बांग्लादेश में उथल-पुथल से भाजपा के सदस्यता अभियान को मिला बल
अमित मनीषा अविनाश
- 01 Jan 2025, 04:09 PM
- Updated: 04:09 PM
(प्रदीप तापदार)
कोलकाता, एक जनवरी (भाषा) बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के चलते भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई के सदस्यता अभियान को बल मिला है, जब पार्टी एक करोड़ के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही है।
सीमा के उस ओर अल्पसंख्यक समुदाय पर हमलों ने भाजपा को ऐसे समय में लोगों का समर्थन हासिल करने का मौका प्रदान किया है, जब वह संगठनात्मक खामियां, आंतरिक कलह और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राजनीतिक प्रभुत्व द्वारा उत्पन्न चुनौतियों का मुकाबला करना चाहती है।
टीएमसी और भाजपा दोनों ही 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक विमर्श को आकार देने के लिए बांग्लादेश मुद्दे का इस्तेमाल कर रही हैं।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति में हिंदू अल्पसंख्यकों को नुकसान उठाना पड़ा है। वहां उथल-पुथल से (यहां पार्टी के) सदस्यता अभियान में तेजी आयी है क्योंकि लोग भाजपा को स्थिरता सुनिश्चित करने में एकमात्र सक्षम पार्टी के रूप में देखते हैं और तृणमूल कांग्रेस के शासन में इसी तरह की घटनाओं को लेकर भयभीत हैं, जिसे अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के लिए जाना जाता है।’’
भाजपा के शीर्ष नेताओं ने पिछले एक महीने से पश्चिम बंगाल में आक्रामक अभियान चलाया हुआ है, जिसका मुख्य जोर बांग्लादेश में हिंदुओं की ‘दुर्दशा’ है। उन्होंने टीएमसी पर वोट बैंक की राजनीति के तहत जिहादियों और कट्टरपंथियों को पनाह देने का आरोप लगाया है।
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने रैलियों में कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल का भविष्य टीएमसी शासन के तहत दांव पर है। अगर हम टीएमसी को तुष्टीकरण की राजनीति जारी रखने देते हैं, तो हम उसी संकट को आमंत्रित कर रहे हैं जो हम बांग्लादेश में देख रहे हैं। भाजपा ही एकमात्र पार्टी है जो हमारे लोगों को सही मायने में सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है।’’
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, ‘‘बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और हिंदू समुदाय की सुरक्षा पर केंद्रित ये जोशीले भाषण पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने और सदस्यता अभियान को गति देने के उद्देश्य से दिए गए हैं। इन भाषणों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, क्योंकि युवा बड़ी संख्या में सदस्यता ले रहे हैं, खासकर सीमावर्ती जिलों में।’’
भाजपा टीएमसी पर सीमापार सताए गए हिंदुओं की पीड़ा को नजरअंदाज करने का आरोप लगा रही है।
भाजपा सांसद एवं महासचिव ज्योतिर्मय सिंह महतो ने कहा, ‘‘बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले सीधे तौर पर बंगाल को प्रभावित करते हैं। बंगाल में हिंदू जानते हैं कि जब तक भाजपा यहां है, वे सुरक्षित हैं, क्योंकि टीएमसी के भरोसे रहने पर उनका भी बांग्लादेश जैसा ही हश्र होगा।’’
भाजपा ने इस संकट को संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को आगे बढ़ाने के अपने प्रयास से जोड़ा है, जिसमें बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में सताये गए अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का वादा किया गया है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 27 अक्टूबर को कोलकाता के अपने दौरे में एक करोड़ सदस्यता का लक्ष्य रखा था, जिसका उद्देश्य पश्चिम बंगाल में भाजपा के संगठनात्मक आधार को मजबूत करना था। हालांकि, पार्टी अभी लक्ष्य से काफी दूर है, दिसंबर के आखिरी सप्ताह में लगभग 35 लाख सदस्य बने हैं, जबकि अभियान की समय सीमा जनवरी 2025 के पहले सप्ताह तक बढ़ा दी गई है।
भाजपा सूत्रों ने संकेत दिया कि इनमें से आधी संख्या सदस्यों की सदस्यता के नवीनीकरण से संबंधित है, जो नये सदस्यों को आकर्षित करने में चुनौतियों को दर्शाता है।
मजूमदार ने कमी को स्वीकार किया लेकिन इस बात पर जोर दिया कि सदस्यता के आंकड़े 2019 से बेहतर हैं जब पार्टी ने 13-15 लाख सदस्य बनाये थे।
मजूमदार ने कहा, ‘‘संगठनात्मक कमियां रही हैं और टीएमसी की भय की राजनीति ने लोगों को (पार्टी के साथ) जुड़ने से हतोत्साहित किया है। हमें उम्मीद है कि हम आधी संख्या पार कर लेंगे। एक करोड़ सदस्यता का लक्ष्य इसलिए रखा गया था ताकि हम पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन कर सकें, जो हमने किया है।’’
वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने पार्टी की सदस्यता में कमी के लिए कमजोर संगठनात्मक ढांचे को जिम्मेदार ठहराया। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, "हमारे कार्यकर्ता प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उनका समर्थन करने के लिए मजबूत ढांचे के बिना, लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचना चुनौतीपूर्ण है।’’
घोष के कार्यकाल के दौरान पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनावों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया था।
सदस्यता अभियान के खराब प्रदर्शन ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का निराश किया है।
पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना के प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल ने हाल की बैठकों में कथित तौर पर निराशा व्यक्त की, जिसमें पुरुलिया, बांकुरा, बीरभूम, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, झाड़ग्राम, पूर्वी और पश्चिम मेदनीपुर जैसे प्रमुख जिलों में खराब प्रदर्शन को रेखांकित किया गया।
इस कमी को दूर करने के लिए, भाजपा ने बूथ अध्यक्षों के लिए अपने लक्ष्य को संशोधित किया, लेकिन समायोजन से सीमित सफलता मिली है। केवल कुछ संगठनात्मक जिलों- नदिया उत्तर, नदिया दक्षिण, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार, अलीपुरद्वार, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर ने अच्छा प्रदर्शन किया है।
भाजपा की राज्य महासचिव अग्निमित्रा पॉल ने कहा, ‘‘टीएमसी ने भय का माहौल बनाया है, जहां भाजपा का समर्थन करने वालों को हिंसा, सामाजिक बहिष्कार और यहां तक कि आजीविका के नुकसान की धमकी दी जाती है। इन चालों के बावजूद, भाजपा अपना आधार मजबूत करने और बंगाल के लोगों की खातिर लड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित है।’’
टीएमसी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "बंगाल के लोगों को भाजपा पर कोई भरोसा नहीं है। भाजपा की सदस्यता लक्ष्य को पूरा करने में विफलता इसकी घटती अपील के कारण है। लोग एक पार्टी से खुद को दूर कर रहे हैं क्योंकि उनकी नीतियां बंगाल विरोधी हैं।’’
राजनीतिक विश्लेषक बिस्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘बांग्लादेश मुद्दा वास्तव में भाजपा को अपने हिंदू समर्थन आधार को मजबूत करने में मदद करेगा। लेकिन अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले उसे अपने संगठनात्मक खामियों को ठीक करने की जरूरत है।’’
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद से, बंगाल भाजपा आंतरिक कलह, संगठनात्मक कमियों से जूझ रही है, जिसके कारण कई विधायक और दो सांसद टीएमसी में चले गए, केवल सांसद अर्जुन सिंह ही भाजपा में वापस आए।
भाषा अमित मनीषा