मोदी ने उत्तराखंड में बारहमासी पर्यटन की वकालत की, कहा : इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी
दीप्ति नरेश मनीषा
- 06 Mar 2025, 04:06 PM
- Updated: 04:06 PM
हरसिल (उत्तराखंड), छह मार्च (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखंड में बारहमासी पर्यटन की पुरजोर वकालत करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि इस खूबसूरत पहाड़ी राज्य में कोई ‘ऑफ़ सीजन’ नहीं होना चाहिए और हर सीजन 'ऑन सीज़न' रहे जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर मजबूती मिलेगी।
मुखबा में देवी गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल में पूजा-अर्चना करने के बाद हरसिल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर पर्यटक सर्दियों में प्रदेश में आएंगे तो उन्हें उत्तराखंड की वास्तविक आभा देखने को मिलेगी ।
मोदी ने राज्य में शीतकालीन पर्यटन के लिए गढ़वाली भाषा में एक नया शब्द 'घाम तापो पर्यटन' (धूप सेंको पर्यटन) गढ़ते हुए कहा, ‘‘सर्दियों में जब देश के बड़े हिस्से में कोहरा छाया होता है, तो पहाड़ों पर धूप का आनंद होता है ।’’
बारहमासी या 365 दिनों के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार के दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि साल भर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से 'पर्यटन के 360-डिग्री दृष्टिकोण' की जरूरत है ।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी पहाड़ों में मार्च, अप्रैल और जून में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं लेकिन उसके बाद इनकी संख्या कम हो जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘सर्दियों में होमस्टे और होटल खाली पड़े रहते हैं । यह असंतुलन उत्तराखंड में साल के एक बड़े हिस्से में आर्थिक सुस्ती ला देता है ।’’
मोदी ने कहा कि वह चाहते हैं कि उत्तराखंड में पर्यटन के लिहाज से कोई भी सीजन ‘ऑफ़ सीजन' न हो और हर सीजन 'ऑन सीज़न' रहे । उन्होंने कहा कि इससे उत्तराखंड को अपना आर्थिक सामर्थ्य बढ़ाने में मदद मिलेगी ।
उन्होंने कहा, ‘‘अपने पर्यटन क्षेत्र को विविधतापूर्ण बनाना और उसे बारहमासी बनाना उत्तराखंड के लिए बहुत जरूरी है ।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह देवी गंगा के शीतकालीन गद्दीस्थल मुखबा में आकर अभिभूत हैं । उन्होंने कहा, ‘‘मुझे मां गंगा ने बुलाया है । उन्हीं के आशीर्वाद से मैं काशी तक पहुंचा और सांसद के रूप में वहां लोगों की सेवा करने का मौका मिला । कुछ महीने पहले मुझे अनुभूति हुई जैसे मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया है ।’’
मोदी ने अपने संबोधन की शुरूआत भी 'गंगा मैया की जय' के जयकारे के साथ की ।
उन्होंने हाल ही में चमोली जिले के माणा गांव में हुए हिमस्खलन में सीमा सड़क संगठन के शिविर में आठ श्रमिकों की मौत पर भी दुख व्यक्त किया ।
प्रधानमंत्री ने हरसिल में आदिवासी गांव जादूंग के लिए एक ट्रेक और बाइक यात्रा को भी झंडी दिखाई और कहा कि यह उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों को पर्यटन का लाभ दिलाने में मदद करेगा ।
उन्होंने कहा कि 1962 में जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया था तो सीमांत जादूंग गांव को खाली करा लिया गया था । उन्होंने कहा, ‘‘अब उसे नए सिरे से बसाने और विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।’’
अपनी अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) द्वारा राज्य में केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए मंजूर की गयीं दो प्रमुख रोपवे परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि केदारनाथ मंदिर पहुंचने के लिए आठ-नौ घंटे की यात्रा को रोपवे घटाकर केवल 30 मिनट कर देगा।
