क्लैट, 2025 परीक्षा को लेकर विवाद: याचिकाएं एक उच्च न्यायालय में हस्तांतरित कर सकती है शीर्ष अदालत
वैभव मनीषा
- 15 Jan 2025, 04:55 PM
- Updated: 04:55 PM
नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह ‘कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट’ (क्लैट) 2025 के परिणामों को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को किसी एक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर सकता है।
एक दिसंबर, 2024 को क्लैट, 2025 परीक्षा आयोजित की गई थी। देश के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में स्नातक विधि पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए यह परीक्षा आयोजित की जाती है और इसमें कई प्रश्न गलत होने के आरोपों पर विभिन्न उच्च न्यायालयों में कई याचिकाएं दायर की गई थीं।
प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के संघ (सीएनएलयू) की स्थानांतरण याचिकाओं पर नोटिस जारी किया। याचिकाओं में विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित अनेक मामलों को मिलाने की मांग की गई है।
दिल्ली, कर्नाटक, झारखंड, राजस्थान, बंबई, मध्य प्रदेश और पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं।
पीठ ने कहा कि वह इस विवाद पर एक अधिकृत फैसले के लिए किसी एक उच्च न्यायालय में मामलों को भेजने के पक्ष में है और यह पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय हो सकता है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि सभी याचिकाओं को एक ही उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने से तेजी से फैसला आएगा।
उन्होंने कहा कि क्लैट के परिणामों पर पहली याचिका पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर की गई। उन्होंने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की मामलों की निस्तारण दर की सराहना करते हुए कहा कि यह अन्य अदालतों से अधिक है।
पीठ ने कहा, ‘‘विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित रिट याचिकाओं का निस्तारण एक उच्च न्यायालय में होना चाहिए। चूंकि यह शीघ्र होगा, इसलिए नोटिस जारी किए जाएं जिनके जवाब तीन फरवरी, 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में दिये जाएं। विभिन्न उच्च न्यायालयों के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश होने वाले वकीलों को नोटिस दिए जाएंगे। पीठ का विचार है कि मामले को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जा सकता है।’’
सीएनएलयू ने अधिवक्ता पृथा श्रीकुमार अय्यर के माध्यम से याचिका दायर की थी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उसकी ओर से पक्ष रखा।
मेहता ने मामलों को हस्तांतरित किए जाने पर सहमति जताई लेकिन कर्नाटक उच्च न्यायालय के चुनाव का सुझाव दिया।
हालांकि पीठ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय पर कायम रही।
छात्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों ने चिंता जताई और कुछ ने पीठ से अनुरोध किया कि मामलों को दिल्ली उच्च न्यायालय में हस्तांतरित करने पर विचार किया जाए।
एक अभ्यर्थी ने हाल में दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ को सूचित किया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में कई याचिकाएं लंबित हैं और स्थानांतरण याचिकाएं शीर्ष अदालत के समक्ष दायर की जाएंगी।
इसके बाद उच्च न्यायालय ने एकल न्यायाधीश की पीठ के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर 30 जनवरी को सुनवाई करना तय किया।
गत 20 दिसंबर, 2024 को, दिल्ली उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने उत्तर कुंजी में त्रुटियों को लेकर क्लैट-2025 के परिणाम को संशोधित करने के लिए संघ को निर्देश दिया।
एकल न्यायाधीश का फैसला क्लैट के एक अभ्यर्थी की याचिका पर आया। फैसले में कहा गया कि प्रवेश परीक्षा में दो प्रश्नों के उत्तर गलत थे।
याचिका में 7 दिसंबर, 2024 को संघ द्वारा प्रकाशित उत्तर कुंजी को चुनौती दी गई थी, जबकि कुछ प्रश्नों के सही उत्तर घोषित करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
एकल न्यायाधीश ने कहा कि त्रुटियां पूरी तरह स्पष्ट थीं और ‘उन पर आंखें मूंद लेना’ अन्याय के समान होगा।
अभ्यर्थी ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें अन्य दो प्रश्नों पर उसकी प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया गया था, वहीं संघ ने एकल न्यायाधीश के निर्णय के विरुद्ध याचिका दायर की।
गत 24 दिसंबर, 2024 को, चुनौतियों की सुनवाई करने वाली एक खंडपीठ ने दो प्रश्नों पर एकल न्यायाधीश के आदेश में प्रथम दृष्टया कोई त्रुटि न पाए जाने के बाद कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया और कहा कि संघ न्यायाधीश के निर्णय के अनुसार परिणाम घोषित करने के लिए स्वतंत्र है।
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में पांच वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए क्लैट, 2025 का आयोजन एक दिसंबर को किया गया था और परिणाम की घोषणा सात दिसंबर को की गई थी।
भाषा वैभव