यूनियन कार्बाइड संयंत्र से चार सप्ताह के भीतर विषाक्त अपशिष्ट हटाए मध्यप्रदेश सरकार : उच्च न्यायालय
न्यायालय ने मामले की सुनवाई छह जनवरी, 2025 के लिए सूचीबद्ध कर दी। सं दिमो जितेंद्र
- 05 Dec 2024, 08:41 PM
- Updated: 08:41 PM
जबलपुर, पांच दिसंबर (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को यूनियन कार्बाइड फैक्टरी में पड़े विषाक्त अपशिष्ट का निपटान करने का निर्देश दिया और कहा कि गैस आपदा के 40 साल बाद भी अधिकारी ‘बेसुध’ हैं।
अदालत ने कहा कि भोपाल में अब बंद हो चुकी फैक्टरी में पड़े अपशिष्ट से एक और त्रासदी हो सकती है।
उच्च न्यायालय ने इसे ‘दुखद स्थिति’ करार देते हुए सरकार से चार सप्ताह के भीतर फैक्टरी से खतरनाक अपशिष्ट को हटाने का निर्देश दिया और ऐसा न करने पर अवमानना की कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी।
वर्ष 1984 में दो और तीन दिसंबर की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से अत्यधिक जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) का रिसाव हुआ, जिससे 5,479 लोगों की मौत हो गई और पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एसके कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने मंगलवार को पारित एक आदेश में कहा, “हम यह समझने में विफल हैं कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर विभिन्न निर्देश जारी करने के बावजूद आज तक विषाक्त अपशिष्ट को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।”
पीठ ने कहा, “यह वास्तव में एक दुखद स्थिति है क्योंकि संयंत्र से विषाक्त अपशिष्ट को हटाना, संयंत्र को बंद करना और आसपास की मिट्टी व भूजल में फैले दूषित पदार्थों को हटाना, भोपाल शहर की आम जनता की सुरक्षा के लिए सर्वोपरि आवश्यकता है।”
पीठ ने कहा कि संयोग से, भोपाल में यह गैस आपदा ठीक 40 साल पहले इसी तारीख (दो दिसंबर) को हुई थी।
खंडपीठ ने कहा, “गैस त्रासदी के 40 वर्ष बीत जाने के बावजूद वे अभी भी निष्क्रियता की स्थिति में हैं। हालांकि योजना को मंजूरी दे दी गई है, अनुबंध प्रदान किया गया है लेकिन फिर भी अधिकारी बेसुध हैं, जिससे कार्रवाई करने से पहले एक और त्रासदी हो सकती है।”
न्यायालय ने अधिकारियों से कहा कि वे जहरीले कचरे को लाने-ले जाने और निपटान के दौरान सभी सुरक्षा उपाय करें।
अदालत ने कहा कि विषाक्त कचरे को चार सप्ताह के भीतर निर्दिष्ट स्थान पर भेजा जाना चाहिए और ऐसा न करने पर मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से (न्यायालय के समक्ष) उपस्थित होकर यह स्पष्ट करना होगा कि इस न्यायालय द्वारा पारित विभिन्न आदेशों का अनुपालन क्यों नहीं किया गया है।
न्यायालय ने भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग के प्रमुख सचिव से कहा कि वे इस देश के पर्यावरण कानूनों के तहत वैधानिक दायित्वों और कर्तव्यों का पालन करें।
न्यायालय ने मामले की सुनवाई छह जनवरी, 2025 के लिए सूचीबद्ध कर दी। भाषा सं दिमो