कृषि क्षेत्र को दी जाने वाली कोई भी सब्सिडी सीधे किसानों तक पहुंचनी चाहिए: उपराष्ट्रपति
नोमान रंजन
- 16 Jan 2025, 08:04 PM
- Updated: 08:04 PM
बेंगलुरु, 16 जनवरी (भाषा) उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बृहस्पतिवार को कहा कि कृषि क्षेत्र को दी जाने वाली कोई भी सब्सिडी, किसी भी रूप में, सीधे किसान तक पहुंचनी चाहिए।
धनखड़ ने धारवाड़ में कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय के अमृत महोत्सव और पूर्व छात्र मिलन समारोह के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अपना संबोधन देते हुए कहा, “किसान को ही फैसला करने दें, यहां तक कि उर्वरक सब्सिडी जो बहुत बड़ी है... कृषि विज्ञान के अर्थशास्त्रियों को यह सोचना चाहिए कि अगर यह सहायता सीधे किसानों तक पहुंचेगी, तो इससे किसान रासायनिक उर्वरकों के विकल्प की ओर अग्रसर होगा। किसान इस धन का उपयोग जैविक और प्राकृतिक खेती के लिए कर सकते हैं।"
उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि किसानों की समस्या पर तत्काल राष्ट्रीय ध्यान देने की आवश्यकता है तथा किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, “किसानों को आर्थिक सुरक्षा की आवश्यकता है...मैं कहूंगा कि जब किसानों की समस्याओं का समाधान खोजने की बात आती है, तब समय की कीमत अत्यन्त महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार काम कर रही है। हम चाहते हैं कि सभी लोग एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर काम करें और समाधान खोजने के लिए एक सकारात्मक सोच के साथ एकत्रित हों।”
देश की अर्थव्यवस्था पर कृषि क्षेत्र के व्यापक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए धनखड़ ने कहा कि आज कृषि आधारित उद्योग और कृषि उपज आधारित उद्योग समृद्ध हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हमारे किसानों को लाभ को समान रूप से साझा करना चाहिए। इन संस्थानों को अपने सीएसआर कोष को किसान के कल्याण के लिए, कृषि क्षेत्र के अनुसंधान के लिए समर्पित करना चाहिए। उन्हें इस दिशा में उदारता से सोचना चाहिए, क्योंकि कृषि उपज उनकी जीवन रेखा है और ये दिल की धड़कन किसानों द्वारा नियंत्रित होती है।”
धनखड़ ने कहा कि सरकारों से आग्रह किया कि वे किसानों को हर कीमत पर खुश रखने के लिए काम करें।
उन्होंने कहा, “हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि जब किसान आर्थिक रूप से ठीक होता है, तब अर्थव्यवस्था अपने आप आगे बढ़ती है, क्योंकि किसान के खर्च करने की क्षमता यही है...अगर कृषि क्षेत्र जीवंत, समृद्ध, स्नेहित, जिसका ध्यान रखा जा रहा है, तो कृषि क्षेत्र में कोई गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां नहीं होंगी। हमें किसानों पर उसी तरह ध्यान देना चाहिए, जैसे हम आईसीयू में अपने मरीजों पर देते हैं।"
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकार किसानों के लिए बहुत कुछ कर रही है। उनके मुताबिक, किसानों को खराब मौसम और अप्रत्याशित बाजार स्थितियों जैसे प्राथमिक तनावों से राहत देनी चाहिए।
धनखड़ ने कहा “ किसान खराब मौसम, अप्रत्याशित बाजार स्थितियों पर निर्भर है। अगर कमी है, तो उसे नुकसान उठाना पड़ता है। अगर बहुत कुछ है, तो उसे नुकसान उठाना पड़ता है। और इसलिए, हमें यह सुनिश्चित करने के लिए वे तरीके तलाश करने होंगे जिससे हमारे किसान अच्छा आर्थिक और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखें।"
उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड एक बड़ा कदम है। उनके अनुसार, बोर्ड की बदौलत पांच साल में हल्दी का उत्पादन दोगुना हो जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को कृषि क्षेत्र में उपलब्ध नवीनतम प्रौद्योगिकी को अपनाने पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए।
धनखड़ ने कहा, "प्रौद्योगिकी तेजी से बदल रही है। लेकिन, किसान अब भी पुराने ट्रैक्टर से चिपके हुए हैं...किसान को प्रौद्योगिकी अपनाना चाहिए। उन्हें प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए राजी किया जाना चाहिए। इसके लिए, कृषि विज्ञान केंद्रों को सबसे महत्वपूर्ण जगह होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कृषि सुधार बहुत जरूरी है।
भाषा नोमान