हमें इस लड़ाई को जीतने के लिए एकजुट होकर लड़ना होगा : किसान नेता डल्लेवाल
पारुल माधव
- 24 Dec 2024, 09:09 PM
- Updated: 09:09 PM
चंडीगढ़, 24 दिसंबर (भाषा) पंजाब के किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने मंगलवार को कहा कि “इस लड़ाई को जीतने के लिए पूरे देश को एकजुट होकर लड़ना होगा।”
डल्लेवाल (70)केंद्र सरकार पर किसानों की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सहित अन्य मांगों को स्वीकार करने का दबाव बनाने के लिए खनौरी सीमा पर 29 दिन से अनशन कर रहे हैं।
अपने गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए बनाए गए विशेष मंच से किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ का सहारा लेकर किसानों को संबोधित करते हुए डल्लेवाल ने आंदोलन को समर्थन देने वाले लोगों का दिल से आभार जताया।
डल्लेवाल ने लड़खड़ाती आवाज में कहा, “मैं आप सभी को बताना चाहता हूं कि मैं ठीक हूं। हमें यह लड़ाई जीतनी है। यह लड़ाई तभी जीती जा सकेगी, जब पूरा देश एकजुट होकर लड़ेगा।”
लगभग दो मिनट के संबोधन में डल्लेवाल ने कहा, ‘‘मैं चाहता हूं कि सरकार हमें किसी भी कीमत पर यहां से नहीं हटा सके। अगर वह ऐसा नहीं कर पाएगी, तो या तो हम जीत जाएंगे या मर जाएंगे, दोनों में से कोई एक चीज होगी।’’
बाद में कोहाड़ ने कहा कि जब डल्लेवाल ने खुद के ठीक होने की बात कही, तो उनका मतलब था कि वह शारीरिक रूप से कमजोर हो गए होंगे, लेकिन उनके हौसले बुलंद हैं।
डल्लेवाल के स्वास्थ्य पर नजर रखने वाले चिकित्सकों ने उनकी हालत नाजुक बताई है।
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसान दिल्ली कूच से रोके जाने के बाद 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू बॉर्डर और खनौरी सीमा पर डेरा डाले हुए हैं।
डल्लेवाल 26 नवंबर से भूख हड़ताल पर हैं।
छह से 14 दिसंबर के बीच 101 किसानों के एक ‘जत्थे’ ने तीन बार दिल्ली की तरफ कूच करने का प्रयास किया था, लेकिन हरियाणा में सुरक्षाबलों ने उन्हें रोक दिया।
इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की पंजाब इकाई के नेताओं ने एक बैठक की और केंद्र एवं पंजाब सरकार के ‘उदासीन रवैये’ की निंदा करते हुए कहा कि दोनों को अब तक हस्तक्षेप कर देना चाहिए था, क्योंकि डल्लेवाल का स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा है।
एसकेएम नेता प्रेम सिंह भंगू ने कहा कि एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी और ऋण माफी सहित अन्य मांगें पुरानी हैं, जिनके लिए उनका संगठन पहले से ही विभिन्न मंचों पर लड़ रहा था।
केंद्र पर मांगें स्वीकार करने का दबाव बनाने और डल्लेवाल के स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को संबोधित करने के लिए किसान नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से जनवरी के पहले हफ्ते में मुलाकात का समय मांगेंगे।
पंजाब के मोगा में नौ जनवरी को एक रैली के आयोजन की योजना बनाई गई है, जिसमें किसानों से संबंधित विभिन्न मुद्दों को रेखांकित किया जाएगा।
हालांकि, संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि उनकी शंभू बॉर्डर और खनौरी सीमा पर जारी विरोध-प्रदर्शन या पंजाब ‘बंद’ के प्रदर्शनकारी किसानों के आह्वान में शामिल होने की कोई योजना नहीं है।
केंद्र की राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति का जिक्र करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने आशंका जताई कि यह निरस्त कृषि कानूनों को दूसरे रूप में वापस लाने का एक और प्रयास है।
डल्लेवाल के भूख हड़ताल जारी रखने के सवाल पर भंगू ने कहा, “हमने डल्लेवाल की स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद चुप रहने के लिए केंद्र की निंदा की है। हमने पंजाब सरकार की भी निंदा की है। न तो पंजाब के मुख्यमंत्री और न ही उनके मंत्रियों को इसकी चिंता है। केंद्र और पंजाब सरकार को अब तक हस्तक्षेप कर देना चाहिए था।”
भंगू ने कहा, “जब हम हाल ही में पंजाब के राज्यपाल से मिले थे, तो हमने डल्लेवाल के स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की थी। हमने राज्यपाल से कहा था कि केंद्र को हस्तक्षेप करना चाहिए, क्योंकि उनका (डल्लेवाल का) स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है। हमने उन्हें यह भी बताया कि स्थिति अस्थिर है। अगर कोई अप्रिय घटना घटी, तो कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।”
इससे पहले, दिन में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र से ‘जिद’ छोड़ने और प्रदर्शनकारी किसानों के साथ बातचीत करने का आग्रह किया था।
भाषा पारुल