जब मनमोहन सिंह की बुश के लिए की गई टिप्पणी, 'भारत के लोग आपसे बहुत प्यार करते हैं' से खलबली मच गई
संतोष पवनेश
- 27 Dec 2024, 06:33 PM
- Updated: 06:33 PM
(जी सुधाकर नायर)
नयी दिल्ली, 27 दिसंबर (भाषा) मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री के रूप में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश की तारीफ करते हुए उनसे कहा कि ‘‘भारत के लोग आपसे बहुत प्यार करते हैं।’’
मनमोहन सिंह ने 25 सितंबर, 2008 को व्हाइट हाउस के ओवल कार्यालय में बुश से 40 मिनट की मुलाकात के बाद उनकी प्रशंसा में यह बात कही थी। वह ऐतिहासिक भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते सहित कई द्विपक्षीय पहलों को शुरू करने में बुश की ‘महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक’ भूमिका का उल्लेख कर रहे थे।
उस समय वाशिंगटन में बादल छाए थे और बारिश का मौसम था, लेकिन व्हाइट हाउस के अंदर दोनों नेताओं की प्रेस से आठ मिनट की बातचीत पूरी तरह गर्मजोशी से भरी थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने कई मौकों पर एक-दूसरे की प्रशंसा की और सौहार्द की भावना प्रकट की।
लेकिन सिंह द्वारा बुश की प्रशंसा, जिसे एक व्यापक घोषणा के रूप में देखा गया, ने खलबली मचा दी।
मनमोहन सिंह का बृहस्पतिवार रात निधन हो गया। वह 92 साल के थे।
ऐतिहासिक असैन्य परमाणु समझौते के फलस्वरूप परमाणु व्यापार में भारत का 34 वर्ष का एकांतवास खत्म हो गया।
परमाणु समझौते पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग)-एक, सरकार से समर्थन वापस लेने वाले वामपंथियों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों ने सिंह द्वारा की गई बुश की प्रशंसा की आलोचना की थी। वहीं, भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को भारत के लिए 21वीं शताब्दी की ‘सबसे बड़ी’ घटना बताने वाली कांग्रेस ने खुद को ‘बैकफुट’ पर पाया।
भारत के विदेशी संबंधों पर अमिट छाप छोड़ने वाले सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘भारत के लोग आपसे बहुत प्यार करते हैं और आपने दोनों देशों को एक-दूसरे के करीब लाने के लिए जो कुछ भी किया है, वह कुछ ऐसा है जिसे इतिहास ...।’’ इस संवाददाता सम्मेलन में यह संवाददाता भी मौजूद थे।
सिंह के साथ उत्कृष्ट संबंध रखने वाले बुश ने प्रधानमंत्री को बताया कि कैसे वह उनकी मित्रता और उनके नेतृत्व के प्रशंसक हैं।
बुश ने कहा, ‘‘मैं आपकी दोस्ती और आपके नेतृत्व की सराहना करता हूं।’’
इसके बाद राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘आपने और मैंने, अपने देशों के बीच संबंधों को बदलने के लिए कड़ी मेहनत की है। भारत अविश्वसनीय रूप से उज्ज्वल भविष्य वाला एक महान देश है, और भारत के साथ अच्छे, मजबूत रणनीतिक संबंध रखना अमेरिका के हित में है। और हमने इसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की है।’’
जुलाई 2005 में शुरू किए गए असैन्य परमाणु समझौते पर बात करते हुए बुश ने सिंह से कहा, ‘‘इसमें हम दोनों पक्षों के स्तर पर बहुत काम करना पड़ा है, आपके स्तर पर बहुत साहस दिखाया गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कुल मिलाकर, हमारा रिश्ता राष्ट्र के स्तर पर और व्यक्तिगत स्तर पर बहुत मजबूत है, और मैं आपके दौरे की सराहना करता हूं।’’
प्रधानमंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ‘‘जब इतिहास लिखा जाएगा, तो मुझे लगता है कि यह दर्ज किया जाएगा कि राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने दोनों लोकतंत्रों को एक-दूसरे के करीब लाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।’’
भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को सुनिश्चित करने को लेकर अटूट प्रतिबद्धता के लिए मनमोहन सिंह को याद किया जाएगा। सिंह ने बुश से कहा कि उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापक परिवर्तन लाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
एक अन्य बिंदु पर परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की छूट के बाद परमाणु प्रतिबंधात्मक शासन कैसे समाप्त होगा, इसका जिक्र करते हुए सिंह ने कहा, ‘‘34 वर्षों से भारत परमाणु रंगभेद से पीड़ित है। हम परमाणु सामग्री,परमाणु संबंधी कच्चे माल और परमाणु रिएक्टरों का व्यापार करने में सक्षम नहीं हैं। जब यह प्रतिबंधात्मक शासन समाप्त हो जाएगा तो मुझे लगता है कि इसका बहुत बड़ा श्रेय राष्ट्रपति बुश को जाएगा। इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं, श्रीमान राष्ट्रपति।’’
एक साल बाद बुश ने अपनी भारत यात्रा के दौरान फिर से सिंह की प्रशंसा की। बुश ने जनवरी 2009 में पद छोड़ा था।
दिल्ली में 31 अक्टूबर, 2009 को ‘एचटी लीडरशिप शिखर सम्मेलन’ में उन्होंने कहा, ‘‘मैं वास्तव में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पसंद करता हूं। प्रधानमंत्री एक बुद्धिमान नेता हैं।’’
मार्च 2006 में राष्ट्रपति के रूप में यहां आने के बाद अपनी दूसरी भारत यात्रा पर बुश ने कहा कि वह यहां वापस आकर ‘सम्मानित’ महसूस कर रहे हैं।
सिंह की ‘भारत के लोग आपसे बहुत प्यार करते हैं’ टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) महासचिव प्रकाश करात ने कहा था, ‘‘हम हमेशा से जानते थे कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राष्ट्रपति बुश से प्यार करते हैं। वह भारत के लोगों को (रिश्ते के) बीच में क्यों ला रहे हैं।’’
माकपा के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब बुश की लोकप्रियता अपने ही देश में इतनी कम है, भारतीय प्रधानमंत्री के लिए ऐसी बात कहना अच्छा संकेत नहीं है।’’
भाजपा भी वाम दलों के साथ ही नजर आई। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘‘मैं बस इतना कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से की गई व्यक्तिगत प्रशंसा भारत की प्रशंसा नहीं बन सकती।’’
कांग्रेस मीडिया प्रकोष्ठ के अध्यक्ष वीरप्पा मोइली को बुश के प्रति प्रधानमंत्री की टिप्पणी का बचाव करने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी।
यह पूछे जाने पर कि सिंह सभी लोगों की ओर से बुश के प्रति उनकी पसंद के बारे में कैसे बोल सकते हैं, मोइली ने कहा कि यह बयान सामान्य तौर पर भारत के ‘सहिष्णु और मिलनसार’ रवैये की अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने कभी नफरत की संस्कृति नहीं अपनाई है। प्रधानमंत्री के ऐसा कहने में कुछ भी गलत नहीं है।’’
भाषा संतोष