डीसीपीसीआर में रिक्तियों को भरने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती : दिल्ली उच्च न्यायालय
रवि कांत प्रशांत
- 07 Apr 2025, 09:01 PM
- Updated: 09:01 PM
नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को बाल अधिकार आयोग में रिक्त पदों को भरने में दिल्ली सरकार की लापरवाही का उल्लेख करते हुए ऐसे पदों के लिए चयन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) जुलाई 2023 से ही कार्य नहीं कर रहा है। पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में बाल अधिकारों का मुद्दा काफी पीछे चला गया है।
अदालत ने कहा कि डीसीपीसीआर में रिक्त पदों को छह सप्ताह के भीतर भरा जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने बच्चों में मादक पदार्थों के सेवन की समस्या पर भी चिंता व्यक्त की तथा प्राधिकारियों को जिला बाल संरक्षण इकाइयों (डीसीपीयू) के सदस्यों का चयन आठ सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा, ‘‘इसमें कोई दो राय नहीं कि डीसीपीसीआर बाल अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण वैधानिक कार्य करता है। लेकिन रिक्तियों के कारण ऐसे कार्य नहीं हो पा रहे हैं, जिसके कारण बच्चों के अधिकार पीछे छूट रहे हैं। सरकार की उदासीनता के कारण ऐसी स्थिति की सराहना नहीं की जा सकती।’’
दिल्ली सरकार के वकील द्वारा डीसीपीसीआर में रिक्तियों के लिए प्रक्रिया पूरी करने के लिये समय मांगे जाने पर अदालत ने कहा कि अधिकारी पहले ही उसके आदेश की अवमानना कर रहे हैं, जिसमें महिला एवं बाल विकास विभाग को तीन महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया गया था।
अदालत ने कहा कि डीसीपीसीआर का गठन अधिकारियों का कर्तव्य है, जो उन्हें विधायिका द्वारा सौंपा गया है।
पीठ ने कहा, ‘‘पिछले साल अक्टूबर में तीन महीने का समय दिया गया था। छह महीने बीत चुके हैं। पहले के आदेश के हिसाब से एक दिन भी संभव नहीं है। आप पहले से ही अवमानना में हैं। ’’
दिल्ली सरकार के वकील ने पीठ को सूचित किया कि पिछले साल दिसंबर में जारी विज्ञापन के बाद 31 जनवरी को डीसीपीसीआर रिक्तियों के लिए एक अनुवीक्षण समिति गठित की गई थी और पात्र उम्मीदवारों की सूची जल्द ही समिति के समक्ष रखी जानी चाहिए।
दिल्ली सरकार को अदालत के आदेश का अनुपालन दर्शाने के लिए एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया गया।
एक सप्ताह पहले अदालत ने बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूसी) और किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) में रिक्तियों पर भी चिंता व्यक्त की थी।
सोमवार को बताया गया कि सभी पद भर लिये गये हैं।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा, ‘‘न केवल केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार द्वारा अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।’’
इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।
भाषा रवि कांत