केंद्रीय एजेंसियों की जांच वाले मामलों में दोषसिद्धि दर को लेकर बंगाल सरकार ने अदालत में उठाये सवाल
देवेंद्र सुरेश
- 04 Apr 2024, 06:54 PM
- Updated: 06:54 PM
कोलकाता, 04 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच किये जा रहे मामलों में दोषसिद्धि की दर को लेकर बृहस्पतिवार को सवाल उठाया, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वकील ने राज्य सरकार पर जांच आगे बढ़ाने में सहयोग न करने का आरोप लगाया।
उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखालि में महिलाओं का कथित यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने की जांच स्थानांतरित करने संबंधी अनुरोध का विरोध करते हुए, राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवज्ञानम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष दावा किया कि केंद्रीय एजेंसियों ने भरोसा खो दिया है।
खंडपीठ में न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य भी शामिल थे।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पैरवी कर रहे केंद्र सरकार के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने राज्य सरकार पर सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए पूछा कि ऐसी स्थिति में केंद्रीय एजेंसियां जांच को कैसे आगे बढ़ा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने राज्य में कई मामलों में केंद्रीय एजेंसियों की जांच के आदेश दिये हैं, जिनमें 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा का मामला भी शामिल है।
त्रिवेदी ने कहा कि स्कूल नौकरी घोटाला मामले में, कुछ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार द्वारा मंजूरी नहीं दी जा रही है।
विभिन्न याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सभी अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद, खंडपीठ ने इन याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
याचिकाकर्ता-वकील प्रियंका टिबरेवाल ने जांच को केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने खंडपीठ के समक्ष संदेशखालि में यौन उत्पीड़न, जमीन पर कब्जा और हिंसा के कथित पीड़ितों की कई शिकायतें रखीं।
उन्होंने दावा किया कि भारी-भरकम फाइल में महिलाओं द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप वाली 100 से अधिक शिकायतें हैं, इसके अलावा कथित तौर पर जमीन हड़पने और हिंसा के कई अन्य मामले भी शामिल हैं।
टिबरेवाल ने अदालत से शिकायतों की जांच करने और पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक समिति के गठन का भी अनुरोध किया।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सात मार्च को टिबरेवाल को आवेदन/हलफनामा के जरिये संदेशखालि की महिलाओं को अपनी शिकायतें अदालत के संज्ञान में लाने की अनुमति दे दी थी।
राज्य के महाधिवक्ता ने राज्य में सीबीआई या ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच किये जा रहे मामलों में दोषसिद्धि की दर को लेकर हैरानी जताई।
एक अन्य याचिकाकर्ता एवं वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने अदालत से गुहार लगाई थी कि संदेशखालि में यौन उत्पीड़न और जमीन कब्जे के मामले की जांच सीबीआई को स्थानांतरित की जाए।
न्याय मित्र जयंत नारायण चटर्जी ने ग्रामीणों की जमीन हड़पने और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर अदालत के समक्ष रिपोर्ट दर्ज की है।
भाषा
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