यूनियन कार्बाइड अपशिष्ट निपटान: पीथमपुर में विरोध प्रदर्शन,दो लोगों ने आत्मदाह का प्रयास किया
सं दिमो संतोष
- 03 Jan 2025, 08:57 PM
- Updated: 08:57 PM
धार (मध्यप्रदेश), तीन जनवरी (भाषा) यूनियन कार्बाइड से 337 टन खतरनाक अपशिष्ट के नियोजित निपटान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहने के बीच शुक्रवार को मध्यप्रदेश के पीथमपुर में दो लोगों ने आत्मदाह का प्रयास किया, जिससे कस्बे में तनाव बढ़ गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, 'पीथमपुर बचाओ समिति' द्वारा आयोजित एक प्रदर्शन का हिस्सा रहे दो लोगों ने अपने ऊपर ज्वलनशील तरल पदार्थ डाला और उसे जलाने की कोशिश की, लेकिन साथी प्रदर्शनकारियों ने आग बुझाने के लिए हस्तक्षेप करके उनके प्रयास को तुरंत विफल कर दिया।
भीड़ की त्वरित प्रतिक्रिया ने संभवतः एक त्रासदी को टाल दिया और बाद में घटनास्थल पर मौजूद लोगों और पुलिस अधिकारियों द्वारा पीड़ितों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यह विरोध प्रदर्शन इंदौर से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित में खतरनाक सामग्रियों को स्थानांतरित करने के सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में लोगों की चिंताओं से उपजा है।
धार के पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह ने पीथमपुर बस अड्डे के पास एक विरोध स्थल से फोन पर ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनावपूर्ण है।
एसपी ने बताया कि आत्मदाह का प्रयास करने वाले दो लोगों को स्थानीय अस्पताल से इंदौर के एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां चिकित्सकों ने पुष्टि की कि वे खतरे से बाहर हैं।
पीथमपुर बचाओ समिति द्वारा दिए गए बंद के आह्वान के बीच शहर के कई हिस्सों में दिनभर विरोध प्रदर्शन जारी रहा, जिसमें भीड़ ने उस औद्योगिक इकाई की ओर मार्च किया, जिसमें कचरे को जलाया जाना है। एक अन्य आंदोलन में बच्चों ने भी भाग लिया।
पीथमपुर की आबादी करीब 1.75 लाख है और इसके औद्योगिक क्षेत्र में तीन सेक्टरों में करीब 700 कारखाने हैं।
शहर में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जिला अधिकारी प्रियंक मिश्रा और पुलिस अधीक्षक सिंह ने दो अलग-अलग वीडियो जारी किए, जिसमें लोगों से शांति बनाए रखने और कानून को अपने हाथ में न लेने का अनुरोध किया गया है। इसके साथ ही लोगों से कहा गया कि प्रशासन उनकी मांगों को सुनने के लिए तैयार है।
दोनों शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार के लिए लोगों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि शांति भंग करने की कोशिश करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।
‘पीथमपुर बचाओ समिति’ द्वारा आहूत बंद के तहत दुकानें और बाजार बंद रहे। ‘पीथमपुर बचाओ समिति’ का दावा है कि भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े कचरे को जलाने की योजना से स्थानीय निवासियों और क्षेत्र के पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा।
धार के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत सिंह बकरवाल ने विरोध प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी की पुष्टि की।
वर्ष 1984 में दो और तीन दिसंबर की दरमियानी रात को भोपाल में यूनियन कार्बाइड कीटनाशक कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का स्राव हुआ था, जिससे कम से कम 5,479 लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग गंभीर और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।
अधिकारियों ने वैज्ञानिक निपटान के लिए कार्बाइड कारखाने से 337 टन कचरे को पीथमपुर स्थानांतरित कर दिया है, हालांकि इस कदम के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
भोपाल से सामग्री बृहस्पतिवार को पीथमपुर में एक भस्मीकरण इकाई में पहुंच गई। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक समूह ने आयशर मोटर्स के पास सड़क जाम कर दी, लेकिन पुलिस ने उन पर काबू पा लिया और हल्के लाठीचार्ज के बाद सामान्य स्थिति बहाल कर दी।
रामकी समूह के औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन प्राइवेट लिमिटेड के परिसर में 500-600 लोगों की भीड़ पहुंची, जहां कचरे को जलाया जाना है। लेकिन पुलिस ने समय रहते उन्हें तितर-बितर कर दिया।
इस बीच, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पीथमपुर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
बस अड्डे पर बृहस्पतिवार से भूख हड़ताल पर बैठे संदीप रघुवंशी ने कहा कि पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड कचरे के निपटान के खिलाफ उनके विरोध के प्रति बड़ी संख्या में लोगों ने एकजुटता व्यक्त की है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने तीन दिसंबर को उच्चतम न्यायालय सहित अदालती निर्देशों के बावजूद भोपाल में यूनियन कार्बाइड के परिसर को खाली नहीं करने के लिए अधिकारियों को फटकार लगाई थी।
यह देखते हुए कि गैस त्रासदी के 40 साल बाद भी अधिकारी ‘निष्क्रियता की स्थिति’ में हैं, मप्र उच्च न्यायालय ने कचरे को हटाने के लिए चार सप्ताह की समय सीमा तय की है।
उच्च न्यायालय ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उसके निर्देश का पालन नहीं किया गया तो वह अवमानना कार्यवाही करेगा।
इस बीच, कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पीथमपुर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बृहस्पतिवार को “संदेह करने वालों” को संबोधित करते हुए कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कचरे में 60 प्रतिशत मिट्टी और 40 प्रतिशत नेफ्थॉल शामिल है जिसका उपयोग कीटनाशक मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) बनाने के लिए किया जाता है और यह ‘बिल्कुल हानिकारक नहीं है’’।
भाषा सं दिमो