भारत 2030 से पहले ही एसडीजी के स्वास्थ्य लक्ष्यों को हासिल करने के पथ पर अग्रसर: सरकार
वैभव नेत्रपाल
- 22 Jan 2025, 07:42 PM
- Updated: 07:42 PM
नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) केंद्र सरकार ने बुधवार को पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत प्रगति की समीक्षा की और उसे बताया गया कि सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण प्रगति के साथ भारत 2030 की समयसीमा से पहले अपने स्वास्थ्य लक्ष्यों को पूरा करने की राह पर है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल को बताया गया कि एनएचएम ने मानव संसाधनों के विस्तार, महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दों को उजागर करने और स्वास्थ्य आपातकाल के लिए एकीकृत प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने के वास्ते अपने महत्वपूर्ण प्रयासों के माध्यम से भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने में योगदान दिया है।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि पिछले तीन वर्षों में, एनएचएम ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, रोग उन्मूलन और स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे सहित कई क्षेत्रों में पर्याप्त प्रगति की है।
मंत्रिमंडल ने एसडीजी के तहत लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अगले दो वर्षों के लिए मिशन को जारी रखने की भी मंजूरी दी।
बयान में कहा गया, ‘‘सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति के साथ भारत 2030 की समयसीमा से पहले अपने स्वास्थ्य लक्ष्यों को पूरा करने की राह पर है।’’
इसमें कहा गया, ‘‘एनएचएम के जारी प्रयासों ने भारत के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में नाटकीय परिवर्तन को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है।’’
बयान के अनुसार, मिशन के प्रयास विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के स्वास्थ्य सुधारों का अभिन्न अंग रहे हैं और इसने देश भर में अधिक सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में मंत्रिमंडल को 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के दौरान एनएचएम के तहत प्रगति से अवगत कराया गया।
मंत्रिमंडल को मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर और कुल प्रजनन दर में त्वरित गिरावट तथा टीबी, मलेरिया, कालाजार, डेंगू, तपेदिक, कुष्ठ रोग, वायरल हेपेटाइटिस आदि जैसे विभिन्न रोगों के कार्यक्रमों के संबंध में प्रगति और राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन जैसी नयी पहलों से भी अवगत कराया गया।
बयान में कहा गया कि एनएचएम की एक प्रमुख उपलब्धि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के भीतर मानव संसाधनों में उल्लेखनीय वृद्धि रही है।
साल 2021-22 में, एनएचएम में 2.69 लाख अतिरिक्त स्वास्थ्यकर्मियों को शामिल किया, जिनमें सामान्य ड्यूटी मेडिकल अधिकारी, विशेषज्ञ, स्टाफ नर्स, सहायक नर्स दाइयां, आयुष डॉक्टर, संबद्ध स्वास्थ्यकर्मी और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधक शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, 90,740 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी शामिल किए गए। यह संख्या बाद के वर्षों में बढ़ी और 2022-23 में 4.21 लाख अतिरिक्त स्वास्थ्य पेशेवरों को शामिल किया गया, जिसमें 1.29 लाख सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी थे। 2023-24 में 5.23 लाख कर्मचारी शामिल किए गए, जिसमें 1.38 लाख सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी थे।
बयान में कहा गया कि इन प्रयासों ने स्वास्थ्य सेवा वितरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसमें कहा गया कि एनएचएम ढांचे ने खासकर कोविड-19 महामारी से निपटने में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
स्वास्थ्य सुविधाओं और श्रमिकों के मौजूदा नेटवर्क का उपयोग कर एनएचएम ने जनवरी 2021 और मार्च 2024 के बीच कोविड-19 टीकों की 220 करोड़ से अधिक खुराक देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत ने एनएचएम के तहत प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में भी प्रभावशाली प्रगति की है।
मातृ मृत्यु दर अनुपात 2014-16 में प्रति लाख जन्म पर 130 से घटकर 2018-20 में 97 प्रति लाख हो गया, जो 25 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है। 1990 के बाद से इसमें 83 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो 45 प्रतिशत की वैश्विक गिरावट से अधिक है।
इसी तरह, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 2014 में प्रति 1,000 जन्म पर 45 से घटकर 2020 में 32 हो गई है, जो 1990 के बाद से 60 प्रतिशत की वैश्विक कमी की तुलना में मृत्यु दर में 75 प्रतिशत की उच्च गिरावट को दर्शाता है।
शिशु मृत्यु दर 2014 में प्रति 1,000 जन्म पर 39 से घटकर 2020 में 28 हो गई है। इसके अलावा, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, कुल प्रजनन दर 2015 में 2.3 से घटकर 2020 में 2.0 हो गई है।
बयान में कहा गया, ‘‘ये सुधार संकेत देते हैं कि भारत 2030 से पहले मातृ, शिशु और शिशु मृत्यु दर के लिए अपने एसडीजी लक्ष्यों को पूरा करने की राह पर है।’’
एनएचएम विभिन्न बीमारियों के उन्मूलन और नियंत्रण में भी सहायक रहा है। उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत, क्षय रोगों के मामले 2015 में प्रति 1,00,000 जनसंख्या पर 237 से घटकर 2023 में 195 हो गए, और इसी अवधि में इस बीमारी से मृत्यु दर 28 से घटकर 22 हो गई।
बयान में कहा गया कि 2021 में मलेरिया के मामलों और इससे मौतों में 2020 की तुलना में क्रमशः 13.28 प्रतिशत और 3.22 प्रतिशत की कमी आई है।
इसके अतिरिक्त, कालाजार उन्मूलन के प्रयास सफल रहे हैं। बयान में कहा गया कि गहन मिशन इंद्रधनुष 5.0 के तहत खसरा-रूबेला उन्मूलन अभियान में 34.77 करोड़ से अधिक बच्चों का टीकाकरण किया गया, जिससे 97.98 प्रतिशत कवरेज हासिल हुई।
विशेष स्वास्थ्य पहलों के संदर्भ में, सितंबर 2022 में शुरू किए गए प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान में 1,56,572 लाख निक्षय मित्र स्वयंसेवकों का पंजीकरण हुआ है, जो 9.40 लाख से अधिक टीबी रोगियों की सहायता कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम का भी विस्तार किया गया है, जिसमें वित्त वर्ष 2023-24 में 62.35 लाख से अधिक हेमोडायलिसिस सत्र प्रदान किए गए, जिससे 4.53 लाख से अधिक डायलिसिस रोगियों को लाभ हुआ।
इसके अलावा, 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन ने आदिवासी क्षेत्रों में 2.61 करोड़ से अधिक व्यक्तियों की जांच की है, जो 2047 तक सिकल सेल रोग को खत्म करने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है।
बयान में कहा गया कि एनएचएम ने तंबाकू के उपयोग और सांप के काटने से फैलने वाले जहर जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर भी ध्यान केंद्रित किया है।
भाषा वैभव