भारतीय वायुसेना के आधिकारी बनकर साइबर ठगी करने वाले मेवात गिरोह के चार सदस्य गिरफ्तार
नेत्रपाल
- 08 May 2026, 05:28 PM
- Updated: 05:28 PM
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) दिल्ली पुलिस ने मेवात आधारित एक साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसके सदस्य कथित तौर पर भारतीय वायुसेना के अधिकारी बनकर व्यापारियों के साथ ठगी कर रहे थे।
पुलिस ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि इस मामले में सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले और बिचौलियों सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
बयान में कहा गया कि गिरोह के बारे में तब पता चला जब एक शिकायतकर्ता ने अपराध शाखा से संपर्क कर आरोप लगाया कि औद्योगिक श्रेणी की सामग्री 'एल्यूमिनस लैटेराइट' की आपूर्ति के बहाने उससे पांच लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई।
पुलिस उपायुक्त (अपराध शाखा) आदित्य गौतम ने बयान में कहा, ''आरोपियों ने कथित तौर पर सेना और भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकरी बनकर पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए जाली खरीद ऑर्डर भेजे।''
पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता को सामग्री वायुसेना स्टेशन भेजने के लिए कहा गया और बाद में उसे बताया गया कि उसका नाम मंजूरी प्राप्त विक्रेताओं की सूची में नहीं है तथा विक्रेता पंजीकरण और खाता सत्यापन के लिए पैसे जमा करने को कहा गया। गड़बड़ी की आशंका होने पर शिकायतकर्ता ने पुलिस को सूचना दी।
अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि धोखाधड़ी में इस्तेमाल हुए सिम कार्ड उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर और अलीगढ़ में जारी किए गए थे, जबकि तकनीकी निगरानी से पता चला कि इनका इस्तेमाल हरियाणा के मेवात क्षेत्र के नूंह जिले में स्थित कुछ खास स्थानों पर किया जा रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बुलंदशहर के मनीष (22), अलीगढ़ के कौशल (22) तथा नूंह के आमिर उर्फ बुरहान (24) तथा रिजवान अहमद (30) के रूप में हुई।
अधिकारी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने खुलासा किया कि वे भारतीय वायुसेना के अधिकारी बनकर एक सुनियोजित साइबर धोखाधड़ी गिरोह चला रहे थे।
उन्होंने कहा कि वे व्यापारियों की पहचान कर उन्हें निशाना बनाते थे और फिर विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए उन्हें माल की आपूर्ति के लिए ऑर्डर देते थे।
अधिकारी ने बताया कि सामान निर्धारित स्थान पर पहुंचने के बाद, पीड़ितों से खाता सत्यापन, विक्रेता पंजीकरण या अन्य प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं के बहाने पैसे जमा करने के लिए कहा जाता था।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग नामों से सिम कार्ड हासिल किए और बैंक खाते खुलवाए तथा उन्हें साइबर अपराध गतिविधियों में शामिल जालसाजों को मुहैया कराया।
इसने कहा कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि इसी तरह की धोखाधड़ी में शामिल लोगों को लगभग 30 सिम कार्ड और छह बैंक खाते उपलब्ध कराए गए थे। पुलिस ने कहा कि जांच जारी है तथा अभी और भी गिरफ्तारी होने की संभावना है।
भाषा नोमान नोमान नेत्रपाल
नेत्रपाल
0805 1728 दिल्ली