भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों से नहीं निपटता बजट: वाम दल
वैभव अमित
- 01 Feb 2025, 09:38 PM
- Updated: 09:38 PM
नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) वाम दलों ने शनिवार को कहा कि केंद्रीय बजट में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों की अनदेखी की गई है और उच्च मुद्रास्फीति, स्थिर आय और बढ़ती बेरोजगारी के दबाव में जूझ रहे गरीबों को कोई राहत नहीं दी गई है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो ने यहां जारी एक बयान में कहा कि अर्थव्यवस्था के इतने सारे क्षेत्रों के सामने आ रही मांग की समस्या और बड़े पैमाने पर बेरोजगारी एवं घटती मजदूरी के कारण आबादी के बड़े हिस्से के लिए क्रय शक्ति की कमी के मूल कारण पर ध्यान देने के बजाय, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार खर्चों में कटौती के साथ-साथ उच्च आय वाले एक छोटे से समूह को कर में कटौती देकर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।
माकपा ने कहा, ‘‘आर्थिक सर्वेक्षण भारत की श्रम शक्ति की निराशाजनक स्थिति को दर्शाता है, जिसमें पिछले पांच वर्षों में आय में कमी की ओर इशारा किया गया है। वहीं यह बजट सरकारी खर्चों में कटौती और अमीरों को रियायतें देने पर जोर देता है, जिससे भारत में भारी असमानताएं बढ़ेंगी।’’
इसमें कहा गया है कि कर छूट सीमा को बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने से मध्यम वर्ग की मदद करने के दावों के बावजूद, व्यक्तिगत आयकर में इन बदलावों से मध्यम वर्ग को मिलने वाला लाभ वास्तव में बहुत कम होगा, जबकि वास्तव में अमीर भारतीयों को इससे बहुत लाभ होगा, जिनकी संख्या देश की आबादी में 1 प्रतिशत से भी कम है।
पार्टी ने कहा, ‘‘अमीरों और बड़े कॉरपोरेट घरानों पर कर लगाकर संसाधन जुटाने और सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा देने के बजाय, सरकार ने इसके विपरीत कदम उठाने का विकल्प चुना है... इसलिए यह अमीरों द्वारा अमीरों के लिए बजट है।’’
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने दावा किया कि बजट में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों की उपेक्षा की गई है।
पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘‘बढ़ती बेरोजगारी, मुद्रास्फीति, बढ़ती असमानता और क्षेत्रीय विषमताएं भारतीय लोगों के सामने आने वाले कुछ प्रमुख मुद्दे हैं, लेकिन बजट उन पर ध्यान देने में विफल रहा है। पहले से ही अर्थव्यवस्था खराब स्थिति में है और भारतीय रुपये का मूल्य अभूतपूर्व रूप से गिर गया है। विदेशी कर्ज बढ़ रहा है।’’
भाकपा ने कहा कि सामाजिक क्षेत्र और वंचित वर्ग के कल्याण की उपेक्षा की जाती है और मनरेगा जैसी योजनाओं को महत्व नहीं दिया जाता है, वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र को पर्याप्त आवंटन नहीं किया जाता है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने कहा कि उम्मीद थी कि सरकार ऐसा बजट पेश करेगी जो जरूरतमंदों को कुछ राहत प्रदान करेगा, लेकिन यह अपनी अमीर समर्थक छवि सुधारने में विफल रही है।
भाषा वैभव