वक्फ़ संशोधन विधेयक: शिवसेना ने उद्धव ठाकरे की पार्टी को आड़े हाथ लिया
वैभव मनीषा
- 02 Apr 2025, 05:52 PM
- Updated: 05:52 PM
नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) शिवसेना (उबाठा) के सांसद अरविंद सावंत ने बुधवार को वक्फ़ संशोधन विधेयक पर सरकार को आड़े हाथ लेते हुए आशंका जताई कि कहीं आने वाले दिनों में मंदिरों के प्रबंधन में गैर-हिंदुओं को तो नहीं लाया जाएगा, वहीं शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने उद्धव ठाकरे की पार्टी पर तंज करते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे आज होते तो सावंत को ऐसी बातें नहीं कहने देते।
लोकसभा में वक्फ़ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना (उबाठा) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि सरकार विधेयक में सही कदम नहीं उठा रही है और उसे इसमें सुधार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार न्याय के हक में विधेयक लाने के बजाय अन्याय कर रही है। सावंत ने कहा, ‘‘सरकार वक्फ़ संपत्तियों की बात करती है तो बताए कि पद्ननाभ मंदिर में जो खजाना मिला था, उसका क्या हुआ। अयोध्या में भी आपके प्रयोग सफल नहीं हुए। वाराणसी में भी मंदिर और मूर्तियां तोड़े गए।’’
सावंत ने कहा कि विधेयक में जो गलत है, हम उसका समर्थन नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह सरकार एक तरफ समान नागरिक संहिता की बात करती है और दूसरी तरफ वक्फ़ बोर्ड में गैर मुस्लिम को ला रही है।
उद्धव ठाकरे की पार्टी के सांसद ने कहा, ‘‘डर लगता है कि कल मंदिरों के प्रबंधन में गैर-हिंदुओं को तो नहीं लाओगे। ऐसी कोशिश भी करोगे तो हमारी पार्टी उसका विरोध करेगी। आगे आप ऐसा जैन मंदिरों, गिरजाघरों और गुरुद्वारों को लेकर भी कर सकते हैं।’’
उन्होंने कहा कि वक्फ़ भी तो धार्मिक मामला है लेकिन भाजपा उसे सरकारी दिखाना चाहती है।
सावंत ने जानना चाहा कि मंदिरों की हजारों एकड़ जमीन बेची जा रही है, क्या इसके खिलाफ कोई कानून लाया जाएगा ?
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि सावंत ने अपने भाषण में यह स्पष्ट नहीं किया कि वह विधेयक का समर्थन कर रहे हैं या नहीं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत राजग सरकार में शामिल शिवसेना के सदस्य श्रीकांत शिंदे ने चर्चा में भाग लेते हुए अरविंद सावंत पर निशाना साधा और कहा, ‘‘मुझे शिवसेना (उबाठा) से पूछना है कि आज अगर बालासाहेब ठाकरे होते तो क्या सावंत यहां यह भाषण दे पाते ? आज सदन में एक बात साफ हो गई कि शिवसेना (उबाठा) वाले किस विचारधारा को मान रहे हैं और वे विधेयक का विरोध कर रहे हैं।’’
शिंदे ने कहा कि इनके पास आज बालासाहेब की हिंदुत्व की विचाराधारा को जीवित रखने का सुनहरा अवसर था, लेकिन उन्होंने इसे गंवा दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगा कि इन्हें केवल हिंदुत्व से एलर्जी थी, आज साफ हो गया कि इन्हें हिंदुओं से भी एलर्जी है।’’
शिंदे ने कहा कि शिवसेना (उबाठा) सांसद को शर्म आनी चाहिए कि उन्होंने संभाजी महाराज की हत्या करने वाले मुगल शासक औरगंजेब की वकालत की और राम मंदिर पर प्रश्नचिह्न उठाया।
उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि इस कानून का आधार और सार ही मुस्लिमों को हक देना है जिनका हक वोट बैंक के नाम पर इतने सालों तक छीना गया।
शिवसेना सांसद ने कहा कि देश में 36 लाख एकड़ जमीन वक्फ़ की है और विपक्ष के नेता एक भी ऐसा उदाहरण दे दें कि ऐसी किसी जमीन पर अच्छा स्कूल, अस्पताल या कौशल विकास केंद्र बनाया गया हो।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोग केवल वक्फ़ की संपत्ति पर लूट के अपने पाप छिपाने के लिए विरोध कर रहे हैं। शिंदे ने कहा, ‘‘उन्हें डर है कि वक्फ़ के नाम पर लूट और सौदेबाजी दस्तावेजों में दर्ज हो जाएगी।’’
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के नीलेश लंके ने कहा कि यह विधेयक छत्रपति शिवाजी महाराज की सर्व समावेशी सोच पर आधारित नहीं है।
इस पर पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने कहा कि विपक्षी सदस्य ने छत्रपति शिवाजी का उल्लेख किया तो सदन को यह भी पता होना चाहिए कि शिवाजी ने ही हिंदवी साम्राज्य की स्थापना की थी।
भाषा वैभव