उच्च न्यायालय ने बिना समय गंवाये दाड़ीभीत मामले में जांच एनआईए को सौंपने का आदेश दिया
आशीष मनीषा
- 03 Apr 2024, 05:30 PM
- Updated: 05:30 PM
कोलकाता, तीन अप्रैल (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने उत्तरी दिनाजपुर जिले के दाड़ीभीत उच्च विद्यालय में हिंसा मामले में बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार से एकल पीठ के आदेश का पालन करने को कहा।
एकल पीठ ने दाड़ीभीत उच्च विद्यालय में हिंसा की घटना में दो युवकों की मौत और अन्य के घायल होने की घटना की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंपने का निर्देश दिया था।
मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवज्ञानम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने एनआईए को जांच स्थानांतरित करने को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त करते हुए एकल पीठ के आदेश पर कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
खंडपीठ ने राज्य को बिना समय बर्बाद किए जांच एनआईए को स्थानांतरित करने के एकल पीठ के आदेश को लागू करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि राज्य की अपील पर फैसले के अनुरूप इसका क्रियान्वयन होगा।
मई 2023 में अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के अतिरिक्त महानिदेशक को एक पत्र के माध्यम से कुछ दस्तावेज उपलब्ध कराने के एनआईए के अनुरोध का अभी तक अनुपालन नहीं किए जाने का संज्ञान लेते हुए अदालत ने सीआईडी को एक सप्ताह के भीतर ऐसा करने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को एकल पीठ के आदेश के अनुसार, फैसले की तारीख से तीन सप्ताह की अवधि के भीतर मृतक के परिवारों और घायलों को उचित मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अपील पर 15 मई को फिर से सुनवाई की जाएगी।
एकल पीठ ने 10 मई, 2023 को फैसला सुनाया था। एकल पीठ ने सितंबर 2018 में उत्तरी दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर में दाड़ीभीत उच्च विद्यालय में विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित गोलीबारी और बमबारी के मामले में दो युवकों की मौत की घटना की एनआईए जांच का आदेश दिया था।
न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा ने पश्चिम बंगाल सरकार को घटना में जान गंवाने वाले दो युवकों के परिवारों और घायलों को दो महीने के भीतर मुआवजा देने का भी निर्देश दिया था।
संस्कृत और उर्दू शिक्षकों की भर्ती को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में कॉलेज के छात्र तापस बर्मन और आईटीआई छात्र राजेश सरकार की मौत हो गई थी।
स्थानीय लोगों ने दावा किया था कि स्कूल को गणित और विज्ञान के लिए शिक्षकों की आवश्यकता है, न कि भाषा विषयों के लिए। घटना के दौरान पुलिस द्वारा गोलीबारी करने के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच राज्य सीआईडी को सौंप दी थी। पुलिस अधिकारियों ने आरोपों से इनकार किया है।
एनआईए के वकील अरुण कुमार मोहंती ने कहा कि चूंकि यह बम विस्फोट का मामला था, इसलिए न्यायमूर्ति मंथा की एकल पीठ के आदेश के अनुसार जांच करने के लिए एनआईए ने राज्य सीआईडी से कुछ दस्तावेज मांगे थे, जो उपलब्ध नहीं कराए गए।
भाषा आशीष