नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में 20 लाख से अधिक लोग पहुंचे
सुभाष नेत्रपाल
- 10 Feb 2025, 09:07 PM
- Updated: 09:07 PM
(माणिक गुप्ता)
नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2025 के आयोजकों और इस नौ दिवसीय वार्षिक साहित्यिक मेले में भाग लेने वाले लेखकों एवं पाठकों का मानना है कि इसमें रिकॉर्ड संख्या में 20 लाख से अधिक लोग पहुंचे, जो पुस्तकों के प्रति भारत के बढ़ते प्रेम को दर्शाता है।
पुस्तक प्रेमी एक से नौ फरवरी तक इस मेले के आयोजन स्थल भारत मंडपम में अपने पसंदीदा लेखकों की एक झलक पाने या अपनी पसंदीदा किताब की तलाश में उमड़ पड़े।
नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में पेंगुइन रैंडम हाउस, हार्पर कॉलिंस, ब्लूम्सबरी, राज कमल प्रकाशन और वाणी प्रकाशन जैसे हिंदी एवं अंग्रेजी के प्रकाशनों सहित 2,000 से अधिक प्रकाशकों और प्रदर्शकों की भागीदारी देखने को मिली।
इस वर्ष की थीम ‘‘रिपब्लिक ऐट 75’’ ने देश की सांस्कृतिक विरासत और भविष्य के लिए इसकी आकांक्षाओं को तलाशने का मंच प्रदान किया।
नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘इस बार, लोगों की संख्या पहले से अधिक रही, और मेरा अनुमान है - हालांकि अभी तक आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं - कि हम 25 लाख के आंकड़े को पार कर जाएंगे। पिछले साल की तुलना में लोगों की संख्या में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।’’
मराठे ने कहा, ‘‘इससे यही पता चलता है कि भारत में (पुस्तकें) पढ़ने की आदत में कोई कमी नहीं आई है। बल्कि, इसमें बढ़ोतरी हो रही है और प्रकाशन बाजार भी 18 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।’’
मेले के 32वें संस्करण में प्रकाशकों ने पाया कि खरीदारों की साहित्यिक पसंद में विविधता थी, जिसमें गल्प कथा और गैर गल्प कथा से लेकर, विज्ञान-कथा और बच्चों की पुस्तकों तक सब कुछ शामिल हैं।
उदाहरण के लिए, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (पीआरएचआई) ने पिछले वर्षों की तुलना में अपनी गल्प रचनाओं की बिक्री के आंकड़ों में बड़ी वृद्धि दर्ज की, साथ ही भारतीय लेखकों की पुस्तकों की मांग में भी वृद्धि हुई।
पीआरएचआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (बिक्री एवं उत्पाद तथा प्रभाग प्रमुख) मनोज सत्ती ने कहा, ‘‘लोग वह सबकुछ खरीद रहे हैं जो हम उन्हें उपलब्ध कर रहे हैं। बेशक, गल्प कथा पुस्तकें पहले की तुलना में अधिक बिकी हैं।’’
ब्लूम्सबरी इंडिया की विपणन एवं प्रचार प्रमुख मीनाक्षी सिंह ने कहा कि वह पुस्तकों की किसी विशेष शैली का ही जिक्र नहीं कर सकतीं, क्योंकि सभी तरह की कृतियों को लोग खरीदते हैं।
पिछले वर्षों की तरह, इस बार भी मेले में भी अंतरराष्ट्रीय मंडप में 50 देशों और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के लेखकों, वक्ताओं और पुस्तकों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
उदाहरण के लिए, रूस, जिसे ‘फोकस’ राष्ट्र के रूप में नामित किया गया था, ने अपनी ‘‘रूस से पुस्तकें’’ पहल के माध्यम से 1,000 पुस्तकों का संग्रह प्रदर्शित किया।
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