पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों का असर
वैभव शोभना
- 05 Dec 2024, 04:53 PM
- Updated: 04:53 PM
(प्रदीप्त तापदार)
कोलकाता, पांच दिसंबर (भाषा) बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों ने पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक अधिकारों, सांप्रदायिक सद्भाव और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर बहस को फिर से हवा दे दी है, जिसमें सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा दोनों ही अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अगस्त में छात्रों के आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद से, बांग्लादेश के हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यापक हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं जिनमें मंदिरों में तोड़फोड़, घरों को जलाना और लोगों की हत्या शामिल है।
‘बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत’ के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी से स्थिति और खराब हो गई, जिन्हें पिछले सप्ताह अल्पसंख्यक अधिकारों की वकालत करने वाली एक रैली में जाते समय हिरासत में लिया गया था।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हमलों की निंदा की। भाजपा पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए, बनर्जी ने केंद्र सरकार से कड़ी कार्रवाई करने का आह्वान किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बांग्लादेश से सताए गए भारतीयों को वापस लाने में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले पर उनका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। लेकिन उन्होंने विदेश मंत्रालय से आग्रह किया कि वह बांग्लादेश के अधिकारियों और यदि आवश्यक हो तो संयुक्त राष्ट्र से संपर्क करे।
बनर्जी ने सुझाव दिया, ‘‘यदि आवश्यक हो, तो वहां की (अंतरिम) सरकार से बात करने के बाद एक अंतरराष्ट्रीय शांति सेना बांग्लादेश भेजी जाए ताकि उन्हें सामान्य स्थिति बहाल करने में मदद मिल सके।’’
उन्होंने सवाल किया, ‘‘जब बांग्लादेश में हिंदू आबादी कम हो रही थी, तब केंद्र सरकार इतने सालों तक क्या कर रही थी?’’
मुख्यमंत्री ने तत्काल कार्रवाई का आह्वान करते हुए कहा, ‘‘मैं चाहती हूं कि केंद्र सरकार बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाए।’’
तृणमूल कांग्रेस महासचिव कुणाल घोष ने भाजपा पर बांग्लादेश में हिंसा को मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने के लिए ‘राजनीतिक हथियार’ के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
घोष ने कहा, ‘‘जब वे विरोध में मार्च करते हैं, तो उनकी जवाबदेही कहां होती है? भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार चुप रहती है। अब 56 इंच का सीना कहां है? यह निष्क्रियता उनके पाखंड को उजागर करती है।’’
तृणमूल कांग्रेस ने इस बात पर जोर दिया है कि पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक सद्भाव को बनाए रखा जाना चाहिए।
पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ 2,217 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है।
इस बीच, भाजपा ने अपनी बयानबाजी तेज कर दी है और तृणमूल कांग्रेस पर पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के हितों की रक्षा करने में विफल रहने और बांग्लादेश में उनकी दुर्दशा पर आंखें मूंद लेने का आरोप लगाया है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा सिर्फ बांग्लादेश का मुद्दा नहीं है। यह एक मानवीय संकट है जो सीधे बंगाल को प्रभावित करता है। तृणमूल कांग्रेस की चुप्पी और तुष्टीकरण की राजनीति हिंदू समुदाय के साथ विश्वासघात है।’’
भाजपा ने बांग्लादेश में हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए भारत सरकार से और अधिक मजबूत प्रतिक्रिया की मांग करते हुए पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए हैं।
पार्टी ने इस मुद्दे को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू करने के अपने लंबे समय से चले आ रहे वादे से जोड़ने की भी कोशिश की है, जो बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में सताए गए अल्पसंख्यकों को यहां नागरिकता प्रदान करता है।
मजूमदार ने कहा, ‘‘बांग्लादेश की हिंसा से बचकर आ रहे हिंदुओं को भारत में उनके अधिकारों और सम्मान का आश्वासन दिया जाना चाहिए।’’
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी इसी तरह की राय को दोहराया और कहा कि बांग्लादेश में अशांति का पश्चिम बंगाल पर ‘निश्चित प्रभाव’ पड़ेगा।
अधिकारी ने कहा, ‘‘जहां भी हिंदुओं पर हमला होगा, हम न्याय के लिए लड़ेंगे। सीएए के प्रति तृणमूल कांग्रेस का विरोध उनके तुष्टीकरण के एजेंडे को दर्शाता है।’’
उन्होंने सीमा पार सताए गए हिंदुओं के जीवन और आजीविका की रक्षा करने की मुख्यमंत्री की इच्छाशक्ति पर सवाल उठाया।
अधिकारी ने कहा, ‘‘उनके (मुख्यमंत्री के) पास अपने सांसद हैं जिन्हें संसद में इस मामले को उठाना चाहिए, जो उनकी सही राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतिबिंब है। यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि बांग्ला भाषी हिंदुओं के अस्तित्व का संकट है और मुख्यमंत्री को राजनीति से ऊपर उठकर उनके साथ खड़ा होना चाहिए।’’
भाजपा ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए हैं। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने भी अपने आंदोलन को तेज कर दिया है और बड़ी संख्या में हिंदू शरणार्थी आबादी वाले जिलों में प्रदर्शन कर रहा है।
इस मुद्दे को लेकर अन्य विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं। वाम मोर्चा और कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों पर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘‘यह एक मानवीय मुद्दा है, कोई राजनीतिक फुटबॉल नहीं। आरोप-प्रत्यारोप के बजाय, राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को सीमा के दोनों ओर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।’’
राजनीतिक विश्लेषक बिस्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘क्षेत्र में कहीं भी सांप्रदायिक हिंसा का यहां व्यापक प्रभाव हो सकता है। राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए और मानवीय सहायता तथा राजनयिक हस्तक्षेप को प्राथमिकता देनी चाहिए।’’
चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘बांग्लादेश में हिंसा ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया आयाम जोड़ा है। यह क्षेत्र के सामाजिक-राजनीतिक ताने-बाने की परस्पर संबद्धता को दर्शाता है।’’
भाषा वैभव