सीरिया में कुछ समय तक अस्थिरता रह सकती है : पूर्व भारतीय राजनयिक
आशीष प्रशांत
- 09 Dec 2024, 10:20 PM
- Updated: 10:20 PM
नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) पूर्व भारतीय राजनयिकों ने सीरिया में कुछ समय के लिए हालात ‘‘अशांत’’ रहने की आशंका जताते हुए यह भी कहा कि अभी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि उस देश में क्या विपक्षी ताकतें एकजुट होंगी और विकास का ‘‘नया अध्याय’’ शुरू करेंगी।
सीरिया में विद्रोही ताकतों द्वारा राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार को उखाड़ फेंकने के एक दिन बाद, भारत ने सोमवार को उस देश में स्थिरता लाने के लिए शांतिपूर्ण और समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया का आह्वान किया।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्वी) रहे अनिल वाधवा का मानना है कि सीरिया में अभी स्थिति ‘‘बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाली है।’’ विद्रोही नेता अबू मोहम्मद अल गोलानी ने कहा है कि वह ‘‘अल्पसंख्यकों का सम्मान’’ करेंगे, लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि उन्हें सही तरह के धर्म का पालन करना होगा। वाधवा ने जोलानी के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि इससे सांप्रदायिक संघर्ष हो सकता है।
पूर्व राजनयिक ने कहा कि सीरिया में इस घटनाक्रम का व्यापक क्षेत्र पर प्रभाव पड़ेगा। वाधवा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि यह ऐसी चीज है जो बहुत जल्दी सुलझ जाएगी। संबंधित पक्ष प्रभावित होंगे और वे विरोध करना शुरू कर देंगे। इसलिए, सीरिया में कहानी का अंत नहीं हुआ है।’’
अमेरिका की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी ‘‘तेल क्षेत्रों पर नियंत्रण करके खुश हैं’’, इसलिए उसने वहां अपने सैनिक भेजे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हालात कुछ समय के लिए अशांत रहने वाला है।’’ हालांकि, वाधवा ने कहा कि सीरिया में जो कुछ हो रहा है, उससे वह ‘‘हैरान नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जिस दिन लेबनान में युद्धविराम हुआ, मुझे अंदाजा हो गया।’’
विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह सीरिया में हो रहे घटनाक्रम पर नजर रख रहा है और साथ ही अरब गणराज्य की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने की दिशा में सभी पक्षों द्वारा काम करने की जरूरत पर जोर दे रहा है।
विद्रोहियों के रविवार को राजधानी दमिश्क पर कब्जा करने के बाद असद की सरकार गिर गई। रूसी सरकारी मीडिया ने बताया कि असद मॉस्को में हैं और उन्हें शरण दी जाएगी। उनके लगभग 14 साल के कार्यकाल में गृहयुद्ध, रक्तपात और उनके राजनीतिक विरोधियों पर क्रूर कार्रवाई की गई।
विद्रोहियों द्वारा सत्ता पर कब्ज़ा करने के कुछ घंटों बाद, रविवार को दिल्ली में आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सीरिया में सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। कई प्रमुख देशों ने भी सीरिया में असद शासन के पतन का स्वागत किया है।
असद शासन के सत्ता से बेदखल होने पर वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रिया के बारे में, वाधवा ने कहा कि जो भी सत्ता संभाले, अगर शासन ‘‘अनुकूल’’ होता है तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं होगी।
असद और उनके परिवार के शासन के बारे में ‘‘क्रूर शासन’’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने वाली कई खबरों के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि ये शब्द ‘‘काफी हद तक दुष्प्रचार और बयानबाजी’’ हैं।
इटली में भारत के पूर्व राजदूत के.पी. फेबियन ने कहा कि सीरिया में यह घटनाक्रम अचानक हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘किसी को नहीं पता था कि यह होने वाला है। 27 नवंबर को तुर्किये सीमा के पास इदलिब पर कब्जा हो गया। 29 नवंबर को अलेप्पो शहर पर कब्जा हो गया।’’
उन्होंने कहा कि सीरियाई सेना के सदस्य ‘‘पीछे हट रहे हैं’’, इसलिए वहां लोग मारे नहीं जा रहे हैं। पूर्व राजनयिक ने कहा कि सीरिया में आम जनता ‘‘खुश लग रही है।’’
हालांकि, फेबियन ने आगाह किया कि विद्रोही ‘‘एकजुट ताकत नहीं हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘क्या ये एक साथ रहेंगे और सीरिया के लिए एकता, विवेक और विकास का एक नया अध्याय खोलेंगे, हमें उम्मीद है कि ऐसा होगा। लेकिन, अभी चीजें अनिश्चित हैं।’’
फेबियन ‘अरब स्प्रिंग दैट वाज एंड वाज़ नॉट’ नामक किताब लिख चुके हैं। फेबियन ने कहा कि अगर सीरिया में शांतिपूर्ण बदलाव होता है तो यह अच्छा होगा। लेकिन, अगर बाद में उनमें झगड़े होंगे तो यह अच्छा संकेत नहीं होगा।
भाषा आशीष