यह सही समय है कि भारत राष्ट्रमंडल छोड़ दे : पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल
सुभाष देवेंद्र
- 07 Dec 2024, 11:04 PM
- Updated: 11:04 PM
श्रीनगर, सात दिसंबर (भाषा) पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने शनिवार को कहा कि यह सही समय है कि भारत 56 देशों के समूह राष्ट्रमंडल को छोड़ दे, जिसके ज्यादातर सदस्य ब्रिटिश साम्राज्य के पूर्व उपनिवेश हैं।
यहां दो दिवसीय कश्मीर साहित्य महोत्सव में सिब्बल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल के दौरान भारत ने अपनी विदेश नीति में कुछ ‘‘बड़ी गलतियां’’ कीं, क्योंकि विदेश सेवा में बाहर से प्रमुख पदों पर लोगों को शामिल किया गया था।
यह पूछे जाने पर कि क्या राष्ट्रमंडल में शामिल होने से भारत वैश्विक मामलों में आवश्यकता से अधिक शामिल हो गया, सिब्बल ने कहा कि देश का शामिल होना ‘‘अपरिहार्य’’ था।
उन्होंने कहा, ‘‘एक तरह से, यह अपरिहार्य था क्योंकि हम पहला बड़ा देश थे जो स्वतंत्र हुआ और इस घटनाक्रम के साथ ब्रिटिश साम्राज्य के पतन की शुरुआत हो गई। इसलिए, हम ऐसी स्थिति में थे, जहां हमें उपनिवेशवाद-विरोधी प्रक्रिया का नेतृत्व करना पड़ा।’’
पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि भारत को राष्ट्रमंडल में शामिल नहीं होना चाहिए था और कहा कि देश के लिए समूह से बाहर निकलने का यह सही समय है।
सिब्बल ने कहा, ‘‘अगर आप मुझसे पूछें, तो मैं कहूंगा कि हमें राष्ट्रमंडल का सदस्य नहीं होना चाहिए था। भले ही शुरू में लगा हो कि ऐसा करना उपयोगी होगा, लेकिन अब समय आ गया है कि हम राष्ट्रमंडल से बाहर निकल जाएं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रमंडल से बाहर निकलने से आपको भावनात्मक संतुष्टि मिल सकती है - हम आगे बढ़ चुके हैं, हम ब्रिटेन से भी बड़ी अर्थव्यवस्था हो गए हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी विदेश नीति में कुछ सबसे बड़ी गलतियां नेहरू के समय में हुई थीं। उस समय, इसमें शामिल प्रमुख लोग भारतीय विदेश सेवा से नहीं थे, बल्कि बाहर से भर्ती किए गए थे।’’
उन्होंने कहा कि भारत, अंग्रेजों की सलाह पर कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने के ‘‘जाल में फंस गया’’ और फिर, ‘‘एक शिकायतकर्ता से, हम अपना बचाव करने वाले हो गए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कूटनीति के लिहाज से इससे बदतर कुछ नहीं हो सकता।’’
उन्होंने विदेश नीति की एक और ‘‘गलती’’ की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘हमने तिब्बत को चीन को सौंप दिया।’’
अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान विदेश सचिव के रूप में सेवा देने वाले सिब्बल ने कहा, ‘‘हमारे पास कोई भू-राजनीतिक समझ नहीं थी। हमने तिब्बत को बिना किसी लाभ के उन्हें सौंप दिया...।’’
उन्होंने कहा कि ये दो सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण हैं, जहां भारत की विदेश नीति की गलतियां ‘‘आज तक हमें परेशान करती रही हैं।’’
भाषा सुभाष