दिल्लीः मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वायु प्रदूषण शमन योजना शुरू की
पारुल पवनेश
- 03 Jun 2025, 09:28 PM
- Updated: 09:28 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, तीन जून (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को वायु प्रदूषण शमन योजना 2025 शुरू की, जिसके तहत राष्ट्रीय राजधानी में मेट्रो स्टेशन पर 2,300 इलेक्ट्रिक ऑटो तैनात किए जाएंगे, वायु प्रदूषण के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील 13 इलाकों में ‘मिस्ट स्प्रेयर’ लगाए जाएंगे और पीयूसीसी केंद्रों का हर छह महीने में ऑडिट किया जाएगा।
‘शुद्ध हवा सबका अधिकार-प्रदूषण पर जोरदार प्रहार’ नाम की व्यापक प्रदूषण-रोधी कार्य योजना में हरित पहल, इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल में वृद्धि, यातायात सुधार और वैज्ञानिक नवाचार के जरिये राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण के स्तर पर लगाम लगाने का खाका पेश किया गया है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली उनकी सरकार का सपना है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करता है।
योजना की शुरुआत के बाद मीडिया से मुखातिब गुप्ता ने एक सवाल के जवाब में स्पष्ट किया कि पिछली सरकार की सम-विषम नीति लागू नहीं की जाएगी, क्योंकि इससे लोगों को असुविधा हुई थी।
उन्होंने कहा, “अगर किसी परिवार के पास केवल एक ही वाहन हो, तो ऐसे में क्या होगा? हमें दिल्ली के नागरिकों की आवश्यकताओं और वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए।”
गुप्ता ने बताया कि योजना के हिस्से के रूप में सरकार ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 70 लाख पौधे लगाएगी और इसकी शुरुआत पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर की जाएगी।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी, जो माताओं के प्रति सम्मान को पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के साथ जोड़ने वाली एक अनूठी पहल है।
गुप्ता ने कहा कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) जारी करने वाले केंद्रों का हर छह महीने में ऑडिट किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि शहर में यातायात जाम की समस्या पर काबू पाने के लिए सरकार ‘स्मार्ट इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम’ पेश करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार दिल्ली में प्रवेश करने वाले ‘एंड ऑफ लाइफ (इओएल)’ वाहनों की पहचान करने के लिए सभी सीमा प्रवेश बिंदुओं पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) कैमरे लगाने की भी योजना बना रही है।
इओएल वाहन का मतलब ऐसे वाहन से है, जिसके इस्तेमाल की अवधि समाप्त हो चुकी है और जिसे निपटान के लिए समर्पित केंद्र पर स्थानांतरित किए जाने की जरूरत है।
गुप्ता ने बताया कि पड़ोसी राज्यों में पंजीकृत ईओएल वाहनों के मालिकों को एसएमएस अलर्ट भेजकर राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश न करने की चेतावनी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इन प्रतिबंधों का प्रचार करने के लिए प्रवेश बिंदुओं पर बिलबोर्ड लगाए जाएंगे।
सरकार ने बताया कि योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली मेट्रो की ओर से विभिन्न स्टेशन पर 2,299 इलेक्ट्रिक ऑटो तैनात किए जाएंगे, जो दूरदराज के इलाकों तक परिवहन सेवा उपलब्ध कराएंगे।
सरकार ने पूरे शहर में मॉल, हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और नगर निगम एवं निजी संस्थाओं द्वारा प्रबंधित वाणिज्यिक परिसर सहित अन्य जगहों पर 18,000 सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने की भी घोषणा की।
सरकार के मुताबिक, दिल्ली में मौजूदा ईवी बुनियादी ढांचे का ऑडिट किया जाएगा और इसे उन्नत एवं विस्तारित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
सरकार ने बताया कि इस योजना का मकसद 80 फीसदी सरकारी वाहनों को स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों से बदलना और इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाने के लिए नयी ईवी नीति लागू करना भी है।
उसने बताया कि वन और संरक्षित क्षेत्रों में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल की इजाजत होगी तथा गैर-जरूरी गैर-इलेक्ट्रिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटा दिया जाएगा।
कार्य योजना में वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए धूल के स्तर में कमी लाने को प्राथमिकता दी गई है।
इसमें कहा गया है कि सरकार मानसून को छोड़कर बाकी अवधि में पूरी दिल्ली में पानी का छिड़काव करने वाले 1,000 ‘वाटर स्प्रिंकलर’ और 140 ‘एंटी-स्मॉग गन’ तैनात करेगी।
कार्य योजना के अनुसार, इन उपायों की जीपीएस, कैमरे, सेंसर और डैशबोर्ड जैसी प्रौद्योगिकियों से वास्तविक समय में निगरानी की जाएगी।
योजना के मुताबिक, पहले चरण में चिन्हित उन 13 इलाकों में सड़क के किनारे बिजली के खंभों और इसी तरह की अन्य संरचनाओं पर ‘मिस्ट स्प्रेयर’ लगाए जाएंगे, जो वायु प्रदूषण के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं।
योजना में 200 मशीनीकृत सड़क सफाई मशीनों, 20 डंप वाहनों, कूड़ा उठाने वाली 70 इलेक्ट्रिक मशीनों और पानी के 38 टैंकर की तैनाती भी शामिल है।
योजना के तहत मॉल और होटल सहित 3,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली सभी ऊंची व्यावसायिक इमारतों के लिए अपनी छतों पर ‘एंटी-स्मॉग गन’ लगाना अनिवार्य होगा, जो मानसून को छोड़कर पूरे साल चालू रहेंगी।
योजना के अनुसार, सड़कों की स्थिति सुधारने और धूल के स्तर में और कमी लाने के लिए सरकार पूरे शहर में सड़कों की स्थिति का आकलन करने के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण कराएगी।
योजना में सभी सड़कों का मानचित्रण एवं मरम्मत, सड़कों के किनारे वृक्षारोपण और पक्की सड़कों का निर्माण शामिल है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार धूल को कम करने में ‘क्लाउड सीडिंग’ (कृत्रिम बारिश की तकनीक) की प्रभावशीलता आंकने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के साथ साझेदारी में इस तकनीक पर एक पायलट परियोजना शुरू करेगी। इस पहल को “ऐतिहासिक कदम” करार देते हुए गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में पहली बार इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के मुद्दे पर योजना में चरणबद्ध तरीके से पुराने कचरे के जैव-खनन की रूपरेखा दी गई है।
सरकार ने ओखला लैंडफिल साइट पर मार्च 2027 तक, भलस्वा लैंडफिल साइट पर दिसंबर 2027 तक और गाजीपुर लैंडफिल साइट पर सितंबर 2028 तक कचरे का पूरी तरह से निपटान करने का लक्ष्य रखा है।
ओखला में मौजूदा अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र को इसकी वर्तमान क्षमता 1,950 टन प्रति दिन (टीपीडी) से बढ़ाकर मार्च 2027 तक 2,950 टीपीडी किया जाएगा। नवंबर 2028 तक नरेला-बवाना में 3,000 टीपीडी क्षमता वाला एक नया अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जाएगा।
वायु गुणवत्ता पर नजर रखने और औद्योगिक अनुपालन को बढ़ावा देने के लिए, मौजूदा वायु निगरानी नेटवर्क में छह नये केंद्र जोड़े जाएंगे और एक नयी औद्योगिक नीति शुरू की जाएगी। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक कचरे को स्थायी रूप से रखने के लिए ई-वेस्ट इको पार्क का निर्माण किया जाएगा।
भाषा पारुल