्र को ठीक प्रकार से चलाने में सहयोग करने का अनुरोध किया था लेकिन प्रश्नकाल सहित पूरा दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया।
उन्होंने कहा कि इस समय प्रदेश में सबसे बड़ा मुद्दा उत्तरकाशी के धराली और पौड़़ी के सैंजी गांव, पैठाणी और उसके आसपास के क्षेत्रों सहित प्रदेश में कई जगह आयी प्राकृतिक आपदा है जिसके लिए राजनीति से ऊपर उठकर सभी को पीड़ितों के साथ खड़े रहना चाहिए लेकिन हंगामे के कारण इस मुद्दे पर भी चर्चा नहीं हो पायी।
उन्होंने कहा कि शायद विपक्ष के पास इस पर कहने के लिए कुछ नहीं था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्र के दौरान उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक, लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक, जबरन धर्मांतरण विरोधी विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विधेयकों और अनुपूरक बजट पर भी विपक्ष ने चर्चा नहीं होने दी ।
प्रदेश में पंचायत चुनावों में कथित धांधली और बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर विधानसभा में तत्काल चर्चा की मांग को लेकर कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया और मांग न माने जाने पर सदन में धरना दिया। मंगलवार को कार्यवाही समाप्त होने के बाद भी कांग्रेस सदस्य वहीं डटे रहे और वहीं गद्दा बिछाकर सोए ।
धामी ने इस संबंध में कहा कि मंगलवार को सदन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद रात में ही उन्होंने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य तथा कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ विधायकों से धरने से उठने का अनुरोध किया था और कहा था कि बातचीत के जरिए उनके सभी मुद्दों का हल निकाला जाएगा ।
उन्होंने कहा कि उन्हें तिलक राज बेहड़ और ममता राकेश जैसे कांग्रेस के कई वरिष्ठ विधायकों की चिंता भी थी जिन्हें दवाइयां खानी पड़ती हैं लेकिन इसके बावजूद वे नहीं उठे ।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि उन्होंने जो पूरी रात यहां बिताई, वह सस्ती लोकप्रियता पाने का केवल एक नाटक था। इसके सिवाय कुछ नहीं था।’’
धामी ने कांग्रेस पर मुद्दाविहीन होने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘सबने देखा कि कैसे हंगामा किया गया, विधानसभा सचिव की मेज पलटी गयी, माइक तोड़े गए और विधानसभा की कार्यसूची के कागजों को उछाल-उछाल कर फेंका गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा माइक चलना बंद हो गया और दिवंगत पूर्व विधायक मुन्नीलाल शाह को श्रद्धांजलि देने के लिए मुझे पीछे की मेज पर जाना पड़ा।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें लगता है कि विपक्ष ने जानबूझकर ऐसा किया क्योंकि विपक्ष मुद्दा विहीन है और वह हंगामा करके महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से भागना चाहता था ।
उन्होंने कहा, ‘‘यह उनकी हताशा और निराशा का भी प्रमाण है । पंचायत चुनावों में मिली हार का बदला इन्होंने जनता की गाढ़ी कमाई से चलने वाले सदन का नुकसान करके लिया है।’’
मुख्यमंत्री ने हाल में संपन्न पंचायत चुनावों को लेकर कहा कि सब जगह ठीक से चुनाव हुए हैं और नैनीताल में जहां कानून-व्यवस्था की स्थिति की बात सामने आयी है, वहां से पुलिस अधिकारियों का स्थानांतरण कर दिया गया है और पूरे प्रकरण की जांच की घोषणा की गई है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा से लेकर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तक पूरे प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को जिम्मेदारी देने से इनकार कर दिया है।
उन्होंने बताया कि बुधवार को गैरसैंण में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हुई जिसमें युवाओं, महिलाओं और पूर्व सैनिकों की क्षमताओं का राज्य के विकास में पूरा उपयोग करने पर चर्चा की गयी।
उन्होंने कहा कि जल्द ही इन सभी वर्गों के लिए नीति भी लायी जाएगी।
भाषा दीप्ति