राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने वर्ष 2013 से 5.97 करोड़ राशन कार्ड रद्द किए: सरकार
ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र पवनेश
- 10 Dec 2024, 07:26 PM
- Updated: 07:26 PM
नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के ‘उचित लक्ष्य’ को हासिल करने के लिए 2013 से 5.97 करोड़ राशन कार्ड रद्द किए हैं।
राज्यसभा में एक लिखित सवाल के उत्तर में, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री
निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया ने कहा, ‘‘लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस)राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए) के तहत शासित है और केंद्र, राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों की संयुक्त जिम्मेदारी के तहत संचालित होती है।’’
उन्होंने कहा कि अन्य बातों के साथ-साथ राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के अंदर आबंटित खाद्यान्नों का आबंटन करने, पात्र लाभार्थी परिवारों की पहचान करने, उन्हें राशन कार्ड जारी करने, लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन पात्र लाभार्थियों को खाद्यान्नों का वितरण करने, उचित दर दुकानों के जरिए पात्र लाभार्थियों को आबंटित खाद्यान्नों का पर्यवेक्षण करने और उनके कार्य का पर्यवेक्षण करने की प्रचालनात्मक जिम्मेदारी राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों की होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2013 से टीपीडीएस के संचालन में प्रौद्योगिकी के उपयोग के परिणामस्वरूप, यानी राशन कार्ड/लाभार्थी डेटाबेस का डिजिटलीकरण, आधार सीडिंग, डी-डुप्लीकेशन प्रक्रिया, डुप्लिकेट की पहचान, अपात्र रिकॉर्ड, मृत्यु, लाभार्थियों का स्थायी प्रवास, आदि, सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश उचित लक्ष्य प्राप्त करने के लिए 2013 से 2024 (आज तक) के बीच लगभग 5.87 करोड़ राशन कार्ड की छंटनी करने में सक्षम रहे हैं।’’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत उच्च सब्सिडी प्राप्त खाद्यान्न के लिए ग्रामीण आबादी के 75 प्रतिशत तक और शहरी आबादी के 50 प्रतिशत तक के कवरेज का प्रावधान है, इस प्रकार कुल आबादी का लगभग दो-तिहाई कवर किया जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘अधिनियम के तहत कवरेज यह सुनिश्चित करने के लिए काफी अधिक है कि समाज के सभी कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को इसका लाभ मिले। अधिनियम को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है और अधिनियम के तहत लगभग 80.67 करोड़ लाभार्थियों को उनकी पात्रता के अनुसार मुफ्त खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा कि खाद्य असुरक्षा के संबंध में किसी भी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र से कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र