उत्तराखंड में 2023 के मुकाबले इस साल मार्च-अप्रैल में आग लगने की घटनाओं में कई गुना वृद्धि
दीप्ति संतोष नेत्रपाल
- 29 Apr 2024, 07:40 PM
- Updated: 07:40 PM
देहरादून, 29 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड में इस साल मार्च-अप्रैल के दौरान 2023 के मुकाबले वनाग्नि सहित आग लगने की घटनाओं में कई गुना वृद्धि हुई है। इस अवधि के दौरान नैनीताल सहित कुछ जिलों में तो यह वृद्धि दस गुना से भी अधिक रही।
शोधकर्ता पलक बालियान ने सोमवार को 'पीटीआई भाषा' को बताया कि शोध विचारक समूह द्वारा नासा के ‘विजिबल इन्फ्रारेड इमेजिंग रेडियोमीटर सुइट’ से ली गईं अग्नि बिंदु छवियों के विश्लेषण से पता चला है कि इस साल मार्च-अप्रैल में हरिद्वार को छोड़कर उत्तराखंड के सभी जिलों में आग की घटनाएं कई गुना बढ़ गईं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2023 में मार्च-अप्रैल में नैनीताल में आग लगने की 207 घटनाएं हुईं जबकि इस साल इस अवधि में यह आंकड़ा बढ़कर 1,524 हो गया।
बालियान ने कहा कि चंपावत में मार्च-अप्रैल 2023 में आग लगने की 120 घटनाएं सामने आई थीं और इस साल इस अवधि में यह संख्या बढ़कर 1,025 हो गई।
उन्होंने कहा कि आग लगने की घटनाओं के दायरे में वनाग्नि, पौधों के ठूंठ और कचरा जलाने की घटनाएं आती हैं लेकिन उत्तराखंड के संदर्भ में यह ज्यादातर जंगलों में लगने वाली आग है तथा उपग्रह से मिली तस्वीरों में अधिकांश आग पहाड़ों पर घने वन क्षेत्रों में लगी दिखाई देती है।
शोधकर्ता ने बताया कि वनाग्नि से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में नैनीताल, चंपावत, अल्मोड़ा, गढ़वाल और पिथौरागढ़ शामिल हैं।
अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (पर्यावरण) कपिल कुमार जोशी ने कहा, ‘‘प्रतिकूल मौसमी दशाएं जैसे आद्रर्ता का स्तर, लंबी शुष्क अवधि, उच्च तापमान, हवा की दिशा और बारिश का समय वनाग्नि में योगदान देते हैं। काफी समय से हो रहे जलवायु परिवर्तन ने प्रतिकूल दशाओं को और बढ़ा दिया है।’’
हालांकि, जोशी ने कहा, ‘‘यह भी एक तथ्य है कि वनाग्नि इस क्षेत्र में एक सामान्य घटना है। प्रौद्योगिकी उन्नति के कारण इन घटनाओं के बारे में तत्काल पता चल जाता है और इस वजह से ज्यादा घटनाएं दर्ज हो रही हैं तथा हम इन पर बेहतर ढंग से काबू पाने में भी सक्षम हैं।’’
बालियान ने कहा कि वनाग्नि की घटनाओं में कमी लाने के लिए निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में वनकर्मियों की अधिक तैनाती की जानी चाहिए।
नैनीताल में शुक्रवार को वनाग्नि (जंगलों में आग) की स्थिति तब गंभीर हो गई थी जब लड़ियाकाटा और पाइन्स क्षेत्र में स्थित हाईकोर्ट कॉलोनी के पास तक आग की लपटें पहुंच गईं और वायुसेना के संवेदनशील केंद्र तक लपटों के पहुंच जाने की आशंका के बीच शनिवार को वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद से आग पर काबू पाया गया।
प्रदेश के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), सेना, वन विभाग, प्रांतीय रक्षक दल और होमगार्ड के जवानों की मदद से आग बुझाने का अभियान जारी है।
रविवार को प्रदेश के जंगलों में आग लगने की आठ घटनाएं दर्ज की गईं जबकि आठ लोगों को आग लगाने की कोशिश करते समय गिरफतार किया गया। इनमें से पांच को गढ़वाल वन प्रभाग के खिर्सू में और तीन अन्य को बागेश्वर वन प्रभाग में पकड़ा गया।
वर्ष 2000 में पृथक राज्य बनने के बाद से अब तक 50 हजार हेक्टेयर से ज्यादा वन क्षेत्र जल जाने का दावा करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने कहा कि हर साल जंगलों में आग लगने की घटनाएं होती हैं और इसे देखते हुए हर साल पहले से एहतियाती कदम उठाए जाने चाहिए ।
उन्होंने कहा कि आग लगने की घटनाएं फरवरी से शुरू होती हैं और इससे छह माह पहले ही एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए जाने चाहिए।
भाषा दीप्ति संतोष