प्रधान न्यायाधीश ने आईओए, एआईएफएफ से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग किया
अविनाश नरेश
- 06 Jan 2025, 02:05 PM
- Updated: 02:05 PM
नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना ने सोमवार को भारतीय ओलंपिक संघ और अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के संविधानों को अंतिम रूप देने से संबंधित दो भिन्न याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। दोनों संविधानों को उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एल नागेश्वर राव ने तैयार किया था।
कार्यवाही की शुरुआत में प्रधान न्यायाधीश खन्ना ने कहा कि वह इन मामलों की सुनवाई करने वाली पीठ का हिस्सा नहीं होंगे, क्योंकि उन्होंने इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय में इनमें से एक याचिका की सुनवाई की थी। पीठ में न्यायमूर्ति संजय कुमार भी शामिल थे।
न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, ‘‘याचिकाओं को 10 फरवरी को न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली दूसरी पीठ के समक्ष आने दें। मुझे स्मरण है कि मैंने दिल्ली उच्च न्यायालय में इस पर सुनवाई की थी।’’
इन याचिकाओं पर आखिरी बार 19 मार्च, 2024 को तत्कालीन सीजेआई डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की थी।
उसके बाद पीठ ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को न्यायमूर्ति राव द्वारा प्रस्तावित संविधान मसौदे पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की अनुमति दी थी।
पीठ ने यह भी कहा था कि वह अगली सुनवाई की तारीख पर भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) और एआईएफएफ के संविधानों के बारे में उठाए गए मुद्दों पर फैसला करेगी।
एआईएफएफ संबंधी याचिका पर विचार करते हुए पीठ ने कहा था कि न्यायमूर्ति राव द्वारा पेश रिपोर्ट को न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) गोपाल शंकरनारायणन द्वारा सभी पक्षों के बीच वितरित किया जाएगा जो इसकी ‘सॉफ्ट’ प्रति चाहते हैं।
पीठ ने निर्देश दिया था कि मसौदा संविधान पर एआईएफएफ की आपत्तियां भी दर्ज की जाएं।
इससे पहले, सर्वोच्च अदालत ने आईओए के मसौदा संविधान पर आपत्तियां दर्ज कराने के लिए समय बढ़ा दिया था। इसने यह भी स्पष्ट किया था कि आईओए से संबंधित याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान उच्च न्यायालयों को अन्य खेल निकायों से जुड़ी लंबित याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखने से नहीं रोका जाएग।
आईओए के मसौदा संविधान को दिल्ली में विशेष आम सभा में अपनाया गया था।
आईओए ने सर्वोच्च अदालत और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) की निगरानी में तैयार किए गए मसौदा संविधान को स्वीकार कर लिया लेकिन कई सदस्यों ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा इसे अनिवार्य बनाए जाने के बाद उन्हें इसे अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
शीर्ष अदालत ने न्यायमूर्ति राव से यह भी आग्रह किया था कि वह फुटबॉल को नियंत्रित करने वाली शीर्ष वैश्विक संस्था फीफा सहित विभिन्न हितधारकों द्वारा मसौदा दस्तावेज पर आपत्तियों पर ध्यान देने के बाद एआईएफएफ संविधान को अंतिम रूप देने पर व्यापक रिपोर्ट तैयार करें।
भाषा अविनाश