तमिलनाडु को शत्रु राज्य न समझे केंद्र : द्रमुक
वैभव
- 16 Dec 2024, 07:36 PM
- Updated: 07:36 PM
नयी दिल्ली, 16 दिसंबर (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने केंद्र पर तमिलनाडु के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए सोमवार को सरकार से आग्रह किया कि वह तमिलनाडु को शत्रु राज्य न समझे।
द्रमुक सांसद डी. एम. कथिर आनंद ने ‘वर्ष 2024-25 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगें: प्रथम बैच’ पर लोकसभा में चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार खुद को भले ही किसानों का मसीहा समझती हो और किसान सम्मान निधि योजना में राशि आवंटित करने की बात करती हो, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार आज तक भूमिहीन किसानों का आंकड़ा नहीं जुटा पाई है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार देश का पहला ऐसा राज्य है, जिसने 1989 में किसानों के लिए मुफ्त बिजली योजना शुरू की थी। उन्होंने कहा कि उस वक्त राज्य के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि थे।
उन्होंने मोदी के कार्यकाल में रोजगार सृजन की दर बहुत ही खराब होने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में बेरोजगारी की दर बढ़ती जा रही है।
आनंद ने आग्रह किया कि केंद्र तमिलनाडु को शत्रु राज्य न समझे।
चर्चा में द्रमुक सांसद के. ईश्वरसामी ने भी हिस्सा लिया।
शिवसेना (उबाठा) के अनिल यशवंत देसाई ने विनिर्माण क्षेत्र में विकास दर केवल 2.2 प्रतिशत रहने पर चिंता जताई और कहा कि केवल विनिर्माण ही नहीं बल्कि ज्यादातर क्षेत्रों में विकास दर का कम होना चिंता का विषय है।
उन्होंने देश में बेरोजगारी की समस्या बढ़ने का भी मुद्दा उठाया।
देसाई ने कहा कि सत्ता पक्ष भले ही अपनी पीठ थपथपा ले, लेकिन अर्थव्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने दावा किया था कि किसानों की आय दोगुनी होगी, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका है। उन्होंने बीमा कंपनियों के कर्मचारियों के वेतन बढ़ाये जाने की भी मांग की।
केरल कांग्रेस के सांसद के. फ्रांसिस जॉर्ज ने केरल के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया।
चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के चमाला किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि भाजपा-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ऐसे प्रतीत करा रही है जैसे देश में हर बेहतर काम 2014 में शुरू हुआ हो।
उन्होंने तेलंगाना की बीआरएस सरकार पर लाखों करोड़ रुपये का गबन करने का आरोप लगाया।
उन्होंने देश में किसानों की आत्महत्या के मामले बढ़ने का दावा करते हुए कहा कि किसानों को सरकार ने वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन उनके लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने पिछले दिनों दिल्ली की बाहरी सीमा पर किसानों पर लाठीचार्ज कराये जाने की आलोचना की।
भाषा सुरेश