विविधता से एकता की ओर: मणिपुर पुलिस के जवानों ने साथ मिलकर सेवा का लिया संकल्प
आशीष माधव
- 24 Dec 2024, 05:09 PM
- Updated: 05:09 PM
(त्रिदीप लाहकर)
डेरगांव (असम), 24 दिसंबर (भाषा) एक साथ खाना खाने से लेकर मैदान में दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद हल्के-फुल्के पलों को साझा करने तक, मणिपुर पुलिस के विभिन्न समुदायों से करीब 2,000 नवनियुक्त कर्मियों ने असम में अपने साल भर के कठोर प्रशिक्षण के दौरान घुलमिलकर अच्छी यादें बनाईं।
वे अब शांति और प्रेम का संदेश लेकर जातीय संकट का सामना कर रहे अपने राज्य में लौटेंगे। सोमवार को यहां लाचित बड़फुकन पुलिस अकादमी से मेइती, कुकी, नगा, मुस्लिम और अन्य समुदायों के मणिपुर पुलिस के कुल 1,946 रंगरूट स्नातक हुए। इन पुलिसकर्मियों के साथ हिंसा प्रभावित मणिपुर में पुलिस बल को मजबूती मिलेगी।
विभिन्न समुदायों से आए नवनियुक्त कर्मियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ से विशेष बातचीत में एक सुर में कहा कि उन्होंने इस वर्ष जनवरी से भाइयों की तरह प्रशिक्षण लिया है और अब वे संघर्षरत समूहों के बीच शांति और प्रेम का संदेश फैलाने के लिए एक साथ मणिपुर की सेवा करने को तैयार हैं।
मेइती समुदाय के एस प्रेमानंद ने कहा, ‘‘हमने यहां एक साथ प्रशिक्षण लिया। कैडेट में मणिपुर में रहने वाले सभी समुदायों के लोग शामिल थे। इनमें मेइती, कुकी, नगा, मुस्लिम, गोरखा और अन्य शामिल थे।’’
असम पुलिस अकादमी में रहने के दौरान कैडेट ने एक साथ गहन शारीरिक प्रशिक्षण लिया। प्रेमानंद ने कहा, ‘‘कभी-कभी हमें अपने माता-पिता और रिश्तेदारों से परेशान करने वाली खबरें मिलती थीं। एक बार जब हम घर लौटेंगे, तो हम मिलकर समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करेंगे। हम सभी अपनी ड्यूटी करने और मणिपुर में एक साथ रहने के लिए तैयार हैं।’’
युवा पुलिसकर्मी ने बताया कि प्रशिक्षु अपने घर पर लोगों की समस्याओं पर चर्चा करते थे। उन्होंने कहा, ‘‘जातीय संघर्ष जल्द से जल्द खत्म होना चाहिए।’’
मेइती समुदाय के एक अन्य कैडेट चिरोम शेखरजीत सिंह ने कहा कि सभी सदस्य एक साथ खाते-पीते, सोते और नहाते थे तथा साथी कुकी रंगरूटों के प्रति किसी भी प्रकार की नफरत नहीं थी तथा मेइती कैडेट को भी उनसे कभी कोई परेशानी नहीं हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘यहां प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न समुदायों के बीच कोई समस्या नहीं थी। प्रशिक्षण के दौरान हमारे घर की समस्याओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ा।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या वह असम से घर लौटने के बाद कुकी कर्मियों के साथ काम करेंगे, सिंह ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि उन्हें कहां तैनात किया जाएगा, लेकिन सरकार द्वारा जहां भी भेजा जाएगा, वहां वह सेवा करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम एक साथ मिलकर अपने राज्य की सेवा करने के लिए तैयार हैं।’’ इसी तरह की भावनाओं को दोहराते हुए, इंडिया रिजर्व बटालियन के कुकी कर्मी पी किपगेन ने कहा कि सभी समुदायों के रंगरूटों ने एक साथ प्रशिक्षण लिया है और मणिपुर लौटने पर वे एक साथ मिलकर सेवा करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं कंगपोकपी जिले का कुकी हूं। हमने मेइती रंगरूटों के साथ प्रशिक्षण लिया और हमें कोई समस्या नहीं हुई। हमने एक साथ अभ्यास किया, एक ही भोजन कक्ष में भोजन किया और एक ही बैरक में सोए। कोई समस्या नहीं थी। मैं यह नहीं कह सकता कि मणिपुर में समस्याएं क्यों हो रही हैं। मेरा दृढ़ विश्वास है कि हमारे राज्य में शांति होनी चाहिए।’’
