यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाए जाने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संयंत्र को परामर्श जारी किया
हर्ष नरेश नेत्रपाल
- 11 Apr 2025, 04:05 PM
- Updated: 04:05 PM
इंदौर, 11 अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश में पीथमपुर के एक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने के बचे 307 टन कचरे को जलाने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस संयंत्र का संचालन करने वाली एक निजी कंपनी को कुछ आवश्यक कार्यों को लेकर परामर्श जारी किया है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
इंदौर संभाग के आयुक्त (राजस्व) दीपक सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश पर पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र में यूनियन कार्बाइड कारखाने के बचे कचरे का निपटान किया जाना है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस संयंत्र का संचालन करने वाली एक निजी कंपनी को परामर्श जारी किया है।’’
उन्होंने बताया कि इस परामर्श के अनुसार पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र में कुछ आवश्यक काम होने हैं और इन कार्यों के पूरा होते ही इस इकाई में यूनियन कार्बाइड का बचा कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
सिंह ने इन आवश्यक कार्यों का हालांकि विस्तृत ब्योरा नहीं दिया, लेकिन कहा कि ये काम अगले दो हफ्ते के भीतर पूरे होने की उम्मीद है जिसके बाद संयंत्र में कचरा जलाने को लेकर उचित कदम उठाए जाएंगे।
उच्च न्यायालय के 27 मार्च को जारी निर्देश के मुताबिक यूनियन कार्बाइड के बचे कचरे को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में पीथमपुर के संयंत्र में 270 किलोग्राम प्रति घंटे की अधिकतम दर से जलाया जाना है। राज्य सरकार का अनुमान है कि इस दर से भस्म किए जाने पर 72 दिन में पूरा कचरा जल सकता है।
भोपाल में बंद पड़े यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे को राज्य की राजधानी से करीब 250 किलोमीटर दूर पीथमपुर के संयंत्र में दो जनवरी को पहुंचाया गया था।
इस संयंत्र में तीन परीक्षणों के दौरान कुल 30 टन कचरा जलाया गया था। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से उच्च न्यायालय को विश्लेषण रिपोर्ट के हवाले से बताया गया था कि क्रमशः 135 किलोग्राम प्रति घंटा, 180 किलोग्राम प्रति घंटा और 270 किलोग्राम प्रति घंटा की दरों पर किए गए तीनों परीक्षणों के दौरान उत्सर्जन तय मानकों के भीतर पाए गए।
भोपाल में दो और तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था। इससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग अपंग हो गए थे। इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में गिना जाता है।
प्रदेश सरकार के मुताबिक, यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे में इस बंद पड़ी इकाई के परिसर की मिट्टी, रिएक्टर अवशेष, सेविन (कीटनाशक) अवशेष, नेफ्थाल अवशेष और ‘अर्ध प्रसंस्कृत’ अवशेष शामिल हैं।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि वैज्ञानिक प्रमाणों के मुताबिक इस कचरे में सेविन और नेफ्थाल रसायनों का प्रभाव अब ‘‘लगभग नगण्य’’ हो चुका है। बोर्ड के मुताबिक फिलहाल इस कचरे में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का कोई अस्तित्व नहीं है और इसमें किसी तरह के रेडियोधर्मी कण भी नहीं हैं।
भाषा हर्ष नरेश