चुनौतियां कल भी थीं, आज भी हैं लेकिन जनता ने हम पर तीसरी बार भरोसा जताया : भूपेंद्र यादव
मनीषा माधव
- 17 Dec 2024, 04:31 PM
- Updated: 04:31 PM
नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (भाषा) सत्ता पक्ष ने मंगलवार को राज्यसभा में दावा किया कि संविधान की भावना को आगे बढ़ाते हुए उसने लोकसभा और विधानसभाओं में सरकारें बनाईं तथा देश को विकास के पथ पर अग्रसर किया और ‘‘सत्यमेव जयते’’ को चरितार्थ करते हुए जनता ने तीसरी बार उस पर भरोसा कर सत्ता सौंपी है।
राज्यसभा में ‘भारत के संविधान की 75 साल की गौरवशाली यात्रा’ विषय पर चर्चा में भाग लेते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि संविधान बनाते समय कई चुनौतियां सामने थीं और तब संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने उनका जिक्र भी किया था।
उन्होंने कहा ‘‘चुनौतियां आज भी हैं, भले ही उनका रूप बदल गया है। तब हम 35 करोड़ थे और आज 140 करोड़ हो गए हैं। फिर भी संविधान की भावना को आगे बढ़ाते हुए हमने लोकसभा और विधानसभाओं में सरकारें बनाई हैं। हमारी जनता इसके लिए बधाई की पात्र है।’’
उन्होंने कहा कि संविधान की पुस्तिका जेब में रख कर चलने वालों को चुनाव में जनता ने ही जवाब दिया है क्योंकि तब यह दावा किया गया था कि ‘‘हम जीत गए तो हम संविधान बदल देंगे। यह भ्रम दूर हो गया। सत्य लोगों के सामने है। सत्यमेव जयते।’’
मौलिक अधिकारों का जिक्र करते हुए यादव ने कहा कि 75 साल में वह दौर भी आया था जब लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे। उन्होंने कहा कि तब असहमति की आवाजों को कुचला गया था और तत्कालीन सरकार का समर्थन करने वालों को रसूखदार पद दिए गए थे।
कांग्रेस पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए यादव ने कहा कि दिल्ली में 1984 में हुए दंगों की जांच के लिए न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा आयोग बनाया गया जिसने तमाम कांग्रेस नेताओं को क्लीन चिट दे दी थी। उन्होंने कहा कि 0 बाद में न्यायमूर्ति मिश्रा भारत के प्रधान न्यायाधीश, मानवाधिकाार आयोग के अध्यक्ष और राज्यसभा के सदस्य भी बनाए गए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बार बार राज्यों की सरकारें गिराईं और उच्चतम न्यायालय को उसे उसका दायरा बताना पड़ा था। उन्होंने कहा ‘‘आपके ही शासन से हमने सीखा है कि जीत सत्य की होती है यानी सत्यमेव जयते और इसीलिए हमें तीसरी बार जनता ने चुना है।’’
यादव ने कहा ‘‘बीते दस साल में हमने देखा है कि जब भी देश में गौरवशाली मौके आए, कांग्रेस पीछे हटते नजर आई है। संविधान निर्माताओं ने जो मूल सिद्धांत दिया है वह यह है कि विचार विमर्श हो और सबको साथ ले कर चला जाए। ग्रामीण भारत को समृद्ध करने का संविधान निर्माताओं का जो निर्देश है उसी के अनुरूप आज कई योजनाएं ग्रामीण भारत के विकास के लिए हमारी सरकार चला रही है।’’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस आदिवासियों की बात करती है लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने जनजातीय मंत्रालय बनाया।
यादव ने कहा कि संविधान केवल चर्चा की वस्तु नहीं है बल्कि इसे आत्मा के साथ आत्मसात करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने केंद्र और राज्यों के संबंध बेहतर तरीके से हों, इसके लिए संविधान में व्यवस्था दी है। उन्होंने कहा कि कल तिरुचि शिवा ने कहा था कि संसद के द्वार पर मकर द्वार लिखा गया जो उन्हें समझ नहीं आता। उन्होंने कहा ‘‘तमिल डिक्शनरी में मकर शब्द तमिल में ही लिखा है। इसलिए ऐसी बात यहां नहीं करना चाहिए। हम सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं।’’
