राजस्थान: एलपीजी टैंकर से लगी आग की चपेट में आये ट्रक के चालक ने कूद कर बचाई जान
कुंज जितेंद्र
- 20 Dec 2024, 08:31 PM
- Updated: 08:31 PM
जयपुर, 20 दिसंबर (भाषा) राजस्थान के जयपुर में शुक्रवार तड़के ट्रक की टक्कर लगने से एलपीजी टैंकर में लगी आग की चपेट में आये कई वाहनों में से एक के चालक ने वाहन से कूद कर अपनी जान बचाई।
सुमेर सिंह (40) आम दिनों की ही तरह अजमेर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र की ओर जा रहे थे कि तभी अचानक उन्होंने आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठती हुई देखीं।
सुमेर सिंह ने अचानक उठी आग की लपटों से अपने ट्रक को बचाने के लिए स्टीयरिंग तेजी से बाईं ओर मोड़ा और इससे पहले कि उनका वाहन आग की चपेट में आता उन्होंने छलांग लगाकर अपनी जान बचाई और वहां से भाग निकले।
सुमेर सिंह तो बच गए लेकिन उनका ट्रक पूरी तरह जल कर खाक हो गया। हालांकि, कई अन्य लोग सुमेर सिंह जितने भाग्यशाली नहीं रहे।
इस हादसे में 11 लोगों की मौत हो गयी जबकि 35 से अधिक लोग झुलस गए और उनमें से कई अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं।
यह दिल दहला देने वाला हादसा जयपुर-अजमेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भांकरोटा थाना क्षेत्र में तड़के करीब पांच बजे उस समय हुआ जब एक ट्रक एलपीजी टैंकर से टकरा गया और गैस रिसाव के कारण करीब 300 मीटर का इलाका पल भर में आग के गोले में बदल गया और 37 वाहन इसकी चपेट में आ गए।
हादसा इतना भीषण था कि अग्निशमन के वाहन भी इन जलते वाहनों तक नहीं पहुंच पाये।
कुछ ट्रक राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे खड़े थे और उनके चालक व खलासी अपने-अपने वाहनों में सो रहे थे।
हादसे की चपेट में आई दो बसों में से एक निजी स्लीपर बस थी, जो उदयपुर से जयपुर आ रही थी।
बस में सवार यात्रियों को उतरने का समय ही नहीं मिला जबकि कुछ ट्रकों के चालक और परिचालक अपने वाहनों के पास ही मौजूद थे।
हादसे में बाल-बाल बचे ट्रक चालक सुमेर सिंह बार-बार भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे हैं।
ट्रक चालक सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “मैं तड़के करीब पांच बजे बगरू से अपना ट्रक लेकर विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र जा रहा था। बहुत ठंड थी और मैं सामान्य गति से जा रहा था। अचानक करीब 200 मीटर आगे, मैंने आग का एक बादल देखा। यह बादल बहुत ऊंचा था।”
उन्होंने बताया, ‘‘मुझे एक बार तो ऐसा लगा जैसे मेरे सामने नरक है। मैंने ट्रक को पूरी तरह से बाईं ओर मोड़ दिया और कूदकर भाग गया। जब मैंने कुछ दूर जाकर पीछे देखा तो मुझे आग के अलावा कुछ नहीं दिखाई दिया।”
उन्होंने बताया, “मुझे यह भी नहीं पता कि मैं इस उम्र में कैसे भागा। जब मैं वापस ट्रक की तरफ आया तो तब तक कई वाहनों में आग लग चुकी थी। वहां कई लोग जमा हो गए थे। वे मदद के लिए चिल्ला रहे थे। किसी को नहीं पता था कि क्या हुआ था। अचानक, एक आदमी आग की लपटों से बाहर आया, जल रहा था। उसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। हमारे पास उसकी मदद करने का कोई साधन नहीं था।”
सुमेर सिंह ने बताया कि ज्यादातर पीड़ित लोग ट्रक के चालक और खलासी व बसों में सवार यात्री थे।
उन्होंने बताया कि हादसे के कुछ समय बाद अग्निशमन की गाड़ियां और एंबुलेंस स्थल पहुंची लेकिन शुरू में उन्हें जलते वाहनों के बीच पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
सिंह ने बताया कि कुछ देर बाद जब सूरज की रोशनी आई तो देखा कि एक भी वाहन सही सलामत नहीं बचा था और राजमार्ग पर चारों तरफ जले हुए वाहन ही दिखाई दे रहे थे।
हादसे में घायल छात्र बबलू गुर्जर (21) के भाई शीशराम को जब पुलिस से घटना की सूचना मिली तो वह गुजरात में थे।
करौली जिले का रहने वाले बबलू 15 फीसदी तक झुलस गया।
उन्होंने बताया, “ मुझे सूचना मिली कि मेरा भाई घायल हो गया है। मुझे नहीं पता कि वह कहां जा रहा था और वहां कैसे फंस गया। मैं अभी जयपुर जा रहा हूं।” घटना में घायल 20 वर्षीय फैजान के पिता सलीम ने बताया कि उनका बेटा कल रात बस से किसी काम से जयपुर के लिए निकला था।
उन्होंने बताया कि बस जयपुर पहुंचने वाली थी और मुझे उम्मीद थी कि उसका फोन आएगा कि वह बस से उतर गया है लेकिन अस्पताल से आए फोन ने हमें हिलाकर रख दिया।
सलीम ने तुरंत जयपुर में अपने रिश्तेदारों को सूचित किया, जो अस्पताल पहुंचे और वे अन्य रिश्तेदारों के साथ उदयपुर से जयपुर के लिए रवाना हुए लेकिन ट्रैफिक जाम में फंसने के कारण नहीं पहुंच सके।
फैजान 50 प्रतिशत तक झुलस गया।
हादसे में घायल और हताहत होने वाले ज्यादातर पुरुष हैं। एक स्कूल वैन चालक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि आग की लपटें एक किलोमीटर दूर से दिखाई दे रही थीं और राजमार्ग पर अफरा-तफरी मची हुई थी।
उन्होंने बताया, “जब मैं घटनास्थल के करीब पहुंचा तो मैंने देखा कि लोग जल्दबाजी में भाग रहे थे और मदद के लिए चिल्ला रहे थे। मैंने देखा कि एक व्यक्ति आग की लपटों में घिरा हुआ था। यह एक भयावह दृश्य था। अग्निशमन की दमकल और एंबुलेंस वहां मौजूद थीं, लेकिन शुरुआत में उनके लिए भी घटना स्थल तक पहुंचना मुश्किल था।”
अचानक घटित इस घटना ने सभी को चौंका दिया।
पुलिस की सूचना पर जिला प्रशासन और अस्पताल सतर्क हो गया।
सवाई मान सिंह अस्पताल में सभी चिकित्सकों और नर्सिंग कर्मचारियों को उनके घरों से बुलाया गया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खिवंसर सवाई मान सिंह अस्पताल पहुंचे और चिकित्सकों और अधिकारियों को घायलों के उपचार के लिये आवश्यक निर्देश दिए।
अस्पताल प्रशासन ने पीड़ितों के लिए एक और वार्ड तैयार किया है।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रार्चाय डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया कि प्लास्टिक सर्जरी करने वाले चिकित्सकों की टीम की मदद के लिए अन्य सर्जनों को भी बुलाया गया था।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अस्पताल लाए गए लोगों की हालत बहुत खराब थी।
उन्होंने बताया कि कुछ हड्डियां भी लाई गईं और ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा था।
भाषा कुंज