समाजवादी पार्टी ने किसानों का कर्ज माफ करने की केंद्र से मांग की
सुरेश वैभव मनीषा
- 16 Dec 2024, 05:39 PM
- Updated: 05:39 PM
नयी दिल्ली, 16 दिसंबर (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) ने केंद्र पर किसानों के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का सोमवार को आरोप लगाया और किसानों का कर्ज माफ करने की मांग की।
समाजवादी पार्टी के लालजी वर्मा ने ‘वर्ष 2024-25 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगें-प्रथम बैच’ पर लोकसभा में चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि जब तक देश के अन्नदाता की स्थिति अच्छी नहीं होगी तब तक देश की भी हालत अच्छी नहीं होगी।
उन्होंने सरकार पर फसल बीमा कंपनियों से सांठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने ऐसे तरीके अपनाए हैं, जिससे बीमा कंपनियों को फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को कुछ देना न पड़े, बल्कि उन्हें केवल लाभ ही लाभ प्राप्त हो।
उन्होंने किसानों की ऋण माफी की लंबित मांग का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने बड़ी कंपनियों के 18 लाख करोड़ रुपये माफ कर दिये हैं, लेकिन किसानों का ऋण माफ नहीं किया जा सका है।
वर्मा ने कहा कि किसान परेशान हैं, डीएपी जैसे उर्वरक पर सब्सिडी की आवश्यकता है, लेकिन दाम बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य की लड़ाई लड़ रहा है। हमारे अन्नदाता की हालत अच्छी नहीं होगी तो देश की (भी) हालत अच्छी नहीं होगी।’’
उन्होंने कहा कि किसान की फसल लागत कम करना जरूरी है, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो पा रहा है, कम बजट में विद्युत कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है।
अनुदानों की अनुपूरक मांगों के बारे में उन्होंने कहा कि बजट को लेकर सरकार की तैयारी इतनी अच्छी नहीं रही, अन्यथा कुछ ही महीनों में अनुपूरक मांग की आवश्यकता नहीं पड़ती।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजनीतिक गठबंधन (राजग) सरकार का बजट अच्छा नहीं होने के कारण देश में आर्थिक असमानता बढ़ रही है।
समाजवादी पार्टी के ही सांसद आनंद भदौरिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश में डीएपी की भारी किल्लत है और किसान लाठी खाने को मजबूर हैं।
आम आदमी पार्टी के सांसद गुरमीत सिंह मीत हायर ने कहा कि सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की किसानों की मांग स्वीकार करनी चाहिए।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के सांसद राजाराम सिंह ने कहा कि सरकार को उन वादों को पूरा करना चाहिए, जो उसने किसानों के साथ किए हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए।
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के नेता एन के प्रेमचंद्रन ने अनुदानों की पूरक मांगों का विरोध करते हुए कहा कि सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए कि एमएसएमई क्षेत्र पर खर्च कम क्यों हो रहा है।
उन्होंने कहा कि एमएसएमई के लिए आवंटन 22 हजार करोड़ रुपये था और उसे फिर से संशोधित करके 16 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया।
प्रेमचंद्रन ने कहा कि किसान डीएपी की किल्लत का सामना कर रहे हैं और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस की नेता सयानी घोष ने महंगाई का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘‘पहले लोग जेब में पैसे लेकर जाते थे और थैले में सब्जी लेकर आते थे, लेकिन इस अमृतकाल में लोग थैले में पैसा लेकर बाजार जाते हैं और जेब में आलू तथा टमाटर लाते हैं।’’
उन्होंने दावा किया कि इस सरकार के कारण आज हर हिंदुस्तानी पर सवा लाख रुपये का कर्ज चढ़ गया है।
भाषा सुरेश वैभव