विपक्ष मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ बंद रख न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कर रहा कोशिश : भाजपा
धीरज पवनेश
- 09 Jul 2025, 08:56 PM
- Updated: 08:56 PM
नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का पुरजोर समर्थन करते हुए बुधवार को इस प्रक्रिया के खिलाफ राज्य में बंद आहूत करने के लिए विपक्षी दलों पर निशाना साधा और सवाल किया कि क्या वे चाहते हैं कि रोहिंग्या समेत अवैध घुसपैठिए चुनाव में मतदान करें।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बंद के पीछे की मंशा पर सवाल उठाया और विपक्षी दलों से पूछा कि क्या वे इस तरह की रणनीति के जरिए न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इन सभी नेताओं ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जो उनका अधिकार है। लेकिन जब कल सुनवाई होने वाली है, तो वे दबाव बनाने के लिए आज सड़क पर राजनीति क्यों कर रहे हैं?’’
प्रसाद ने सवाल किया कि आज सड़कों पर उतरने का क्या उद्देश्य है। साथ ही पूछा, ‘‘क्या यह न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘इन लोगों को या तो न्यायपालिका पर भरोसा करना चाहिए या सड़कों पर उतरने के विकल्प पर ही बने रहना चाहिए।’’
प्रसाद ने कहा कि केवल वे ही लोग चुनाव में मतदान कर सकते हैं जो भारतीय नागरिक हैं, 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं, तथा सामान्यतः उस क्षेत्र के निवासी हैं जहां वे मतदान के लिए पंजीकृत हैं।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘ऐसे में अगर मतदाता सूची में संशोधन किया जा रहा है तो क्या परेशानी है?’’
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘क्या वे (विपक्षी नेता) चाहते हैं कि मतदाता सूची में उन लोगों के नाम भी रहें जो वहां नहीं हैं, जैसे घुसपैठियों के? क्या यह सच नहीं है कि कभी-कभी रोहिंग्या या ऐसे ही अन्य लोग अवैध रूप से अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा लेते हैं? अगर काम पूरी ईमानदारी से हो रहा है, तो इसमें आपत्ति क्या है?’’
प्रसाद ने कहा कि संदेश स्पष्ट है कि विपक्षी नेता इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर उन लोगों को लाभ पहुंचाना चाहते हैं, जिनका नाम अवैध रूप से मतदाता सूची में शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘वास्तविकता यह है कि वे जानते हैं कि बिहार चुनाव नहीं जीतेंगे, जिस तरह (उन्हें) हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में हार का सामना करना पड़ा है।’’
भाजपा की ओर से यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेता बुधवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ बिहार में राज्यव्यापी बंद में शामिल हुए।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण के समय और मंशा पर सवाल उठाते हुए विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग ने यह प्रक्रिया राज्य में विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले शुरू की है, ताकि ‘‘काफी संख्या में मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया जा सके’’ और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को लाभ पहुंचाया जा सके।
प्रसाद ने कहा कि बिहार में कुल 7.90 करोड़ मतदाताओं में से चार करोड़ लोगों ने पहले ही गणना फार्म जमा कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘इसका अभिप्राय है कि 50 प्रतिशत से अधिक भागीदारी हो गई और अब भी 16 दिन बाकी हैं।’’
प्रसाद ने कहा कि बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘वे (विपक्ष) कहते हैं कि निर्वाचन आयोग ठीक से काम नहीं कर रहा है, मतदाता सूची गलत है। कभी-कभी, वे ईवीएम पर सवाल उठाते हैं। ’’
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘और अब, जब गहन और पारदर्शी संशोधन प्रक्रिया चल रही है और 50 प्रतिशत से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से फॉर्म भर दिए हैं, तब भी उन्हें आपत्तियां हैं?’’
उन्होंने कहा, ‘‘क्या राजद और कांग्रेस समेत विपक्षी दल अवैध मतदाता सूची में शामिल लोगों के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं?’’
प्रसाद ने कहा कि विपक्षी दलों का आचरण ‘गंभीर सवाल’ खड़ा करता है।
प्रसाद ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जिन लोगों के नाम 2003 तक मतदाता सूची में थे, उन्हें कोई दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उस समय विस्तृत संशोधन हुआ था।
उन्होंने कहा,‘‘आज देश में 50 करोड़ से ज़्यादा लोगों के बैंक खाते हैं। सभी के पास पेंशन के कागजात और स्कूल प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज हैं। ये सभी वैध प्रमाण हैं। बिहार में एक लाख बूथ और चार लाख बीएलओ (बूथ स्तर अधिकारी) इस प्रक्रिया को अंजाम दे रहे हैं।’’
भाजपा नेता ने कहा कि इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित किया जाएगा और सुधार के लिए समय दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर किसी को कोई आपत्ति है, तो वे सुनवाई के लिए आवेदन कर सकते हैं। अगर वे निर्वाचन अधिकारी के फैसले से असंतुष्ट हैं, तो जिलाधिकारी के पास अपील कर सकते हैं।’’
प्रसाद ने कहा, ‘‘अगर फिर भी संतुष्टि न हो तो राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपील करने का विकल्प है। इस पूरी प्रक्रिया को कई बार सार्वजनिक रूप से समझाया जा चुका है।’’
भाषा धीरज