ओडिशा की ‘मंडिया रानी’ को कृषि में योगदान के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि
आशीष नरेश
- 06 Dec 2024, 04:25 PM
- Updated: 04:25 PM
(सत्यनारायण पटनायक)
कोरापुट (ओडिशा), छह दिसंबर (भाषा) ओडिशा के कोरापुट जिले की 36 वर्षीय आदिवासी महिला रायमती घुरिया को कृषि क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (ओयूएटी) द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है।
‘मंडिया रानी’ या ‘मिलेट क्वीन’ के नाम से मशहूर रायमती ने चावल की 72 किस्मों और मोटे अनाज (ज्वार-बाजरे) की 30 किस्मों का संरक्षण किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को ओयूएटी के 40वें दीक्षांत समारोह में रायमती को डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की।
कोरापुट जिले के नुआगुडा गांव की रायमती पारंपरिक फसलों के संरक्षण में अपने अथक प्रयासों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने विभिन्न किस्म के मोटे अनाज को संरक्षित किया है, जिससे स्वदेशी ज्ञान और जैव विविधता की रक्षा हुई है।
रायमती की यात्रा प्रकृति के साथ सहज जुड़ाव का प्रमाण है। औपचारिक शिक्षा की कमी और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करने के बावजूद, उन्होंने पारंपरिक अनाज को संरक्षित करने का लक्ष्य बनाया। परंपरागत कृषि पद्धतियों के प्रति जुनून से प्रेरित होकर, रायमती ने लुप्त होने के खतरे में पड़ी फसलों का अस्तित्व सुनिश्चित किया।
रायमती ने कहा, ‘‘हम पीढ़ियों से मोटे अनाज खाते आ रहे हैं। शुरू में, मुझे मोटे अनाज को संरक्षित करने और बढ़ावा देने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन, प्रख्यात कृषि विज्ञानी और कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने मुझे इस मिशन में मार्गदर्शन दिया। मैंने उनके मार्गदर्शन में न केवल अपने समुदाय के भीतर मोटे अनाज को बढ़ावा दिया, बल्कि इसे वैश्विक मंच पर भी ले गयी।’’
वह 2012 में ‘जीनोम सेवियर कम्युनिटी अवार्ड’ और 2015 में ‘जमशेदजी टाटा नेशनल वर्चुअल एकेडमी फेलोशिप अवार्ड’ जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। रायमती को उनकी उपलब्धियों के कारण नयी दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने मोटे अनाज की खेती में अपने योगदान को प्रदर्शित किया।
फरवरी 2024 में जी20 शिखर सम्मेलन में आर रायमती की भागीदारी ने टिकाऊ कृषि के लिए वैश्विक दूत के रूप में उनकी भूमिका को और उजागर किया। कृषि मंत्रालय द्वारा आयोजित एक प्रदर्शनी के दौरान, उन्होंने जी20 नेताओं की जीवनसाथियों को ‘कुंद्रा बाटी मडिया’ (फिंगर मिलेट्स) भेंट किया और मोटे अनाज की खेती के तरीकों का प्रदर्शन किया।
रायमती ने कहा, ‘‘मुझे जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेकर बहुत खुशी हुई। 20 देशों के नेताओं ने इसमें भाग लिया और मैंने अपने क्षेत्र के मोटे अनाज की पारंपरिक किस्मों और खेती के तरीकों का प्रदर्शन किया। यह मेरे समुदाय के लिए गर्व का क्षण था।’’
रायमती का काम उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं बढ़कर है। उन्होंने 2,500 से ज़्यादा किसानों को मोटे अनाज से संबंधित कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया है। वह ओडिशा बाजरा मिशन (ओएमएम) जैसी पहल को श्रेय देती हैं, जिन्होंने वैज्ञानिक तरीके और बेहतर तकनीक पेश की है, जिससे 2017 से उनके जिले में मोटे अनाज के उत्पादन और गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
रायमती ने कहा, ‘‘ज्वार-बाजरा जो कभी हमारे भोजन का मुख्य हिस्सा हुआ करता था, अब वैश्विक बाजारों तक पहुंच रहा है और सभी क्षेत्रों के लोग इसका सेवन कर रहे हैं। यह परिवर्तन पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करने के कारण हुआ है।’’
उन्होंने मोटे अनाज की खेती में मूल्य संवर्धन के महत्व पर भी जोर दिया है, तथा महिला किसानों के लिए प्रसंस्करण गतिविधियों और कठिन परिश्रम को कम करने वाले उपकरणों को बढ़ावा देने के लिए काम किया है।
रायमती के काम ने उन्हें अपने समुदाय और उससे बाहर की महिलाओं के लिए एक आदर्श बना दिया है। देशी फसलों के संरक्षण ने न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की है, बल्कि ओडिशा के आदिवासी क्षेत्रों में आर्थिक अवसर भी लाए हैं।
जयपुर (ओडिशा) स्थित स्वामीनाथन फाउंडेशन के वैज्ञानिक प्रशांत परिदा ने कहा, ‘‘जी-20 शिखर सम्मेलन में रायमती की भागीदारी तथा उन्हें राष्ट्रपति द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान किया जाना, टिकाऊ कृषि के महत्व को रेखांकित करता है।’’
भाषा आशीष