तृणमूल कांग्रेस सदस्य ने राज्यसभा में उठाया निजी क्षेत्र में विषाक्त हो रही कार्य संस्कृति का मुद्दा
ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र माधव
- 06 Dec 2024, 06:31 PM
- Updated: 06:31 PM
नयी दिल्ली, छह दिसंबर (भाषा) राज्यससभा में तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने शुक्रवार को काम से संबंधित तनाव के कारण कथित रूप से पेशेवरों की मौत की हालिया घटनाओं को रेखांकित करते हुए सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाने का आग्रह किया कि निजी क्षेत्र में कर्मचारियों के काम करने का माहौल अच्छा हो।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए गोखले ने काम के अत्यधिक दबाव के कारण अन्ना सेबेस्टियन और पत्रकार सतीश नंदगांवकर की मौतों का उल्लेख किया। उनके मुताबिक सेबेस्टियन की मौत कथित तौर पर काम के अत्यधिक दबाव के कारण हुई जबकि कथित विषाक्त हो रही कार्य संस्कृति के कारण नंदगांवकर को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई।
उन्होंने कहा, ‘‘इन दो चौंकाने वाली घटनाओं के बाद, सोशल मीडिया पर शिकायतों की बाढ़ आ गई है। निजी क्षेत्र के लोगों ने मुझे कहा है कि अक्सर एक जहरीली कार्य संस्कृति होती है, जहां कर्मचारियों को लंबे समय तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है और अपमान का शिकार होना पड़ता है। इसमें से बहुत कुछ निजी क्षेत्र में हो रहा है।’’
गोखले ने कहा, ‘‘हम निजी कंपनियों के बारे में बात कर रहे हैं। बंगाल का मतलब है व्यापार। हमारे पास 4.5 लाख से अधिक सक्रिय कंपनियां हैं और अकेले आईटी क्षेत्र 2.6 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है। इसलिए निजी क्षेत्र में सुधार बहुत महत्वपूर्ण है।’’
उन्होंने कहा कि इस साल कॉरपोरेट टैक्स (निगमित कर), इनकम टैक्स (आयकरत्र से कम रहा। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि आयकर देने वाले लोग निजी कंपनियों में काम करने वाले लोग हैं।
गोखले ने भारतीय कंपनियों में ओवरटाइम वेतन के प्रावधान की कमी को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ‘‘भारत में अनुबंधों में ओवरटाइम वेतन का प्रावधान नहीं है। कर्मचारियों से 8-10-12 घंटे काम कराया जाता है। कई कर्मचारी क्लाइंट-फेसिंग भूमिकाओं में काम करते हैं, जहां वे ग्राहकों की सनक के अधीन होते हैं। इसे विनियमित करने के लिए श्रम कानूनों की आवश्यकता है।’’
उन्होंने पश्चिम बंगाल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के लिए रुके हुए धन का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, ‘‘यह जहरीली कार्य संस्कृति और भुगतान... ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें इस सदन को गंभीरता से लेने की जरूरत है। जो लोग कार्यरत हैं उन्हें एक स्वस्थ कार्य संस्कृति की आवश्यकता है और जो लोग काम करते हैं उन्हें भुगतान किया जाना चाहिए।’’
भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र