कांग्रेस का सरकार पर एफडीआई को लेकर ‘धोखे और धमकी’ की नीति का आरोप, भाजपा बोली: विपक्षी दल सच से दूर
हक नेत्रपाल
- 11 Apr 2025, 07:28 PM
- Updated: 07:28 PM
नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में ‘‘गिरावट’’ को लेकर शुक्रवार को आरोप लगाया कि सरकार ने अपनी ‘‘भय, धोखा और धमकी’’ की नीति के माध्यम से एफडीआई को लगभग समाप्त कर दिया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस आरोप को गुमराह करने वाला करार दिया और कहा कि मुख्य विपक्षी दल आज के भारत से पूरी तरह कटा हुआ है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि अप्रैल-जनवरी 2024-25 में भारत में कुल एफडीआई घटकर 1.4 अरब डॉलर से भी कम रह गया।
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘अप्रैल-जनवरी 2012-13 में भारत में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 19 अरब डॉलर था। अप्रैल-जनवरी 2024-25 में भारत में कुल एफडीआई घटकर 1.4 अरब डॉलर से भी कम रह गया।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने घरेलू निवेश (डीआई) को बर्बाद करने के साथ एक अन्य प्रकार के ‘‘एफडीआई — फियर, डिसीट, इंटिमेडेशन (भय, धोखा और धमकी) की नीति के ज़रिए एफडीआई को भी लगभग समाप्त कर दिया है।’’
रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह उपलब्धि मोदी सरकार ने तब हासिल की जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2025 में पदभार भी नहीं संभाला था।
उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका में जो बाइडन के कार्यकाल के दौरान, दुनिया भर की कंपनियाँ चीन को छोड़कर एशियाई देशों में निवेश के लिए उत्सुक थीं। वियतनाम, इंडोनेशिया और बांग्लादेश को अरबों डॉलर का निवेश मिला, जबकि भारत पीछे रह गया।’’
भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस नेता पर पलटवार करते हुए कहा, ‘‘जयराम रमेश द्वारा एफडीआई डेटा का चुनिंदा तरीके से उपयोग न केवल भ्रामक है बल्कि आर्थिक विफलता को गढ़ने की कांग्रेस की हताशा को उजागर करता है जहां कोई मौजूद नहीं है।’’
मालवीय के अनुसार, रमेश ने उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के निराशाजनक रिकॉर्ड को नजरअंदाज करते हुए एफडीआई में संक्षिप्त गिरावट पर प्रकाश डाला है।
उन्होंने दावा किया कि संप्रग-1 में वार्षिक एफडीआई औसतन केवल 18.2 अरब डालर था और संप्रग-2 के दौरान यह अधिकतम 38.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
मालवीय ने कहा कि संप्रग सरकार के दौरान सकल घरेलू उत्पाद में हिस्सेदारी के रूप में एफडीआई 2.7 प्रतिशत से घटकर मात्र 1.7 प्रतिशत रह गई थी जो नीतिगत पंगुता, घोटालों और प्रतिकूल व्यापारिक माहौल का प्रत्यक्ष परिणाम था।
उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, मोदी सरकार ने भारत के एफडीआई परिदृश्य को फिर से परिभाषित किया है।
उनका कहना है कि पिछले 10 वर्षों में एफडीआई में 709.84 अरब डॉलर आया।
मालवीय ने कहा कि मोदी सरकार के पहले साल में ही एफडीआई में 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘जयराम को अपने तथ्यों की जांच करनी चाहिए। उनका कथन सिर्फ गुमराह करने वाला नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कांग्रेस आज के भारत से कितनी कटी हुई है।
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