सीआरआर में कटौती से नकदी बढ़ेगी, निर्यातकों को आसान शर्तों पर ऋण मिलेगा: फियो
निहारिका पाण्डेय
- 06 Dec 2024, 03:05 PM
- Updated: 03:05 PM
नयी दिल्ली, छह दिसंबर (भाषा) फियो ने शुक्रवार को कहा कि आरबीआई के नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती के फैसले से बैंकों में नकदी बढ़ेगी, जिससे निर्यातकों को आसान शर्तों पर कर्ज मिलने में मदद मिलेगी।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष की पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में शुक्रवार को लगातार 11वीं बार नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा। वहीं, अर्थव्यवस्था में नकदी बढ़ाने के मकसद से सीआरआर (नकद आरक्षित अनुपात) को 4.5 प्रतिशत से घटाकर चार प्रतिशत कर दिया। इस कदम से बैंकों में 1.16 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध होगी। इसे 14 दिसंबर और 28 दिसंबर को दो किस्तों में प्रभावी किया जाएगा।
नकद आरक्षित अनुपात जमाराशि का वह अनुपात है जिसे बैंकों को केंद्रीय बैंक के पास रखना होता है।
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि निर्यातक पहले से ही नकदी के मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘ ऐसे समय में सीआरआर में कटौती से नगदी प्रवाह बढ़ाने में मदद मिलेगी।’’
सीआरआर में कटौती से बैंकिंग प्रणाली में 1.16 लाख करोड़ रुपये आएंगे और इससे अल्पावधि ब्याज दरें नरम होंगी तथा बैंक जमा दरों पर दबाव कम हो सकता है।
फियो ने पहले कहा था कि निर्यातकों को दिए जाने वाले बैंक ऋण में गिरावट से इस क्षेत्र को नुकसान होगा।
शीर्ष निर्यातक निकाय के अनुसार, 2021-22 से 2023-24 के बीच रुपये के संदर्भ में निर्यात में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मार्च 2024 में बकाया ऋण 2022 के इसी महीने की तुलना में पांच प्रतिशत कम रहा।
फियो के अध्यक्ष अश्विनी कुमार ने कहा कि अब सरकार को निर्यातकों के लिए ब्याज समतुल्यीकरण (या सब्सिडी) योजना को पांच साल तक बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।
कुमार ने कहा, ‘‘ ऋण की उपलब्धता से हमें विनिर्माण बढ़ाने और निर्यात को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इसलिए ऋण की लागत कम होनी चाहिए। यह एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों) की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में एक बड़ी मदद होगी।’’
हैंड टूल एसोसिएशन के चेयरमैन एस. सी. रल्हन ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण भुगतान में देरी हुई है।
रल्हन ने कहा, ‘‘ हमें निर्यात बढ़ाने के लिए सस्ती दरों पर ऋण की आवश्यकता है।’’
अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन के खिलाफ उच्च सीमा शुल्क लगाने के संकल्प के बारे में पूछे जाने पर सहाय ने कहा कि इससे भारतीय निर्यातकों को निर्यात के अवसर मिलेंगे, क्योंकि मांग यहां स्थानांतरित होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘ इसकी संभावना बहुत कम है कि अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर शुल्क बढ़ाएगा।’’
जालंधर स्थित हैंडटूल निर्यातक ए. के. गोस्वामी ने कहा कि यूरोप में मांग ‘‘अच्छी है और मुझे चालू वित्त वर्ष में इंजीनियरिंग निर्यात में अच्छी वृद्धि की उम्मीद है।’’
भाषा निहारिका