परिसीमन: स्टालिन ने कानून का सहारा लेने की बात कही, विजयन ने मुद्दे को राजनीति से प्रेरित बताया
शोभना पवनेश
- 22 Mar 2025, 04:44 PM
- Updated: 04:44 PM
(तस्वीरों सहित)
चेन्नई, 22 मार्च (भाषा) लोकसभा परिसीमन पर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) समर्थित संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) की पहली बैठक में ‘निष्पक्ष परिसीमन’, प्रतिनिधित्व न खोने और सीटों की संख्या निर्धारित करने के लिए जनसंख्या को पैमाना बनाने के खिलाफ लड़ने की राजनीतिक आम सहमति बनी है।
केंद्र की ओर से संसदीय सीटों के प्रस्तावित परिसीमन के बीच द्रमुक ने शनिवार को राज्यों की पहली संयुक्त कार्रवाई समिति की बैठक आयोजित की जिसमें मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने स्पष्ट किया कि इस लड़ाई में कानून का भी सहारा लिया जाएगा।
बैठक में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि लोकसभा सीटों का परिसीमन "डेमोक्लीज़ की तलवार" की तरह है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बिना किसी परामर्श के इस मुद्दे पर आगे बढ़ रही है।
"डेमोक्लीज़ की तलवार" वाक्यांश का इस्तेमाल अकसर सत्ता में बैठे लोगों के सामने आने वाले जोखिम को दर्शाने के लिए या किसी अनिश्चित स्थिति में आशंका की भावना को दर्शाने के लिए किया जाता है।
विजयन ने कहा, ‘‘अचानक उठाया गया यह कदम संवैधानिक सिद्धांतों या लोकतांत्रिक अनिवार्यताओं से प्रेरित नहीं है बल्कि संकीर्ण राजनीतिक हितों से प्रेरित है।’’
विजयन ने कहा, ‘‘अगर जनगणना के बाद परिसीमन किया जाता है तो उत्तरी राज्यों की सीटों में बढ़ोतरी होगी, जबकि दक्षिणी राज्यों की सीटों में कमी आएगी। दक्षिण के लिए सीटों में कटौती और उत्तर के लिए सीटों में बढ़ोतरी भाजपा के लिए फायदेमंद होगी क्योंकि उत्तर में उसका प्रभाव अधिक है।’’
मुख्यमंत्री स्टालिन ने यहां बैठक को संबोधित करते हुए राजनीतिक और कानूनी कार्ययोजना तैयार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का समर्थन किया।
उन्होंने समिति का नाम ‘निष्पक्ष परिसीमन के लिए संयुक्त कार्रवाई समिति’ रखने का प्रस्ताव रखा और राजनीतिक लड़ाई को आगे बढ़ाने के साथ ही कानून का सहारा लेने पर भी विचार मांगे।
स्टालिन ने कहा, ‘‘हम परिसीमन के खिलाफ नहीं हैं, हम निष्पक्ष परिसीमन के पक्ष में हैं। अधिकार बने रहें, इसके लिए निरंतर कार्रवाई बहुत जरूरी है।’’
जेएसी के बारे में उन्होंने कहा कि लोगों में जागरुकता पैदा करना और केंद्र से आग्रह करना बहुत जरूरी है।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि केंद्र दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व को कम करने की योजना बना रहा है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया कि भाजपा उन राज्यों में सीटें बढ़ाना चाहती है जहां वह जीतती है और उन राज्यों में सीटें कम करना चाहती है जहां वह हारती है। पंजाब में भाजपा जीतती नहीं है।
मान ने दावा किया कि ‘‘दक्षिण को नुकसान हो रहा है’’ और पूछा कि क्या दक्षिणी राज्यों को जनसंख्या कम करने के लिए दंडित किया जा रहा है।
बैठक में मौजूद रहे तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि अगर भाजपा ने जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया तो दक्षिण भारत अपनी राजनीतिक आवाज खो देगा और ‘‘उत्तर भारत हमें दोयम दर्जे का नागरिक बना देगा।’’
रेड्डी ने कहा कि ‘‘दक्षिण जनसंख्या आधारित परिसीमन को स्वीकार नहीं करेगा।’’ साथ ही रेड्डी ने केंद्र से परिसीमन के दौरान लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि न करने को कहा।
तेलंगाना से बीआरएस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री के टी रामाराव ने कहा कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन "बेहद अनुचित" है।
स्टालिन ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘आज का दिन इतिहास में ऐसे दिन के रूप में दर्ज किया जाएगा, जब हमारे देश के विकास में योगदान देने वाले राज्य ‘निष्पक्ष परिसीमन’ सुनिश्चित करके इसके संघीय ढांचे की रक्षा के लिए एक साथ आए। मैं इस बैठक में सभी मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत करता हूं जो ‘निष्पक्ष परिसीमन’ के प्रति हमारी प्रतिबद्धता में एकजुट हैं।’’
इस बीच भाजपा की तमिलनाडु इकाई ने काले झंडे दिखाकर बैठक के खिलाफ प्रदर्शन किया और पार्टी नेता के. अन्नामलाई ने इस चर्चा को ‘नाटक’ करार दिया।
उनकी पार्टी की सहयोगी और पूर्व राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सौंदरराजन ने आरोप लगाया कि बैठक में शामिल होने वाले संबंधित मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों में कुशासन को छिपाने के लिए ऐसा किया था।
उन्होंने ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में दावा किया, ‘‘तेलंगाना और केरल में भ्रष्टाचार के बहुत सारे आरोप हैं। उनके अपने लोग ही अपने मुख्यमंत्रियों के इस कार्यक्रम में शामिल होने के खिलाफ होंगे।’’
उन्होंने कहा,‘‘ इसे परिसीमन बैठक कहने के बजाय भ्रष्टाचार छिपाने वाली बैठक कहा जा सकता है।’’
वहीं अन्नामलाई ने कहा कि मुख्यमंत्री एम के स्टालिन द्वारा पड़ोसी राज्यों केरल और कर्नाटक के साथ मुल्लापेरियार और कावेरी जल विवाद सहित प्रमुख मुद्दों पर राज्य के अधिकारों से 'समझौता' करने के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केरल के साथ मुल्लापेरियार मुद्दे के अलावा, ‘‘अब तिरुवनंतपुरम से चिकित्सा, मानव और पशु अपशिष्ट तमिलनाडु में फेंका जा रहा है, चाहे वह तेनकासी हो या कोयंबटूर। यह सब कम्युनिस्ट सरकार के सत्ता में आने के बाद हो रहा है।’’
भाषा शोभना