मध्यप्रदेश: पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई से सटे तारपुरा गांव में स्थिति शांत लेकिन तनावपूर्ण
हर्ष जितेंद्र
- 04 Jan 2025, 06:54 PM
- Updated: 06:54 PM
(हर्षवर्धन प्रकाश)
पीथमपुर, चार जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के धार जिले की करीब 20,000 की आबादी वाले तारपुरा गांव में पुलिस बल की तैनाती के बीच शनिवार को हालात शांत लेकिन तनावपूर्ण बने रहे।
यह गांव पीथमपुर की उस अपशिष्ट निपटान इकाई से एकदम सटा है, जहां भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 जहरीले कचरे को निपटान के लिए लाया गया है।
तारपुरा के लोग एक निजी कम्पनी की संचालित इस इकाई में जहरीला कचरा नष्ट किए जाने की योजना के खिलाफ हैं।
यह गांव ग्रामीणों के उग्र विरोध प्रदर्शन का गवाह भी रहा है।
ग्रामीणों को आशंका है कि यूनियन कार्बाइड के कचरे को उनके गांव से सटी इकाई में नष्ट किए जाने पर इंसानी आबादी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा।
हालांकि, राज्य सरकार इस आशंका को पहले ही खारिज कर चुकी है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन ने पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई और इसके 100 मीटर के दायरे में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर रखा है ताकि वहां भीड़ को जुटने से रोका जा सके।
इकाई के आस-पास बड़ी तादात में पुलिस बल तैनात है।
तारपुरा में किसानों और मजदूरों की बड़ी आबादी है।
गांव के निवासी कैलाश शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हम चाहते हैं कि यूनियन कार्बाइड कारखाने का जहरीला कचरा पीथमपुर में नहीं जलाया जाए।”
शर्मा अपने छह सदस्यों के परिवार के साथ बिहार से मजदूरी के लिए पीथमपुर आए हैं।
उन्होंने दावा किया कि यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे के पीथमपुर आने के बाद स्थानीय कारखानों में मजदूरों की उपस्थिति घट गई है।
गांव में रहने वाले कुछ अन्य मजदूरों ने इस दावे की तसदीक की। पीथमपुर राज्य का प्रमुख औद्यौगिक क्षेत्र हैं जहां करीब 1,250 कारखाने चालू हैं।
तारपुरा के एक युवा भाया ने कहा, “हम चाहते हैं कि यूनियन कार्बाइड कारखाने का कचरा वापस भोपाल भेजा जाए।”
पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड कारखाने के जहरीले कचरे के निपटान की योजना को लेकर विरोध प्रदर्शन के बीच शुक्रवार को दो लोगों ने आत्मदाह का प्रयास किया था।
इस घटनाक्रम से सतर्क प्रशासन अब स्थानीय लोगों और जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उन्हें भरोसा दिलाने में जुटा है कि जहरीले कचरे के निपटान की योजना को लेकर उनका पक्ष सुना जाएगा और उनका अहित नहीं होने दिया जाएगा।
धार के पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया, “पीथमपुर में फिलहाल जन-जीवन एकदम सामान्य है और हमारी हालात पर पैनी निगाह बनी हुई है।”
धार के जिलाधिकारी प्रियंक मिश्रा ने बताया कि स्थानीय लोगों को भरोसे में लेने के बाद ही यूनियन कार्बाइड के कचरे के निपटान को लेकर आगामी कदम उठाया जाएगा।
स्थानीय लोगों का दावा है कि 2015 के दौरान पीथमपुर में परीक्षण के तौर पर यूनियन कार्बाइड के 10 टन कचरे को नष्ट किया गया था, जिसके बाद आस-पास के गांवों की मिट्टी, भूमिगत जल और जल स्रोत प्रदूषित हो गए।
तारपुरा गांव के बोकनेश्वर मंदिर के पास रहने वाले अजय ने एक बेहद प्रदूषित कुआं दिखाते हुए बताया, “पहले पूरा गांव इस कुएं का पानी पीता था लेकिन अपशिष्ट निपटान इकाई शुरू होने के बाद इस कुएं का पानी किसी भी उपयोग के लायक नहीं रह गया।”
उन्होंने कहा, “यूनियन कार्बाइड कारखाने के जहरीले कचरे से पीथमपुर को बख्श दिया जाए। यह कचरा कहीं और नष्ट किया जाए।”
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने तीन दिसंबर को इस कचरे को स्थानांतरित करने के लिए चार सप्ताह की समय-सीमा तय की थी।
अदालत ने सरकार को चेतावनी भी दी थी कि अगर उसके निर्देश का पालन नहीं किया गया, तो अवमानना की कार्यवाही की जाएगी।
यूनियन कार्बाइड कारखाने के जहरीले कचरे के निपटारे की योजना के खिलाफ पीथमपुर में विरोध प्रदर्शन के दौरान शुक्रवार को दो लोगों द्वारा आत्मदाह के प्रयास की घटना के बाद प्रदेश सरकार ने देर रात आपात बैठक बुलाई।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश सरकार ने फैसला किया है कि वह जन भावनाओं का आदर करते हुए उच्च न्यायालय को समस्त परिस्थितियों एवं व्यावहारिक कठिनाइयों के बारे में अवगत कराएगी।
भोपाल में दो और तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ था। इससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग अपंग हो गए थे। इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक माना जाता है।
भाषा हर्ष