भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे को पीथमपुर में नष्ट करने पर रोक के लिए चिकित्सकों ने दायर की याचिका
हर्ष नोमान
- 30 Dec 2025, 08:39 PM
- Updated: 08:39 PM
इंदौर, 30 दिसंबर (भाषा) वर्ष 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन जहरीले कचरे को इंदौर के पास पीथमपुर की एक औद्योगिक अपशिष्ट निपटान इकाई में नष्ट किए जाने की कवायद पर तुरंत रोक लगाए जाने की गुहार लगाते हुए चिकित्सकों के एक समूह ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में सोमवार को जनहित याचिका दायर की।
याचिका में आशंका जताई गई है कि जहरीले कचरे को पीथमपुर में एक निजी कंपनी द्वारा संचालित जा रही इकाई में नष्ट किए जाने से इस औद्योगिक कस्बे और इससे करीब 30 किलोमीटर दूर इंदौर के नागरिकों के साथ ही आबो-हवा पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में यह याचिका ऐसे वक्त दायर की गई है, जब जहरीले कचरे को भोपाल से पीथमपुर भेजकर इसे नष्ट किए जाने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।
उच्च न्यायालय की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ ने भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद भी यूनियन कार्बाइड कारखाने के जहरीले कचरे का निपटारा नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए तीन दिसंबर को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि इस कचरे को तय अपशिष्ट निपटान इकाई में चार हफ्तों के भीतर भेजा जाए।
यह कचरा सूबे की राजधानी में स्थित यूनियन कार्बाइड कारखाने में पड़ा है जहां दो और तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात जहरीली गैस ‘मिथाइल आइसोसाइनेट’ का रिसाव हुआ था। दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदियों में गिनी जाने वाली इस घटना में 5,479 लोगों की मौत हो गई थी और पांच लाख से अधिक लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और दीर्घकालिक विकलांगताओं से पीड़ित हो गए थे।
इंदौर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति (एमजीएम) चिकित्सा महाविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों के संगठन के अध्यक्ष डॉ. संजय लोंढे और कैंसर के दो चिकित्सकों- डॉ. एसएस नैयर और डॉ. विनीता कोठारी की उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका में भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे के निपटान की योजना को लेकर प्रदेश सरकार की तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं के वकील अभिनव पी. धनोदकर ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ को बताया,"इस जनहित याचिका पर सुनवाई की संभावित तारीख नौ जनवरी तय की गई है, लेकिन हमने उच्च न्यायालय से गुहार लगाई है कि वह विशेष पीठ गठित करके इस याचिका पर तुरंत सुनवाई करे।"
याचिका में दावा किया गया है कि अलग-अलग चिकित्सकों, विशेषज्ञों और अनुसंधानकर्ताओं ने इशारा किया है कि पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में जहरीला कचरा नष्ट किए जाने पर इस औद्योगिक कस्बे के साथ ही इंदौर के नागरिकों में कैंसर और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है और "प्रदेश सरकार द्वारा इस खतरे की अनदेखी नहीं की जा सकती।"
याचिका में यह भी कहा गया है कि इस इकाई में कचरा नष्ट किए जाने का बड़ा फैसला किए जाने से पहले पीथमपुर और इंदौर के स्थानीय निकायों और बाशिंदों को भरोसे में नहीं लिया गया ।
याचिका में कहा गया कि प्रदेश सरकार ने कचरे को नष्ट किए जाने की योजना के बारे में कोई सुरक्षा परामर्श जारी नहीं किया है और स्थानीय नागरिकों को यह भी पता नहीं है कि कचरे के निपटान के दौरान कोई दुर्घटना होने की स्थिति में हालात पर किस तरह नियंत्रण पाया जाएगा।
याचिका में यह दावा भी किया गया कि 1,250 छोटे-बड़े कारखानों वाले पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में ‘‘उचित सरकारी अस्पताल’’ नहीं है।
याचिका में गुहार लगाई गई है कि भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे को पीथमपुर भेजने और वहां की अपशिष्ट निपटान इकाई में इसे नष्ट किए जाने की योजना पर तुरंत रोक लगाई जाए। इसके साथ ही, उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक न्यायिक समिति बनाकर पीथमपुर और इसके आस-पास के स्थानों के नागरिकों और आबो-हवा पर कचरे के निपटारे से होने वाले आशंकित प्रभावों का आकलन किया जाए।
याचिका में कहा गया है कि इस आकलन रिपोर्ट के आधार पर अदालत भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे के निपटान के बारे में फैसला करे।
भाषा हर्ष