प्रधानमंत्री के दौरे से एक दिन पहले उनकी अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की दो प्रमुख रोपवे परियोजनाओं को मंजूरी दी थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नए बजट में 50 नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने का प्रावधान किया गया है । उन्होंने लोगों से शादियों के लिए उत्तराखंड को अपना गंतव्य बनाने का आग्रह किया । उन्होंने फिल्म निर्माताओं से भी अपनी फिल्मों की शूटिंग इस पहाड़ी राज्य में करने को कहा ।
उन्होंने कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लूएसंर्स को उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन स्थलों पर लघु फिल्में बनाने को प्रोत्साहित करना चाहिए और उसमें से सर्वश्रेष्ठ कार्य को पुरस्कार दिया जाना चाहिए जिससे राज्य में शीतकालीन पर्यटन का बहुत प्रचार—प्रसार होगा ।
उन्होंने कॉरपोरेट घरानों से भी अपने सम्मेलन और सेमिनार उत्तराखंड में आयोजित करने को कहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि शीतकालीन पर्यटन कई देशों में लोकप्रिय है और पर्यटन क्षेत्र के हितधारकों को उन देशों में इसका अध्ययन करना चाहिए और उत्तराखंड में उसे लागू करना चाहिए।'
इससे पहले, मोदी ने मुखबा में पूजा अर्चना की और देशवासियों की सुख—समृद्धि की कामना की ।
अपने एक दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री ने मुखबा में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से देवी गंगा की पूजा कर उनकी प्रतिमा को भोग अर्पित किया ।
प्रधानमंत्री मोदी सुबह देहरादून के निकट जौलीग्रांट हवाई अड्डे पर पहुंचे जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण तथा अन्य लोगों ने उनका स्वागत किया। यहां से प्रधानमंत्री हेलीकॉप्टर से हरसिल में उतरे और फिर हरसिल से सीधे मुखबा पहुंचे ।
मां गंगा का मायका माने जाने वाले मुखबा में मां गंगा की शीतकालीन पूजा की जाती है। गर्मियों में मां गंगा की पूजा गंगोत्री मंदिर में की जाती है और सर्दियों के दौरान कपाट बंद होने के बाद उनकी मूर्ति को मुखबा लाया जाता है। मुखबा गंगोत्री मंदिर के रास्ते में स्थित है।
प्रधानमंत्री के तौर पर पहली बार मुखबा पहुंचने पर प्रधानमंत्री का पारंपरिक परिधानों में सजे स्थानीय लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया । इस मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री को घेरकर उनके चारों तरफ रांसो नृत्य किया । इस दौरान प्रधानमंत्री गोल चक्कर के भीतर चेहरे पर मुस्कान लिए हाथ जोड़कर खड़े रहे ।
उन्होंने मुखबा में खड़े होकर चारों तरफ बर्फ से लदी, हिमालयी पहाड़ों की खूबसूरत चोटियों के भी दीदार किए । प्रधानमंत्री काफी देर तक व्यू प्वाइंट से पहाड़ की चोटियों के साथ ही हरसिल घाटी से बहती भागीरथी नदी की सुंदरता को निहारते रहे ।
इसके बाद वह सड़क मार्ग से वापस हरसिल पहुंचे और जनसभा को संबोधित करने से पहले शीतकालीन यात्रा पर आधारित एक प्रदर्शनी देखी और उसे सराहा । इस प्रदर्शनी में उत्तराखंड के प्रमुख शीतकालीन पर्यटन स्थलों को दर्शाया गया है ।
इस साल प्रधानमंत्री का उत्तराखंड का यह दूसरा दौरा है । इससे पहले वह 28 फरवरी को राष्ट्रीय खेलों के उदघाटन के लिए देहरादून आए थे ।
माना जा रहा है कि मुखबा और हरसिल की प्रधानमंत्री की इस यात्रा से शीतकालीन चारधाम यात्रा तथा पर्यटन को बहुत बढ़ावा मिलेगा ।
उत्तराखंड सरकार शीतकालीन चारधाम यात्रा तथा सर्दियों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही है जिससे क्षेत्र में स्थानीय अर्थव्यवस्था, होमस्टे तथा अन्य प्रकार के रोजगार बढ़ें ।
इस संबंध में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर धामी ने लिखा, ‘मां गंगा के शीतकालीन निवास स्थल मुखबा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हार्दिक स्वागत व अभिनंदन किया ।’’
प्रधानमंत्री के आगमन को एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए धामी ने कहा, ‘'मुखीमठ (मुखबा) को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने और प्रदेश की सांस्कृतिक व धार्मिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री जी की यह यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है ।’’
भाषा दीप्ति नरेश