एनएमसी ने अस्पतालों के निरीक्षण के दौरान ‘फर्जी’ मरीजों की पहचान के लिए दिशानिर्देश जारी किए
धीरज आशीष
- 09 Dec 2024, 04:13 PM
- Updated: 04:13 PM
नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने नए संस्थान स्थापित करने या स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की सीट बढ़ाने की मंजूरी देने से पहले चिकित्सा महाविद्यालयों और अस्पतालों का निरीक्षण करने के दौरान ‘फर्जी’ मरीजों की पहचान के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
यह पहली बार है कि आयोग ने इस तरह के दिशानिर्देश जारी किये हैं। ये दिशानिर्देश कुछ चिकित्सा संस्थानों या महाविद्यालयों द्वारा बिस्तरों की उपलब्धता और जांच की आवश्यकता को पूरा करने के लिए फर्जी मरीजों (ऐसे व्यक्ति जिन्हें किसी उपचार की आवश्यकता नहीं है या जिन्हें भर्ती होने की जरूरत नहीं है) को भर्ती करने के मामलों के सामने आने के बाद जारी किए गए हैं।
दिशा-निर्देशों के अनुसार, निरीक्षण के दिन या उससे पहले के दिन बड़ी संख्या में मरीजों का भर्ती होना, एक ही परिवार के कई मरीजों का भर्ती होना या भर्ती हुए ऐसे मरीज जिनमें कोई समस्या नहीं है या मामूली समस्या है, जिनका उपचार ओपीडी के आधार पर मौखिक रूप से लक्षण बताने पर लिखी गईं दवाओं से किया जा सकता है, ‘फर्जी मरीजों’ की पहचान करने का एक मापदंड हो सकता है।
दिशानिर्देश के मुताबिक ऐसे मरीज, जो एक्स-रे, रक्त परीक्षण (भर्ती होने से पहले या बाद में) जैसी किसी जांच के बिना भर्ती हुए हैं या उपचार जो आमतौर पर भर्ती मरीजों के लिए किया जाता है, जैसे अंतःशिरा (आईवी) द्रव, इंजेक्शन, कैथीटेराइजेशन, दवाइयां देना भी एक संकेत हो सकता है।
निरीक्षण करने वालों को अन्य मापदंड पर भी ध्यान में रखना चाहिए कि क्या बाल चिकित्सा वार्ड में भर्ती किए गए बच्चे बिना किसी गंभीर समस्या के चंचल और प्रसन्नचित्त पाए गए हैं या उन्हें निवारक स्वास्थ्य जांच या शिविरों के माध्यम से बड़ी संख्या में भर्ती किया गया है।
एनएमसी ने शैक्षणिक वर्ष 2025-2026 के लिए स्नातक पाठ्यक्रम की पेशकश करने और स्थापित चिकित्सा संस्थानों में स्नातक पाठ्यक्रम की सीट बढ़ाने के इरादे से नए चिकित्सा महाविद्यालय या संस्थान की स्थापना के लिए आवेदन आमंत्रित करते हुए दिशानिर्देश निर्धारित किए हैं।
आयोग ने चेताया है कि ‘फर्जी मरीज की परिपाटी’ को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा और नियमों के अनुसार दंड के लिए कदम उठाए जाएंगे।
भाषा धीरज