हिमाचल प्रदेश : टिकट नहीं मिलने से नाराज भाजपा नेताओं को मनाने का प्रयास जारी
राजकुमार मनीषा
- 09 Apr 2024, 05:14 PM
- Updated: 05:14 PM
हमीरपुर/शिमला, नौ अप्रैल (भाषा) हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने मंगलवार को कहा कि प्रदेश भाजपा नेतृत्व उन पार्टी नेताओं को समझाने का प्रयास कर रहा है जो विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के छह बागियों को टिकट देने से नाराज हैं।
उन्होंने कहा कि वे (नाराज नेता) मान जायेंगे क्योंकि भाजपा कैडर आधारित पार्टी है।
विधानसभा उपचुनाव के वास्ते कांग्रेस के सभी छह बागियों को टिकट देने की घोषणा के बाद उन भाजपा नेताओं में नाराजगी नजर आ रही है जो इन कांग्रेस विधायकों के हाथों 2022 में विधानसभा चुनाव हार गये थे।
जिन भाजपा नेताओं को इस विधानसभा उपचुनाव में टिकट नहीं मिला है, उनमें ज्यादातर धूमल के करीबी समझे जाते हैं।
टिकट वितरण की घोषणा के तत्काल बाद पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल और उपचुनाव प्रत्याशी राजिंदर राणा एवं इंदर दत्त लखनपाल समेत वरिष्ठ पार्टी नेता धूमल का आशीर्वाद पाने के लिए उनके पैतृक गांव समीरपुर के चक्कर लगाने में जुट गये।
सुजानपुर से रंजीत सिंह, बरसार से माया शर्मा, कुतलेहार से पूर्व मंत्री वरिंदर कंवर और गागरेट से राजेश ठाकुर टिकट नहीं मिलने से खिन्न हैं।
सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपचुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। वह 399 मतों के अंतर से 2022 का विधानसभा चुनाव राजिंदर राणा के हाथों हार गये थे।
राज्यसभा चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस के प्रत्याशियों के हार जाने के बाद हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के छह बागियों समेत नौ विधायकों ने भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन के पक्ष में मतदान किया था। इन विधायकों में तीन निर्दलीय हैं।
कांग्रेस के बागियों-- सुधीर शर्मा (धर्मशाला), राजिंदर राणा (सुजानपुर), इंदर दत्त लखनपाल (बरसार), चेतन्य शर्मा (गागरेट), देविंदर कुमार भुटू (कुतलेहार) और रवि ठाकुर (लाहौल एवं स्पीति) को विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में मौजूद रहने तथा कटौती प्रस्ताव एवं बजट पर मत विभाजन में सरकार के पक्ष में मतदान करने के व्हिप का उल्लंघन करने को लेकर (सदन की सदस्यता के लिए) अयोग्य ठहरा दिया था।
बाद में कांग्रेस के ये बागी भाजपा में चले गये और उन्हें विधानसभा उपचुनाव के लिए टिकट दे दिया गया।
चूंकि चार विधानसभा उपचुनाव हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में होने वाले हैं और यह संसदीय क्षेत्र धूमल के बेटे एवं केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का गढ़ है, ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा लोकसभा चुनाव एवं विधानसभा उपचुनाव में अहम भूमिका निभाये जाने की संभावना है।
धूमल को 2017 में भाजपा के मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया गया था लेकिन वह राजिंदर राणा से चुनाव हार गये थे। अब धूमल को अपने प्रतिद्वंद्वी राणा का समर्थन करना है तथा राणा से अनुराग ठाकुर का समर्थन किए जाने की उम्मीद है।
जब धूमल से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के इस आरोप के बारे में पूछा गया कि कांग्रेस के बागियों ने अपनी आत्मा बेच दी है, तब उन्होंने कहा कि कुछ बागी पहले ही मानहानि का कानूनी नोटिस भेज चुके हैं।
जब धूमल से पूछा गया कि क्या महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपये देने से कांग्रेस को (लोकसभा चुनाव/ विधानसभा उपचुनाव में) मदद मिलेगी तो उन्होंने कहा कि यह राशि बस लाहौल एवं स्पीति में दी गयी है जबकि भाजपा ने पंचायती राज संस्थानों, शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण तथा लोकसभा एवं विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने राममंदिर निर्माण समेत अपने सभी वादों को पूरा किया है तथा अनुच्छेद 370को निरस्त किया है जिससे सेना के लोग खुश हैं और इससे भाजपा को बहुत फायदा मिलेगा क्योंकि इस निर्वाचन क्षेत्र में ढाई लाख पूर्व सैनिक हैं।
भाषा
राजकुमार