सद्गुरु ने परीक्षा से पहले तनाव से बचने और आनंदपूर्वक सीखने के मंत्र दिए
आशीष माधव
- 15 Feb 2025, 09:39 PM
- Updated: 09:39 PM
नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) आध्यात्मिक नेता सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने प्रधानमंत्री की ‘परीक्षा पे चर्चा’ के तहत शनिवार को छात्रों के साथ आनंदपूर्वक सीखने और परीक्षा से पहले तनाव से बचने के मंत्र साझा किए।
उन्होंने कहा कि पाठ्य पुस्तकें बुद्धिमत्ता के लिए चुनौती नहीं हैं और छात्रों को अपने ऊपर तनाव को हावी नहीं होने देना चाहिए। सद्गुरु ने छात्रों से कहा कि उन्हें अपने स्मार्टफोन से भी अधिक स्मार्ट बनना होगा
पारंपरिक ‘टाउन हॉल’ प्रारूप से हटकर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बार अधिक अनौपचारिक माहौल को प्राथमिकता दी और छात्रों को अपने वार्षिक संवाद के लिए दिल्ली की प्रतिष्ठित सुंदर नर्सरी ले गए।
मुक्केबाज एम सी मैरीकॉम और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों ने भी ‘परीक्षा पे चर्चा’ की विभिन्न कड़ी में जीवन के प्रमुख पहलुओं पर अपने अनुभव और ज्ञान साझा किए हैं।
श्रृंखला में आगे अभिनेता विक्रांत मैसी और अभिनेत्री भूमि पेडनेकर सकारात्मकता विकसित करने, नकारात्मक विचारों को दूर करने और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा तनाव से निपटने के बारे में सुझाव साझा करने वाले हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘छात्रों के लिए, परीक्षा के समय सबसे बड़ा सहयोगी सकारात्मकता है। कल के ‘परीक्षा पे चर्चा’ की कड़ी में इसी विषय पर चर्चा होगी और हमारे साथ विक्रांत मैसी और भूमि पेडनेकर अपने विचार साझा करेंगे।’’
सद्गुरु ने कहा, ‘‘आपकी पाठ्यपुस्तक आपकी बुद्धिमत्ता के लिए चुनौती नहीं है, चाहे आप कोई भी हों। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने अब तक स्कूल में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। मैं आपको बता रहा हूं कि पाठ्यपुस्तकें कोई चुनौती नहीं हैं।’’
उन्होंने छात्रों से कहा, ‘‘आप खेल-खेल में क्यों नहीं सीख सकते? यदि आप इसे खेल-खेल में सीखते हैं, तो आपकी पाठ्यपुस्तक चुनौती नहीं होगी।’’
छात्रों को ध्यान लगाने का गुर बताते हुए सद्गुरु ने कहा कि बुद्धिमत्ता का मतलब उपयोगिता से नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘बुद्धिमत्ता जीवन के अनुभव की गहराई पैदा करती है। अगर आप तनाव महसूस करते हैं, तो इसका मतलब है कि मस्तिष्क को ठीक से पोषण नहीं मिल रहा है।’’
ईशा फाउंडेशन के प्रमुख ने छात्रों से कहा, ‘‘यदि आप घास या मोटरसाइकिल को देखते हैं, तो आपको सोचना चाहिए कि इसका भौतिकी, गणित और रसायन विज्ञान क्या है। शिक्षा आपको बुनियादी बातें और अंततः जीवन के बारे में सीख प्रदान करती है।’’
सोशल मीडिया और फोन की लत पर एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को यह तय करना चाहिए कि उसे स्मार्टफोन का इस्तेमाल कैसे करना है।
सद्गुरु ने लोगों की बुद्धिमत्ता की तुलना करने के खिलाफ भी आगाह किया। उन्होंने कहा, ‘‘क्या मैं इस व्यक्ति या उस व्यक्ति जितना बुद्धिमान हूं? ऐसी कोई बात नहीं है। यह एक दिखावा है जो दुनिया में फैला हुआ है। हर कोई चमक सकता है और ऐसी चीजें कर सकता है जिसकी दूसरे कल्पना भी नहीं कर सकते। प्रयास करने से सब होता है।’’
पोषण एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञ सोनाली सभरवाल, रुजुता दिवेकर और रेवंत हिमात्सिंगका; 'टेकगुरुजी' के नाम से मशहूर यूट्यूबर गौरव चौधरी तथा एडलवाइस म्यूचुअल फंड की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता समेत अन्य अब तक कार्यक्रम का हिस्सा रहे हैं।
स्कूल और कॉलेज के छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम का पहला संस्करण 2018 में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किया गया था। इसका सातवां संस्करण पिछले साल भारत मंडपम में ‘टाउन हॉल’ प्रारूप में आयोजित किया गया था, जिसमें देश-विदेश के प्रतिभागी शामिल हुए थे।
भाषा आशीष