शिवसेना (उबाठा) अकेले लड़ेगी स्थानीय निकाय चुनाव: राउत
शुभम माधव
- 11 Jan 2025, 05:31 PM
- Updated: 05:31 PM
नागपुर, 11 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में महा विकास आघाडी की हार को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रमुख घटक उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना ने शनिवार को स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा की। इस कदम से विपक्षी खेमे की एकता पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी आगामी स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ेगी।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राउत ने गठबंधन में संबंधित दलों के कार्यकर्ताओं के लिए अवसरों की कमी और संगठनात्मक विकास के अधिकार को अकेले चुनाव लड़ने के प्रमुख कारणों के रूप में उद्धृत किया।
दो दिन पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने कांग्रेस को झटका देते हुए पांच फरवरी को होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनावों में अरविंद केजरीवाल की 'आप' को समर्थन देने की घोषणा की थी।
राउत की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए एक कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इस बात पर फैसला करेगा कि कांग्रेस स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ेगी या नहीं, जिसका कार्यक्रम अभी घोषित होना बाकी है।
शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शरदचंद्र पवार) ने कहा कि शिवसेना (उबाठा) के फैसले से एमवीए गठबंधन के सभी तीन घटकों की चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ेगा।
राज्यसभा सदस्य ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ और महा विकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए है।
उन्होंने कहा, ‘‘ गठबंधन में, अलग-अलग दलों के कार्यकर्ताओं को अवसर नहीं मिलते और इससे संगठनात्मक विकास में बाधा आती है। हम अपने दम पर मुंबई, ठाणे, नागपुर और अन्य नगर निगमों, जिला परिषदों व पंचायतों के चुनाव लड़ेंगे।’’
उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी को संकेत दिए हैं कि उसे अकेले चुनाव लड़ना चाहिए।
राउत ने एमवीए में समन्वय की कमी के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।
राज्य विधानसभा में एमवीए की हार को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के लिए कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार पर निशाना साधते हुए राउत ने कहा कि जो लोग आम सहमति और समझौते में विश्वास नहीं करते, उन्हें गठबंधन में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि ‘इंडिया’ गठबंधन ने लोकसभा चुनावों के बाद एक भी बैठक नहीं की।
शिवसेना (उबाठा) नेता ने कहा, ‘‘हम ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए एक संयोजक भी नियुक्त नहीं कर पाए। यह ठीक नहीं है। गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते, बैठक बुलाना कांग्रेस की जिम्मेदारी है।’’
विधानसभा में राकांपा (शरदचंद्र पवार) के नेता जितेन्द्र आव्हाड ने कहा कि यदि शिवसेना (उबाठा) अकेले जाने को इच्छुक है तो वे उसे नहीं रोक सकते।
उन्होंने कहा, "अगर वे अकेले जाना चाहते हैं, तो हम उन्हें रोकने वाले कौन होते हैं? हम किसी को जबरन साथ नहीं ले जा सकते। विधानसभा चुनाव में हार के बाद हमें साथ रहने की जरूरत है। मुझे नहीं लगता कि यह सही फैसला है। इससे एमवीए के तीनों दलों की चुनावी संभावनाएं प्रभावित होंगी।"
राकांपा (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा कि पार्टियां हमेशा स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ती रही हैं।
उन्होंने कहा, "स्थानीय निकाय चुनाव पार्टी कार्यकर्ताओं के होते हैं। अगर हम अपनी सुविधा के अनुसार चुनाव लड़ेंगे तो कार्यकर्ताओं को क्या करना चाहिए, केवल नेताओं दरी उठाएंगे?"
नागपुर से कांग्रेस विधायक विकास ठाकरे ने कहा कि यदि शिवसेना अकेले चुनाव में जाने का रास्ता अपनाती है तो कांग्रेस भी ऐसा करने के लिए तैयार है।
हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गोवा के ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के प्रभारी माणिकराव ठाकरे ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों पर पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व फैसला करेगा।
मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने शिवसेना (उबाठा) की घोषणा को ज्यादा तवज्जो नहीं दी।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "हमें इस बात की चिंता नहीं है कि एमवीए बरकरार रहेगा या नहीं। मेरी सरकार महाराष्ट्र की प्रगति और विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुझे आगामी सभी चुनावों में लोगों के समर्थन का भरोसा है।"
स्थानीय निकाय चुनावों में अकेले उतरने की शिवसेना की घोषणा ऐसे समय में आई है जब हाल के दिनों में पार्टी द्वारा भाजपा की आलोचना में नरमी बरतने तथा फडणवीस की "राजनीति में कुछ भी हो सकता है" वाली टिप्पणी की अफवाहें चल रही हैं।
फडणवीस ने शुक्रवार को एक साक्षात्कार में कहा, "यदि आप 2019 से 2024 तक के घटनाक्रमों को देखें तो मुझे एहसास हुआ कि कभी भी कुछ भी नहीं कहना चाहिए और कुछ भी हो सकता है। उद्धव ठाकरे किसी अन्य पार्टी में चले जाते हैं और अजित पवार हमारे पास आ जाते हैं। राजनीति में कुछ भी हो सकता है, हालांकि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि ऐसा होना चाहिए।"
उन्होंने कहा था कि उनके अलग हुए मित्र उद्धव ठाकरे कोई "शत्रु" नहीं हैं।
भाषा
शुभम