उप्र कांग्रेस कार्यकर्ता के अंतिम संस्कार में अफरा तफरी; अजय राय के खिलाफ नारेबाजी
अन्य ग्रामीणों ने भी प्रभात से जुड़ी कई यादें साझा कीं।
- 19 Dec 2024, 07:45 PM
- Updated: 07:45 PM
गोरखपुर, 19 दिसंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विरोध प्रदर्शन के दौरान मारे गए 28 वर्षीय कांग्रेस कार्यकर्ता प्रभात पांडे का बृहस्पतिवार को गोरखपुर में उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किए जाने के दौरान उस समय अफरा-तफरी फैल गई जब प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अजय राय की मौजूदगी पर लोगों ने नाराजगी जाहिर की।
कांग्रेस ने प्रभात पांडेय के सम्मान में पार्टी राज्य मुख्यालय पर शोक सभा आयोजित की।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक स्थानीय लोगों ने “अजय राय वापस जाओ”, “हत्यारे दल वापस जाओ” और “राहुल गांधी मुर्दाबाद, प्रियंका गांधी मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए जिसके बाद तनाव बढ़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
प्रभात के पड़ोसी निखिलेश ने बताया कि प्रभात के शव को अंतिम संस्कार से पहले उसके घर लाया गया जिससे परिवार में कोहराम मच गया। उसके शोकाकुल पिता दीपक पांडे ने कहा, “यह मेरे कर्मों का फल है। मेरा इकलौता बेटा चला गया।”
अंतिम संस्कार स्थल पर प्रभात की मां बेहोश हो गईं।
निखिलेश ने बताया कि जब अजय राय ने श्रद्धांजलि देने का प्रयास किया तो स्थिति और बिगड़ गई। गुस्साए ग्रामीणों ने उन पर राजनीतिक लाभ के लिए इस त्रासदी का फायदा उठाने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने चिल्लाते हुए कहा, “यहां कोई ड्रामा नहीं” और राय को चिता के पास जाने से रोक दिया।
भीड़ को शांत करने के प्रयास में राय ने अपना जनेऊ दिखाया और कहा, “मैं भी ब्राह्मण हूं, सच्चा 24 कैरेट का।” अन्य कांग्रेस नेताओं की लगातार अपील के बाद उन्हें अनिच्छा से श्रद्धांजलि देने की अनुमति दी गई।
बुधवार को प्रभात की मौत को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया है। शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दिल का दौरा पड़ने का हवाला दिया गया है, लेकिन प्रभात के परिवार को साजिश का संदेह है।
प्रभात के चाचा मनीष पांडे की शिकायत के आधार पर लखनऊ के हुसैनगंज थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे समेत कांग्रेस नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “उत्तर प्रदेश में एक बार फिर लोकतंत्र और संविधान की हत्या हुई है। कांग्रेस के बहादुर शेर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।”
अजय राय ने इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “यह मौत नहीं, बल्कि हत्या है। प्रभात ने अपने साथियों को बताया था कि पुलिस ने उसे पीटा और फिर बेहोश हो गया।”
युवा कांग्रेस के सक्रिय सदस्य प्रभात लखनऊ में अपने चाचा के साथ रहते थे और कंप्यूटर कोर्स कर रहे थे। उनके दादा सेवानिवृत्त डाक कर्मचारी हैं, इस घटना के बाद से वह सदमे में हैं। परिवार ने उनकी मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उनके चाचा मनीष पांडे ने सवाल उठाया था, “अगर प्रभात कांग्रेस कार्यालय में दो घंटे तक बेहोश रहा, तो उसे पहले अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया?”
उत्तर प्रदेश विधानसभा के पास कांग्रेस के प्रदर्शन में शामिल पार्टी के कार्यकर्ता प्रभात की बुधवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पार्टी ने ‘पुलिस बर्बरता’ के कारण कार्यकर्ता की मौत होने का दावा किया है। वहीं, इस मामले में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गोरखपुर निवासी 28 वर्षीय प्रभात पांडे को कांग्रेस कार्यालय से अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था।
इस बीच, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने पांडे की मौत के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ''यह मौत नहीं, बल्कि हत्या है। प्रभात ने अपने साथियों से कहा कि पुलिस ने उसे पीटा था।''
राय ने एक बयान में कहा, ''बेशर्म, असंवेदनशील योगी सरकार हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाकर और दूसरों पर आरोप लगाकर अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश करती रही है।''
राय ने कहा, ''हमें अपने दिवंगत साथी स्वर्गीय प्रभात पांडे के अंतिम संस्कार में शामिल होने से रोकना बेहद असंवेदनशील कदम है।''
राय ने सरकार पर राजनीतिक असहमति को व्यक्तिगत हमलों में बदलने का आरोप लगाते हुए कहा, ''विपक्षी नेताओं को दुश्मन मानना लोकतंत्र की हत्या और राजनीतिक मूल्यों पर हमला है।''
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ''यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब स्वर्गीय प्रभात पांडे का अंतिम संस्कार हो रहा था, तब भाजपा समर्थक नारे लगा रहे थे, जिससे मानवता शर्मसार हो रही है। यह भाजपा के नैतिक पतन का चरम है।''
इस बीच, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रभात पांडे के सम्मान में पार्टी राज्य मुख्यालय पर शोक सभा आयोजित की। इसमें कांग्रेस महासचिव अविनाश पांडेय, सचिव सत्यनारायण पटेल और तौकीर आलम, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खबरी और विधायक वीरेंद्र चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
अविनाश पांडेय ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा, ''पुलिस की बर्बरता के खिलाफ संघर्ष के दौरान प्रभात पांडेय की मौत से पूरा कांग्रेस परिवार शोकाकुल है। दुख की इस घड़ी में पूरा कांग्रेस परिवार उनके परिजनों के साथ खड़ा है।''
पांडेय ने न्याय के लिए लड़ाई जारी रखने का संकल्प लेते हुए कहा, ''जब तक जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह नहीं ठहराया जाता, हम चैन से नहीं बैठेंगे।''
उन्होंने राज्य भर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से जिला मुख्यालयों पर शोक सभा आयोजित करने और प्रभात को श्रद्धांजलि देने के लिए स्थानीय स्मारकों पर मोमबत्तियां जलाने का भी आह्वान किया।
इस बीच, प्रभात की मौत से उनका पूरा परिवार बेहद गमजदा है। वहीं, उनके पड़ोसी भी दयालु और मुखर व्यक्ति के रूप में पहचान रखने वाले प्रभात के जाने से गमगीन हैं।
प्रभात के पड़ोसी विक्की पांडेय ने कहा, ''वह मेरे घर के सामने खेलते हुए बड़ा हुआ था। वह शिक्षित था और धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलता था। न्याय और सामाजिक सुधार के लिए प्रभात की प्रतिबद्धता की चर्चा पूरे गांव में होती थी।
अन्य ग्रामीणों ने भी प्रभात से जुड़ी कई यादें साझा कीं।