शिवाजी महाराज ने आक्रमणकारियों से युद्ध हारने की लंबी परंपरा खत्म की : संघ प्रमुख मोहन भागवत
पारुल प्रशांत
- 02 Apr 2025, 10:19 PM
- Updated: 10:19 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नागपुर, दो अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने भारत में आक्रमणकारियों से लगातार युद्ध हारने की लंबी परंपरा खत्म की।
उन्होंने शिवाजी महाराज को विदेशी आक्रांताओं को करारा जवाब देने वाला पहला योद्धा करार दिया।
नागपुर में एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों से युद्ध हारने की परंपरा सिकंदर महान के समय से चली आ रही थी और यह इस्लाम के प्रसार की आड़ में किए गए बड़े आक्रमणों के दौरान भी जारी रही।
उन्होंने कहा, “लड़ाई हारने और साम्राज्यों को नष्ट होते देखने की यह परंपरा सदियों तक जारी रही, जिसे विजयनगर साम्राज्य या राजस्थान के शासक भी खत्म नहीं कर सके।”
संघ प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि 17वीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य की स्थापना करने वाले शिवाजी महाराज ऐसे आक्रमणों का करारा जवाब देने वाले पहले योद्धा थे।
उन्होंने कहा, “शिवाजी महाराज पहले योद्धा थे, जिन्होंने ऐसे हमलों और आक्रमणों का करार जवाब दिया। विदेशी आक्रमणकारियों से एक के बाद एक युद्ध हारने का युग शिवाजी महाराज के उदय के साथ समाप्त हुआ, क्योंकि उन्होंने इसका समाधान पेश किया।”
भागवत ने कहा कि शिवाजी महाराज को ‘युगपुरुष’ कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने देश में मुगल आक्रमण सहित अन्य आक्रमणों के चक्र को रोक दिया था।
उन्होंने याद किया कि शिवाजी महाराज कैसे आगरा में मुगल बादशाह औरंगजेब की कैद से भाग गए थे, जिससे उन्हें क्षेत्रों को सफलतापूर्वक वापस हासिल करने में मदद मिली।
संघ प्रमुख ने कहा, “उन्होंने पहले शांति समझौते में जो कुछ भी (छोड़ने) पर सहमति जताई थी, उसे वापस हासिल कर लिया और छत्रपति शिवाजी महाराज के रूप में खुद का राज्याभिषेक किया। उनके राज्याभिषेक से देश में ऐसे आक्रमणकारियों का अंत हो गया।”
उन्होंने बाद में अन्य क्षेत्रीय शासकों के नेतृत्व में शुरू हुई प्रतिरोध की लहर का जिक्र किया, जो मराठा शासक से प्रेरित थे।
भागवत ने कहा, “शिवाजी महाराज ने देश के दक्षिणी हिस्सों पर जीत हासिल की और बुंदेलखंड में छत्रसाल, राजस्थान में दुर्गादास राठौड़ के नेतृत्व में राजाओं और यहां तक कि कूच बिहार के चक्रध्वज सिंह जैसे शासकों ने भी मुगलों को पीछे धकेलना शुरू कर दिया।”
उन्होंने कहा कि चक्रध्वज सिंह ने एक अन्य राजा को पत्र लिखकर शिवाजी महाराज का उदाहरण दिया था और उनसे “बंगाल की खाड़ी में राक्षसों को डुबोने” के उनके तरीके पर अमल करने का आग्रह किया था।
संघ प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि शिवाजी महाराज की विरासत लगातार प्रासंगिक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि वह आज भी एक आदर्श बने हुए हैं और उनके कार्य लोगों और राष्ट्र, दोनों के लिए अनुकरणीय हैं।
भागवत ने कहा, “शिवाजी महाराज की प्रेरणा आज भी प्रासंगिक है।” उन्होंने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद जैसी महान हस्तियों ने अपने कार्यों में शिवाजी महाराज से प्रेरणा ली।
भागवत ने कहा, “दक्षिण भारत में एक अभिनेता ने शिवाजी महाराज पर आधारित फिल्म में काम किया, जिसके बाद उसका नाम गणेशन के बजाय शिवाजी गणेशन हो गया।”
भागवत ने मराठा शासकों पर कई पुस्तकें लिख चुके दिवंगत सुमंत टेकाडे की किताब ‘युगंधर शिवराय’ का विमोचन किया।
उन्होंने कहा कि केशव हेडगेवार, माधवराव गोलवलकर और बालासाहेब देवरस जैसे संघ नेताओं ने हनुमान को पौराणिक युग का और शिवाजी महाराज को आधुनिक युग का ‘आदर्श’ बताया था।
भाषा पारुल