मणिपुर पुलिस के रंगरूटों के लिए 44 सप्ताह का गहन बुनियादी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम जनवरी में अकादमी में शुरू हुआ। रंगरूटों की पृष्ठभूमि विविधतापूर्ण थी, जिसमें 62 प्रतिशत मेइती, 12 प्रतिशत कुकी और शेष 26 प्रतिशत नगा और अन्य जनजातियों से संबंधित थे।
पासिंग आउट परेड में शामिल मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि सभी नए भर्ती हुए कैडेट, जिनमें मेइती और कुकी समुदाय के सदस्य भी शामिल हैं, शांति वापस लाने के प्रयास में एक ‘‘टीम’’ के रूप में एक साथ तैनात किए जाएंगे।
मणिपुर के एक मुस्लिम कैडेट एमएम जुल्किब मुगल ने कहा कि ये कर्मी पूरे राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं क्योंकि बैच में सभी समुदायों के लोग शामिल थे और उन्होंने एक साथ प्रशिक्षण लिया।
उन्होंने कहा, ‘‘यहां हम एक इकाई के रूप में रहे और मेइती एवं कुकी रंगरूटों के बीच कोई समस्या नहीं हुई। उनके बीच एक बार भी झगड़ा नहीं हुआ। मणिपुर में भी स्थिति सुधर रही है।’’
मुगल ने उम्मीद जताई कि वह मणिपुर पुलिस में अपने साथियों के साथ मिलकर स्थिति को और बेहतर बनाने की पूरी कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपने राज्य में इस तरह की लड़ाइयों की जरूरत नहीं है। हमें एक साथ रहना चाहिए और जितनी जल्दी हो सके शांति वापस आनी चाहिए। अगर इस तरह की झड़पें जारी रहीं तो राज्य का विकास रुक जाएगा।’’
मेइती पुलिस कर्मी कोन्थौजम जिमसन ने कहा कि सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले नए भर्ती हुए रंगरूट एक-दूसरे से भाइयों की तरह प्यार करते हैं, क्योंकि वे एक ही समुदाय में शामिल हुए हैं, जिन्हें ‘पुलिसकर्मी’ कहा जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम एक समुदाय हैं। मैं मणिपुर में अपने कुकी भाइयों के साथ खुशी-खुशी काम करूंगा। हम एक ही समुदाय से हैं और अपनी मातृभूमि भारत के लिए आगे आए हैं। हम सभी एक जैसे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने यहां शांतिपूर्वक जो कुछ भी किया, हम उसे जारी रखेंगे और मणिपुर लौटने के बाद एक-दूसरे से प्यार करेंगे। युवाओं को मेरा संदेश है कि वे हमेशा अपने राज्य को प्राथमिकता दें।’’
कुकी कार्मिक थांगतिनसेई ने कहा कि प्रशिक्षण सकारात्मक था और कैडेट के बीच कोई भेदभाव नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘मैं किसी समुदाय का उल्लेख नहीं करना चाहूंगा, क्योंकि सब कुछ एक टीम के रूप में किया गया। प्रत्येक कर्मी शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार है, और सब कुछ सकारात्मक है। मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि विभिन्न समुदाय एक साथ हैं, और प्रशिक्षण पूरा करना एक बड़ी उपलब्धि थी।’’
पिछले वर्ष मई से इंफाल घाटी स्थित मेइती और समीपवर्ती पहाड़ियों पर स्थित कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
मणिपुर की आबादी में मेइती की हिस्सेदारी करीब 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी नगा और कुकी की आबादी 40 प्रतिशत से कुछ ज्यादा है और वे पर्वतीय जिलों में रहते हैं।
भाषा आशीष