यादव ने कहा कि वह और उनकी पार्टी देश की सभी प्राचीन भाषाओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस बात को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिये भी आगे बढ़ाया गया है।
उन्होंने कहा कि 75 साल की गौरवशाली यात्रा में यह भी सोचना चाहिए कि विकास की यात्रा को कैसे आगे बढ़ाया जाए और गल्तियों को कैसे सुधारा जाए।
उन्होंने कहा ‘‘बीते दस साल में भारत की गौरवशाली परंपरा का ध्यान रखा गया है और यही वजह है कि नये संसद भवन में तमिलनाडु से राजदंड ला कर रखा गया। कांग्रेस ने तो इस राजदंड को न्याय का प्रतीक मानने के बजाय इसे चलने में मदद करने वाली छड़ी समझा था।’’
कांग्रेस सदस्यों ने इस पर विरोध जताया। कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि राजदंड को लेकर सत्ता पक्ष एक झूठी कहानी फैला रहा है।
सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि सत्ता के हस्तांतरण के दौरान लार्ड माउंट बेटन ने सत्ता हस्तांतरण की परंपरा के बारे में पूछा था। और तब चोल वंश की सत्ता हस्तांतरण की प्रथा के बारे में सी राजगोपालाचारी ने बताया जिसके बाद मद्रास से विमान द्वारा चोल वंश के लोगों को लाया गया जिन्होंने पूरी प्रथा बताई और पूरी परंपरा के साथ पंडित जवाहर लाल नेहरू को राजदंड सौंपा गया था।
इस पर पीठासीन अध्यक्ष राजीव शुक्ला ने उन्हें कहा कि वे इसे सदन में प्रमाणित करें। तब नड्डा ने कहा कि वह सदन में इसे प्रमाणित करेंगे।
यादव ने कहा ‘‘कई बार ऐसे संदर्भ आ जाते हैं। मैं कहना नहीं चाहता लेकिन मैं उच्चतम न्यायालय में वकील था और कांग्रेस ने वहां राम सेतु को लेकर उसके और राम के ही अस्तित्व पर सवाल उठा दिए थे। क्या कांग्रेस उसे प्रमाणित करेगी?’’
तृणमूल कांग्रेस की मौसम नूर ने कहा ‘‘जब स्वतंत्रता की बात की जाती है तो देखना चाहिए कि अंतरधार्मिक विवाहों के लिए किस तरह कानून बना दिए गए। करीब 100 पत्रकारों पर आए दिन हमले हुए हैं। यूएपीए जैसे कानूनों का दुरुपयोग हुआ है।’’
उन्होंने कहा कि हाथरस में दलित महिला से बलात्कार की घटना के बाद पत्रकार सिद्दिकी कप्पन को गिरफ्तार किया गया और वह दो साल जेल में रहे। यह कैसी लिबर्टी है।’’
कांग्रेस की रजनी अशोक राव पाटिल ने कहा ‘‘जब संविधान बना तो इसके लिए काम करने वाले करीब 300 लोगों में 15 महिलाएं थीं जिन्होंने आरक्षण की मांग नहीं की थी। उन्हें लगा था कि धीरे धीरे महिलाओं की राजनीति में संख्या बढ़ेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।’’
उन्होंने कहा कि दूसरे देशों में महिलाओं की राजनीति में भागीदारी है लेकिन भारत में बहुत कम है। उन्होंने कहा ‘‘पहली बार राजीव गांधी ने पंचायती राज विधेयक का सपना देखा और महिलाओं को आरक्षण दिया।’’
पाटिल ने कहा कि 1996 में महिला आरक्षण विधेयक लाया गया था तब भाजपा की उमा भारती ने उस विधेयक के टुकड़े कर दिए थे। उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस में आज तक महिला को अध्यक्ष नहीं बनाया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम ला कर कहा कि अब महिलाओं को आरक्षण मिलेगा लेकिन यह आरक्षण 2029 में मिलेगा। उन्होंने कहा ‘‘यह बीरबल की खिचड़ी है।’’
यूपीपी(एल) के रवंगवरा नरजारी ने बोडो में अपनी बात रखी।
आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा ‘‘मोदी सरकार के कार्यकाल में आर्थिक असमानता चरम पर है। पांच प्रतिशत लोगों के पास देश की 60 फीसदी संपत्ति है। क्या यही मोदी सरकार की समाजवादी भावना और सोच है ?’’
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह पूरे देश में मस्जिदों के अंदर मंदिर खोज रही है।
अन्नाद्रमुक सदस्य डॉ एम थंबीदुरै ने कहा कि हिंदी को लेकर विरोध नहीं है लेकिन तमिल को भी सम्मान दिया जाना चाहिए।
भाषा मनीषा