दलितों को लुभाने की कोशिश : भाजपा ने महाकुंभ में सफाई कर्मचारियों में बांटीं संविधान की प्रतियां
मनीष सलीम संतोष
- 17 Jan 2025, 09:22 PM
- Updated: 09:22 PM
(मनीष चंद्र पांडेय)
महाकुम्भ नगर (उप्र), 17 जनवरी (भाषा) प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ मेले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई के नेताओं ने सफाई कर्मचारियों में संविधान की प्रतियां बांटीं।
उन्होंने कहा कि प्रयागराज में धार्मिक समागम एकता का महान उत्सव है जिसकी गारंटी संविधान देता है।
भारतीय संविधान के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रव्यापी अभियान 'संविधान गौरव अभियान' शुरू करने वाली भाजपा इस पहल के तहत पूरे राज्य में दलितों को सम्मानित कर रही है।
उत्तर प्रदेश भाजपा सचिव अभिजात मिश्रा ने बृहस्पतिवार को महाकुम्भ मेले में सफाई कर्मचारियों को माला पहनाकर और संविधान की प्रतियां देकर सम्मानित करने के बाद कहा, ‘‘हम यहां उन लोगों का सम्मान करने आए हैं, जिन्हें गैर-भाजपा दलों और सरकारों ने महज वोट बैंक बना दिया था। अब देश में एक मजबूत, संवेदनशील नेता के नेतृत्व में बदलाव साफ जाहिर हो रहा है।''
मिश्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में दावा किया कि अन्य दल दलितों और अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) को वोट बैंक के रूप में देखते हैं, लेकिन भाजपा उनका सम्मान करती है।
उन्होंने कहा, ''महाकुम्भ एकता का भी एक महान उत्सव है, जिसकी गारंटी संविधान देता है। इसलिए हम संविधान की प्रतियां लेकर आये हैं ताकि हमारे संविधान निर्माताओं के एकता के उस विचार को मजबूत किया जा सके जिसे हमारे राजनीतिक विरोधी नकारना चाहते हैं।''
लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष ने भाजपा पर अपने '400 पार' के नारे को लेकर बार-बार निशाना साधा था। विपक्ष ने दावा किया था कि भाजपा संविधान बदलने के लिए 400 सीट से ज्यादा जीतने के लिये यह नारा दे रही है। हालांकि, भाजपा ने इसे खारिज कर दिया था।
हालांकि, लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने लिए निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रही और उसे क्षेत्रीय दलों के समर्थन से सरकार बनानी पड़ी।
दूसरी ओर, भाजपा पर संविधान खत्म करने की साजिश रचने के आरोप को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ने वाले विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) को खासी सफलता मिली और लोकसभा में उनकी सदस्य संख्या में बढ़ोतरी हुई।
महाकुम्भ में सफाईकर्मियों के प्रति भाजपा द्वारा प्रेम दिखाया जाना कोई नयी बात नहीं है। साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उस साल आयोजित कुंभ मेले में दलित सफाईकर्मियों के पैर धोये थे।
इस बार के महाकुम्भ से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रयागराज के अपने दौरे के दौरान इस समागम को 'एकता का महाकुम्भ' बताया था। इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समागम को 'सामाजिक समता का महापर्व' बताया था।
इस आयोजन के लिए राज्य सरकार के प्रचार अभियान के तहत हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा श्रृंगवेरपुर के निषाद राज पार्क में भगवान राम और निषाद राज (नदी के किनारे रहने वाले समुदाय के राजा) की एक विशाल प्रतिमा का अनावरण किया गया था।
निषाद राजनीतिक रूप से प्रभावशाली अन्य पिछड़े वर्ग का एक समुदाय है जो खुद को अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए जोर दे रहा है और सभी पार्टियां उन्हें लुभाने के लिए उत्सुक हैं।
महाकुम्भ में राजनीतिक रुख पर टिप्पणी करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ''आप खुद के राजनीतिक ख्याल बना सकते हैं लेकिन हम एकता के लिए खड़े हैं और महाकुम्भ जातिगत सद्भाव का एक उत्कृष्ट उदाहरण है क्योंकि यहां सभी प्रकार के मतभेदों को खत्म कर दिया जाता है। यही वह एकता है जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने किया होगा।''
राजनीतिक पर्यवेक्षक सुधीर पंवार ने कहा, ''विपक्षी दल और भाजपा के कई सहयोगी दल जातिवार जनगणना के मुद्दे पर एकजुट हैं। भाजपा इस मुद्दे पर बड़ी दुविधा का सामना कर रही है।''
भाषा मनीष सलीम