हर गीत को इस तरह लेता हूं जैसे सफर शुरू कर रहा हूं: गीतकार इरशाद कामिल
वैभव नरेश
- 21 Feb 2025, 05:36 PM
- Updated: 05:36 PM
नयी दिल्ली, 21 फरवरी (भाषा) चंडीगढ़ में एक ठंडी, धुंधली शाम थी, तभी पत्रकार और आज के जानेमाने गीतकार इरशाद कामिल को आभास हुआ कि कोई उनसे कह रहा है “तुम्हें मुंबई जाना है।” उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वैसा ही किया।
दो दशक से भी ज्यादा समय बाद, कामिल आज हिंदी फिल्म जगत के सबसे मशहूर गीतकारों में से एक हैं, जिन्होंने “तुमसे ही” (“जब वी मेट”), “जो भी” (“रॉकस्टार”), “विदा करो” (“अमर सिंह चमकीला”) और कई अन्य गीत लिखे हैं।
उन्हें वह पल याद है जब उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया था। उनके मुताबिक उस समय वह सड़क पर थे।
कामिल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, “मैंने एक दिन ठंडी धुंध भरी सर्दी की शाम को उस दिन की अपनी आखिरी स्टोरी दी। और जब मैं अपनी बाइक पर निकला, तो अचानक सड़क के किनारे रुक गया और सोचा, ‘क्या मैं वाकई पत्रकार बनना चाहता हूं?’ मेरे अंदर से आवाज आई, ‘नहीं, तुम कुछ और करना चाहते हो। तुम मुंबई जाना चाहते हो।’ जब अंतरात्मा ने फैसला कर लिया तो मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी और मुंबई आ गया।’’
बीस साल और कई फिल्मों में काम करने के बाद, कामिल ने कहा कि वह हर काम को ऐसे लेते हैं जैसे वह अपनी यात्रा शुरू कर रहे हों और इसलिए उनके गीतों में अक्सर हिंदुस्तानी शब्द ‘सफ़र’ आता है।
उनके सबसे हालिया गाने ‘स्काईफोर्स’ फिल्म से ‘तू है तो मैं हूं’ और ‘छावा’ से ‘जाने तू’ और ‘आया रे तूफान’ इस समय शीर्ष पर हैं।
गीतकार-लेखक ने कहा, ‘‘कलाकार कभी नहीं सोचते कि उन्होंने इसे हासिल कर लिया है। वे कभी भी यह नहीं बता पाएंगे क्योंकि उन्हें एक ही कक्षा में बार बार बैठना है, परीक्षा देनी है और उसमें बार-बार उत्कृष्टता हासिल करनी है। आप गीत लिखते हैं और उम्मीद करते हैं कि वे दर्शकों को पसंद आएं और जब वे ऐसा करते हैं, तो आप और भी बेहतर करने के बारे में सोचते हैं। इसलिए आप वही काम करते रहते हैं।’’
पंजाब के मालेरकोटला में जन्मे कामिल ने कहा कि उन्हें हमेशा से पता था कि उन्हें शब्दों के साथ कुछ करना है। यही बात उन्हें चंडीगढ़ में पत्रकारिता की ओर ले गई। उन्होंने पत्रकारिता में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और बाद में हिंदी साहित्य में पीएचडी।
गानों की लंबी सूची के अलावा, उन्होंने कुछ पटकथाएं भी लिखी हैं, जिनमें ‘मैं तेरी परछाईं हूं’ और ‘संजीवनी’ धारावाहिक हैं। उनका पहला बड़ा हिट गीत सुधीर मिश्रा की 2004 में आई फिल्म ‘चमेली’ का गाना ‘भागे रे मन’ था।
बीते वर्षों को याद करते हुए कामिल ने कहा कि सफलता की अपनी यात्रा में उन्हें जो अनुभव मिले, वे अमूल्य हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने शुरुआत में बहुत मेहनत की क्योंकि जब आप बिल्कुल नए सिरे से शुरुआत करते हैं, तो आपको कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यही बात इसे दिलचस्प बनाती है। आप अनुभव प्राप्त करते हैं और इसे कोई आपको थाली में परोस कर नहीं दे सकता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एक कहावत है ‘बहुत कठिन है डगर पनघट की’। आपको लंबा रास्ता तय करना होता है।’’
अपने प्रेरणास्रोत शायरों में साहिर लुधियानवी, मजरूह सुल्तानपुरी, शैलेंद्र और आनंद बख्शी के नाम गिनाने वाले कामिल का मानना है कि गीतकारों के लिए उस दुनिया को समझना महत्वपूर्ण है जिसके बारे में वे लिख रहे हैं, इसलिए उन्हें पात्रों के दिमाग को समझने के लिए स्क्रिप्ट से परिचित होना चाहिए।
भाषा
वैभव