दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ जीआरएपी का तीसरा चरण प्रभावी
धीरज पारुल
- 16 Dec 2024, 09:12 PM
- Updated: 09:12 PM
नयी दिल्ली, 16 दिसंबर (भाषा) दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए केंद्र द्वारा गठित समिति ने प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के कारण वायु गुणवत्ता में आई गिरावट के बीच सोमवार को चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (जीआरएपी) के तीसरे चरण के तहत कई प्रतिबंधों को प्रभावी कर दिया।
शाम चार बजे दर्ज किया जाने वाला दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सोमवार को 379 रहा।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने एक समीक्षा बैठक में रेखांकित किया कि दिल्ली का एक्यूआई सोमवार दोपहर को 350 के स्तर को पार कर गया।
आयोग ने पाया कि हवा की अत्याधिक मंद गति और सतह पर तापमान कम होने की वजह से प्रदूषकों के सतह के नजदीक जमने से एक्यूआई का स्तर और बढ़ सकता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के पूर्वानुमानों से भी संकेत मिलता है कि लगातार प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के कारण वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी के उच्च स्तर पर बनी रह सकती है।
आयोग के आदेश में कहा गया है कि इसलिए, वायु गुणवत्ता को और अधिक खराब होने से रोकने के लिए फैसला किया गया है कि ‘‘13 दिसंबर को जारी आदेश के तहत जीआरएपी के तीसरे चरण के उपायों को पूर्व में लागू पहले और दूसरे चरण के उपायों के साथ पूरे एनसीआर में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा।’’
संशोधित कार्य योजना के अनुसार, जीआरएपी-3 के तहत दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में विद्यालयों को अनिवार्य रूप से पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई ‘हाइब्रिड मोड’ में संचालित करनी होगी। इसमें कहा गया है कि विद्यार्थियों और अभिभावकों के पास ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प चुनने की सुविधा होगी।
जीआरएपी के तीसरे चरण के तहत दिल्ली में बीएस-4 या उससे पुराने मानक वाले डीजल चालित गैर-जरूरी मध्यम आकार के मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-4 या उससे पुराने मानक वाले डीजल चालित गैर-जरूरी हल्के वाणिज्यिक वाहनों को भी शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं है।
पूर्व में ऐसे प्रतिबंध केवल बीएस-3 वाहनों पर ही लागू होते थे।
दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में जीआरएपी-3 के तहत बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल कारों पर लगाए गए प्रतिबंधों से दिव्यांगों को छूट दी गई है।
तीसरे चरण के तहत दिल्ली और एनसीआर में सरकारों को सार्वजनिक कार्यालयों और नगर निकायों के कर्मचारियों के आने-जाने के समय में अंतर रखने का निर्देश दिया गया है। केंद्र सरकार दिल्ली-एनसीआर में केंद्र सरकार के कार्यालयों के लिए भी इसी तरह की व्यवस्था करने का फैसला ले सकती है।
सर्दियों के दौरान, दिल्ली में जीआरएपी के तहत प्रतिबंध लागू किए जाते हैं। इसके तहत वायु गुणवत्ता को चार चरणों में वर्गीकृत किया गया है।
जीआरएपी का पहला चरण एक्यूआई के 201 से 300 के बीच (खराब श्रेणी) होने पर, दूसरा चरण 301 से 400 के बीच (बहुत खराब) होने पर, तीसरा चरण 401 से 450 के बीच (गंभीर) होने पर और चौथा चरण 450 से अधिक (बहुत गंभीर) होने पर लागू होता है।
प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों, वाहनों से निकलने वाले धुएं, पराली जलाने, पटाखे फोड़ने और अन्य स्थानीय प्रदूषण स्रोतों के कारण सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच जाता है।
चिकित्सकों के मुताबिक, दिल्ली की दूषित हवा में सांस लेना प्रतिदिन लगभग 10 सिगरेट पीने के बराबर हानिकारक है।
उनका कहना है कि लंबे समय तक उच्च स्तर के प्रदूषण के संपर्क में रहने से दमा, ब्रोंकाइटिस और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज जैसी श्वसन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं या तथा हृदय रोगों का खतरा नाटकीय रूप से बढ़ सकता है।
भाषा धीरज