दिल्ली के नए स्कूल फीस कानून के खिलाफ आप ने अभियान शुरू किया
यासिर अविनाश
- 19 Aug 2025, 08:41 PM
- Updated: 08:41 PM
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) दिल्ली में विपक्षी आम आदमी पार्टी (आप) ने नए स्कूल फीस कानून के खिलाफ मंगलवार को अभियान शुरू किया और आरोप लगाया कि यह निजी स्कूलों को मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने का अधिकार देता है तथा फीस बढ़ोतरी को लेकर निर्णय में अभिभावकों की भागीदारी को रोकता है।
इन आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
भाजपा सरकार ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और पारदर्शिता विनियमन) अधिनियम, 2025 को अपनी मंजूरी दे दी है, जिसके बाद सरकार ने आधिकारिक तौर पर कानून को अधिसूचित कर दिया है।
इस बयान के एक दिन बाद आप की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कानून के खिलाफ अभियान शुरू किया और शेखसराय में एक निजी स्कूल के बाहर इसके विरोध से संबंधित पर्चे बांटे।
पार्टी के विधायक जरनैल सिंह ने भी इसी तरह का अभियान तिलक नगर में शुरू किया।
आप की छात्र शाखा ‘एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स’ (एएसएपी) पूरे दिल्ली के सभी स्कूलों के बाहर जागरूकता अभियान करते हुए पहल का नेतृत्व करेगी।
हिंदी और अंग्रेजी में छपे इन पर्चेां में दावा किया गया है कि नए कानून के तहत निजी स्कूल मालिकों को लाभ पहुंचाने के लिए अभिभावकों को कीमत चुकानी पड़ेगी और इसमें इस वर्ष अप्रैल में की गई फीस वृद्धि को वापस लेने का प्रावधान नहीं है।
भारद्वाज ने भाजपा पर विपक्ष या अभिभावक संघों से परामर्श किए बगैर विधेयक पारित करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, ‘‘यह कानून बिना किसी चर्चा के गुप्त रूप से दिल्लीवासियों पर थोप दिया गया है। अभिभावक मूकदर्शक बन जाएंगे, जबकि निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने की अनियंत्रित शक्ति प्राप्त होगी।’’
आप के अनुसार, अभिभावक संघों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद से मुलाकात के लिए कई बार समय मांगा है, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया है।
पार्टी ने हर विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग स्कूलों को केंद्रित करते हुए, प्रतिदिन अभियान जारी रखने की योजना बनाई है।
भारद्वाज ने कहा, ‘‘यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक अभिभावकों को निजी स्कूलों के साथ भाजपा सरकार की मिलीभगत के बारे में पूरी जानकारी नहीं हो जाती।’’
भाषा यासिर